तकनीक के युग में हर सेकंड लाखों डिजिटल सेवाएं उपयोगकर्ता तक पहुंचती हैं और इस विशाल तंत्र को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने में कुछ चुनिंदा कंपनियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इन्हीं में से एक है Cloudflare, जो पूरी दुनिया में लाखों वेबसाइटों को सुरक्षा, गति, सर्वर प्रबंधन और डेटा ट्रांसमिशन की सुविधा प्रदान करती है। बीते दिनों एक बार फिर Cloudflare में भारी तकनीकी समस्या आने से वैश्विक डिजिटल सेवाओं में बड़ा संकट पैदा हुआ। भारत सहित कई देशों में प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म ठप हो गए और उपयोगकर्ता घंटों इन्हें एक्सेस नहीं कर सके।

तीन सप्ताह में दूसरी बार Cloudflare सेवाओं का प्रभावित होना विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन चुका है, क्योंकि यह सीधे इंटरनेट की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न है।
क्या हुआ Cloudflare में
4 दिसंबर की दोपहर विश्वभर में कई वेबसाइट अचानक बंद हो गईं। शुरुआती जांच के बाद पता चला कि Cloudflare की APIs (Application Programming Interfaces) में तकनीकी खराबी आई, जिसके कारण डेटा-रिलेशन, लॉगइन सिस्टम, कंटेंट एक्सेस, भुगतान पृष्ठ और सुरक्षित बैकएंड इंटरफेस काम नहीं कर सके।
लेकिन सामान्य उपयोगकर्ता के लिए स्थिति सरल थी: वेबसाइट नहीं खुल रही थी या एक त्रुटि संदेश प्रदर्शित होता था।
घटनाक्रम के पहले 40 मिनट में समस्या व्यापक रूप से बढ़ गई और विश्वभर से शिकायतें दर्ज होने लगीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर लगातार टैग, पोस्ट और शिकायतों की भरमार हो गई।
किन प्लेटफॉर्म पर प्रभाव
Cloudflare की सेवाओं के डाउन होने का असर मुख्य रूप से उन प्लेटफॉर्म पर पड़ा, जिनके फंक्शन Cloudflare के DNS, Firewall, CDN या API आधारित सुरक्षा पर निर्भर थे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- Groww
- Coinbase
- Book My Show
- Canva
- Trading Platforms
इस दौरान लोगों को लॉगइन समस्या, भुगतान पृष्ठ खुलने में दिक्कत, धीमी वेबसाइट लोडिंग, ग्राफिक्स न दिखना, ऐप एरर और सर्वर टाइमआउट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
भारत में डिजिटल ट्रेडिंग सेवाएँ बाधित
भारत में Groww और Zerodha जैसी शेयर ट्रेडिंग सेवाएं व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। इसी कारण सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक ट्रेडिंग से जुड़े कई फंक्शन्स प्रभावित हो गए।
कुछ यूजर्स बता रहे थे कि वे न तो शेयर खरीद पा रहे थे और न ही बेच पा रहे थे।
कई यूजर्स को पोर्टफोलियो लाइव अपडेट नहीं दिखा।
Zerodha की ओर से बाद में बताया गया कि Kite सिस्टम को स्थिर कर दिया गया है और सर्विस सामान्य हुई।
पिछले महीने भी आई थी समस्या
18 नवंबर 2025 को भी Cloudflare में बड़ी दिक्कत आई थी, जिस दौरान भारत में कई एआई प्लेटफॉर्म प्रभावित हुए थे।
उस दौरान AI APIs, Chat authentication, Payment verification और bot interaction सेवा प्रभावित रही थी।
हालांकि उस समय ChatGPT, OpenAI सेवा सामान्य रूप से कार्यरत रही।
लेकिन नवंबर वाली समस्या अधिक गंभीर थी क्योंकि इसका असर अमेरिका और यूरोप तक दिखाई दिया था।
कुछ प्रभावित प्लेटफॉर्म:
- Truth Social
- कई प्रमुख AI websites
- खुद Cloudflare Dashboard
विशेषज्ञों की नजर में समस्या क्यों बड़ी
Cloudflare इंटरनेट की रीढ़ के समान माना जाता है। इसके बिना हजारों वेबसाइटों तक पहुंच संभव नहीं हो पाती।
कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि यह सिर्फ एक outage नहीं बल्कि डिजिटल जोखिम की चेतावनी है।
यदि ऐसी समस्या बार-बार बढ़ती है तो
- ई-कॉमर्स प्रभावित
- ट्रेडिंग नुकसान
- डिजिटल पेमेंट बंद
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम रुक
- क्लाउड सिक्योरिटी खतरे में
हो सकते हैं।
इंटरनेट सुरक्षा में Cloudflare की भूमिका
Cloudflare तीन प्रमुख स्तरों पर वेबसाइटों को सुरक्षित रखता है:
- DDoS Attack Protection
- Secure Layer Identification
- Traffic Filtering Mechanism
यदि अचानक बाहरी स्रोत से अत्यधिक ट्रैफिक भेजा जाए तो Cloudflare स्वयं वेबसाइट को डाउन होने से बचाता है।
इसी कारण दुनिया की सबसे अधिक ट्रैफिक वाली कंपनियाँ Cloudflare को अपनाती हैं।
आउटेज की तकनीकी वजह
कंपनी ने प्रारंभिक अपडेट में कहा:
- समस्या API Endpoints की अस्थिरता से उत्पन्न हुई
- फिक्स लागू किया गया
- कुछ सर्वर्स को री-रूट किया गया
- DNS Records auto-sync में विलंब हुआ
बाद में Cloudflare Dashboard फिर से ऑनलाइन किया गया।
बड़ी कंपनियाँ क्यों Cloudflare पर निर्भर हैं
कई कंपनियाँ दुनिया भर में करोड़ों उपयोगकर्ताओं को एक साथ सेवा प्रदान करती हैं।
ऐसे में यदि किसी सर्वर पर लोड बढ़ जाता है तो वेबसाइट बंद हो जाती है।
- Cloudflare Load Balancing Mechanism सक्रिय करता है
- दूसरे सर्वर पर डाटा ट्रांसफर
- ट्रैफिक का ऑटो शिफ्ट
- Firewall Security लागू
इसीलिए डिजिटल बड़ी कंपनियाँ इसे चुनती हैं।
क्या भविष्य में यह फिर हो सकता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल ट्रैफिक तेजी से बढ़ रहा है और तकनीकी सिस्टम लगातार जटिल होते जा रहे हैं।
इसलिए ऐसी तकनीकी भूलें आगे भी संभव हैं। कंपनियों को Backup CDN और Alternative API networks का उपयोग करना होगा
ताकि किसी केंद्रीय सिस्टम पर सम्पूर्ण निर्भरता न रहे।
