भारत और रूस के संबंध दशकों से वैश्विक राजनीति की धुरी में महत्वपूर्ण रहे हैं। 1971 की संधि से लेकर 2025 में बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों तक, दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे को रणनीतिक मोर्चों पर सहारा दिया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिन की भारत यात्रा पूरी करने के बाद स्वदेश लौट चुके हैं। लेकिन इस यात्रा के समापन से पहले उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने पाकिस्तान की राजनीतिक और कूटनीतिक नींव को गंभीर रूप से हिला दिया है। यह बयान सीधे पाकिस्तान का नाम लिए बिना अफगानिस्तान, क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर था, लेकिन इसके निहितार्थ सीधे पाकिस्तान की नीतियों और व्यवहार पर जाते हैं।

नीचे इस संपूर्ण घटनाक्रम, राजनीतिक पृष्ठभूमि, वैश्विक दृष्टिकोण, कूटनीतिक संकेतों, भारत पर प्रभाव और इस बयान के भविष्य के परिणामों पर विस्तारपूर्वक विश्लेषण प्रस्तुत किया जा रहा है।
भारत यात्रा का महत्व और भविष्य का एजेंडा
राष्ट्रपति पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हुई जब दुनिया ऊर्जा संकट, क्षेत्रीय युद्धों, आर्थिक चुनौतियों, दक्षिण एशिया में अस्थिरता और कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा से गुजर रही है। भारत और रूस के बीच पारंपरिक संबंध अब नई दिशा ले रहे हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा, तकनीकी सहयोग, ऊर्जा विकल्प, उर्वरक आपूर्ति, वैश्विक आतंकवाद, सामरिक साझेदारी और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था जैसे विषयों पर सहमति बनाई।
भारत ने इस यात्रा के दौरान दो महत्वपूर्ण रणनीतिक संदेश स्थापित किए पहला, रूस के साथ दीर्घकालीन सहयोग। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय दबावों से ऊपर अपने हितों पर आधारित निर्णय।
अफगानिस्तान पर पुतिन का विस्तृत बयान
राष्ट्रपति पुतिन ने अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति को वैश्विक मंच पर एक अलग नज़रिए से रखा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अफगानिस्तान दशकों तक बाहरी हस्तक्षेपों, गृहयुद्ध और आतंकवादी ढांचे की वजह से संकट में रहा, लेकिन वर्तमान में वहां सत्ता पर काबिज तालिबान कई मोर्चों पर सुधारात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है।
पुतिन ने कहा कि अफगानिस्तान की मौजूदा प्रशासन आतंकवाद से मुकाबला कर रही है, देश में अफीम उत्पादन में कमी आई है| कानून व्यवस्था पूर्व की तुलना में बेहतर हुई है| रूस ने तालिबान सरकार को मान्यता दी और यह कदम विश्व राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है। क्योंकि संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय देशों और दक्षिण एशिया में इसकी औपचारिक मान्यता अभी विवाद में है।
पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष संदेश
यात्रा के अंत में दिया गया बयान पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
- पाकिस्तान ने पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान पर कई आरोप लगाए
- अफ़गानिस्तान आतंकवादी संगठनों को शरण दे रहा है
- अफगान सीमा से पाकिस्तान में हमले बढ़े हैं
- तालिबान प्रशासन पाकिस्तान को सहयोग नहीं कर रहा
लेकिन पुतिन ने विपरीत स्थिति बताकर उन दावों को चुनौती दी।
इससे पाकिस्तान की वर्तमान विदेश नीति और सुरक्षा विमर्श पर गंभीर दबाव बनने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार
- रूस का यह बयान पाकिस्तान को अलग-थलग करने वाला है
- भारत की सुरक्षा चिंताओं को समर्थन देने वाला है
- अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की दिशा में बढ़ता कदम है
अफगानिस्तान में आतंकवाद और ड्रग्स कारोबार पर विश्लेषण
अफगानिस्तान वर्षों तक विश्व में हेरोइन और ओपियम की सबसे बड़ी आपूर्ति का केंद्र रहा। लेकिन तालिबान शासन के बाद
- खसखस की खेती पर प्रतिबंध लगाया गया
- ड्रग सिंडिकेट पर बड़े अभियान चलाए गए
- सड़क, बाजार और सीमा व्यापार की निगरानी बढ़ाई गई
रिपोर्टों के अनुसार
2024 के अंत तक अवैध खेती में लगभग 85% की कमी दर्ज की गई
व्यापारिक मार्गों से ड्रग्स निर्यात में उल्लेखनीय कमी आई
रूस और मध्य एशिया लंबे समय तक अफगान ड्रग्स के उपभोक्ता बाजार रहे हैं।
इसलिए रूस विशेष रूप से इस पहल को महत्वपूर्ण मानता है।
भारत-रूस संबंधों का भू-राजनीतिक असर
यह बयान भारत के हितों से सीधे जुड़ा हुआ है क्योंकि भारत अफगानिस्तान के व्यवस्थित विकास का प्रबल समर्थक रहा है| भारत ने वहां बांध, सड़कें, अस्पताल, संसद भवन, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए लेकिन 2021 के बाद स्थिति बदल गई, तालिबान ने सत्ता ली| भारत को कूटनीतिक संतुलन बनाने की आवश्यकता हुई
अब रूस जिस तरह तालिबान के पक्ष में खड़ा दिख रहा| भारत उसके माध्यम से अपने संवाद को आगे बढ़ा सकता है| भविष्य में
- मानवीय सहायता
- सड़क गलियारों पर सहयोग
- खनन निवेश
- ऊर्जा आपूर्ति, इन क्षेत्रों में भारत की भूमिका बढ़ सकती है
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया की संभावनाएं
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं देगा लेकिन रणनीतिक समीक्षा शुरू होगी क्योंकि पाकिस्तान को लगता है कि
- अफगान सीमा से आतंक बढ़ा
- तालिबान पाकिस्तान समर्थक नहीं रहा
- चीन भी कूटनीतिक रूप से संतुलित रुख अपनाए हुए है
रूस का यह विस्तृत पक्ष पाकिस्तान को असहज करेगा।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा भले ही औपचारिक रूप से समाप्त हो गई लेकिन बयान का राजनीतिक प्रभाव अभी शुरू हुआ है| अगले कुछ महीने भारत की पश्चिम एशियाई रणनीति, रूस की एशिया प्राथमिकता और अफगानिस्तान के भविष्य इन सबको प्रभावित करेंगे, यह बयान आने वाले समय में चर्चा, विश्लेषण और नीति गठन का आधार हो सकता है।
