हरियाणा के सिवाह मूल निवासी और विवाह के बाद सोनीपत के भावड़ गांव में रहने वाली पूनम का नाम पिछले कुछ समय से चर्चाओं में है। इस नाम के आसपास अब जो खुलासे हो रहे हैं, वे सामान्य जीवनशैली, पारिवारिक संबंधों और मनोवैज्ञानिक अस्थिरता के बेहद गंभीर सवाल खड़े करते हैं। पूनम का जीवन बाहर से देखने में एक साधारण घरेलू महिला जैसा दिखाई देता था, लेकिन भीतर एक अलग ही मानसिक तनाव वर्षों से पनप रहा था। यही तनाव बाद में ऐसी घटनाओं के रूप में सामने आया जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया।

कॉलेज के दिनों में शांत, सीमित और एकाकी व्यक्तित्व
पूनम ने बीएड की पढ़ाई मनाना क्षेत्र के एक कॉलेज से की थी। शिक्षकों के अनुसार वह पढ़ाई में औसत थी, विवादों से दूर रहने वाली, और संवाद से बचती हुई छात्रा। सामान्य सहपाठियों के विपरीत वह बहुत कम लोगों से जुड़ी रहती थी। कक्षाओं में वह अक्सर अपनी किताबों और विषयों तक सीमित रहती, न तो मित्र मंडली बनाई और न ही किसी गतिविधि में सक्रिय हुई। मनोविज्ञान विशेषज्ञ मानते हैं कि यह व्यवहार किसी व्यक्तित्व के भीतर दबे द्वंद्व, आत्मसंकोच और दूसरों से दूरी की झिझक को दर्शाता है।
उसके शिक्षकों को इस बात की धुंधली स्मृति है कि वह बेहद शांत स्वभाव की थी और अपनी बातों तक सीमित रहने वाली। वर्षों बाद जब उसके संबंध में अपराध सामने आया, तो पूर्व सहपाठी और शिक्षण स्टाफ अचंभित रह गए।
विवाह के बाद जीवन की दबी हुई उलझनें
वर्ष 2019 में पूनम की शादी नवीन नामक युवक से हुई। शुरुआती वर्ष समान परिस्थितियों वाले सामान्य दांपत्य जीवन की तरह रहे। दोनों का रहन-सहन, परिवारिक परिवेश और सामाजिक संबंध सामान्य रूप से आगे बढ़ते दिखे। विवाह के बाद समय-समय पर छोटी-मोटी घरेलू कहासुनी, स्वभाव और व्यवहारगत मतभेद सामने आते रहे। हालांकि ऐसे मतभेद किसी भी परिवार में आम प्रतीत होते हैं, किंतु विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के भीतर पहले से कोई छिपी मनोवैज्ञानिक दिक्कत हो, तो यह सामान्य बातें भी गंभीर बनी जा सकती हैं।
पूनम धैर्यशील नहीं थी, वह भावनात्मक घटनाओं पर प्रतिक्रिया लंबे समय तक मन में रखती, बजाय इसके कि वह अपनी बात स्पष्ट रूप से व्यक्त करे। समय-समय पर घर में छोटी-छोटी बातों पर कुछ असहमति होती रही। परिजन को कभी यह अंदेशा नहीं हुआ कि उसके मन में ऐसी हिंसक प्रवृत्ति भी जन्म ले रही है।
सुंदर चेहरे, संवेदनहीनता और मानसिक द्वंद्व
जिन बच्चों के प्रति कभी वह सहज दिखाई देती थी, उनके आसपास भी भीतर ही भीतर एक असामान्य मानसिक असंतुलन बनता रहा। विशेषज्ञों के अनुसार कई बार व्यक्ति किसी विशेष संवेदनात्मक स्थिति या दृश्य से विचलित होकर नकारात्मक प्रतिक्रिया विकसित कर सकता है। उसके सामने जो मानसिक प्रतिक्रिया बनती, वह लंबे समय तक भीतर दबती रहती। दिखने में सामान्य व्यवहार के पीछे वही तनाव बाद में एक विकृत निर्णय-स्थिति में बदल गया।
मामले के खुलने पर परिवार का विश्वास टूटना
पूनम के मायके पक्ष के लोग अब भी गहरी उलझन में हैं। उसकी मां के अनुसार वह पहले बिल्कुल सामान्य थी, घर-परिवार के साथ गहरी संवेदना रखती थी। परिवार को कभी उम्मीद नहीं थी कि ऐसा कोई मानसिक विचलन उसकी सोच में बसेगा। परिवार को एक समय शक भी हुआ था, पर उस समय संबंधित परिस्थितियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उस दौर में आवश्यक जांच, चिकित्सकीय मार्गदर्शन और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता थी, जो समय रहते नहीं हुआ।
गांव में चर्चा, भय और कानूनी कार्रवाई
जब मामले की पुष्टि के बाद पुलिस और विश्लेषण टीम उसके मायके गांव पहुंची, गांव के लोग स्तब्ध रह गए। पुलिस ने परिजनों से बयान दर्ज किए, रिश्तेदारों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और कई लोगों ने मानवीय दुःख-पीड़ा की अनुभूति साझा की। मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों का मत है कि ऐसे मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती बल्कि मानसिक अध्ययन, व्यवहार-पुनर्स्थापन और अपराध-मूल कारण का पता लगाना भी आवश्यक होता है।
यह घटना उन मामलों में शामिल है जो मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। आतंरिक संघर्ष, असंतुलित जीवन-आदतें, दब हुए तनाव, भावनात्मक टूटन, सामाजिक बाध्यताएं और संवादहीनता कई बार किसी व्यक्ति को ऐसे मोड़ पर ला देती हैं जहां सामान्य चेतना भी अवरोधित होने लगती है।
समाज के लिए बड़ी सीख
इस घटना से सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि
घर में यदि कोई व्यक्ति लगातार अलग रहता है, सामान्य सामाजिक संपर्क से बचता है, अपनी बात स्पष्ट नहीं रखता, बच्चों-परिवार के प्रति अचानक असामान्य प्रतिक्रिया दिखाता है, तो माता-पिता, दंपति-साथी, शिक्षक या रिश्तेदारों को समय रहते चिकित्सकीय या मनोवैज्ञानिक सहायता अवश्य लेनी चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा आज दुनिया में अत्यंत जरूरी विषय बन चुका है और ऐसे उदाहरण इसे और अधिक स्पष्ट करते हैं।
