उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में जल्द ही खगोलशास्त्र की एक नई दुनिया खुलने जा रही है। 39.62 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नक्षत्रशाला और साइंस सिटी का भूमि पूजन गुरुवार को किया जाएगा। यह प्रदेश की तीसरी नक्षत्रशाला होगी — लखनऊ और गोरखपुर के बाद अब आगरा इस वैज्ञानिक यात्रा में नया अध्याय जोड़ेगा।

यह परियोजना न केवल छात्रों को खगोलशास्त्र की गहराइयों से परिचित कराएगी, बल्कि शैक्षिक पर्यटन (Educational Tourism) के नए द्वार भी खोलेगी। पूरी नक्षत्रशाला सौर ऊर्जा से संचालित होगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।
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18 महीनों में तैयार होगी 39.62 करोड़ की परियोजना
नक्षत्रशाला और साइंस सिटी का निर्माण नोर्मल कंपाउंड क्षेत्र में किया जाएगा। इस अत्याधुनिक केंद्र को पूरा करने में लगभग 18 महीने का समय लगेगा।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार गुरुवार को इसका भूमि पूजन करेंगे।
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जब उनके पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की जिम्मेदारी थी, तभी उन्होंने इस परियोजना की कार्ययोजना तैयार की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्तुत यह योजना कैबिनेट में स्वीकृत होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की भूमि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को स्थानांतरित की गई।
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नक्षत्रशाला: विज्ञान और खगोलशास्त्र का नया केंद्र
नक्षत्रशाला का मुख्य उद्देश्य छात्रों और युवाओं को ब्रह्मांड के रहस्यों से परिचित कराना है। यहाँ विद्यार्थियों को तारों, ग्रहों, उपग्रहों और आकाशगंगाओं के अध्ययन का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।
यह केंद्र खगोलशास्त्र में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत होगा, जहां उन्हें टेलिस्कोप, इंटरएक्टिव मॉडल्स और डिजिटल प्रोजेक्शन तकनीक से सीखने का अवसर मिलेगा।
इससे पहले लखनऊ और गोरखपुर में नक्षत्रशालाओं की स्थापना ने छात्रों में विज्ञान के प्रति गहरी रुचि जगाई थी। आगरा की नक्षत्रशाला इस परंपरा को और विस्तारित करेगी।
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शैक्षिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
यह परियोजना आगरा जैसे ऐतिहासिक शहर में शैक्षिक पर्यटन (Educational Tourism) को नई दिशा देगी।
देश-विदेश से आने वाले पर्यटक सिर्फ ताजमहल या फतेहपुर सीकरी ही नहीं, बल्कि अब विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया का अनुभव लेने के लिए भी आगरा का रुख करेंगे।
इससे न केवल आगरा की पहचान एक सांस्कृतिक शहर के रूप में बल्कि विज्ञान केंद्र के रूप में भी स्थापित होगी।
स्थानीय युवाओं के लिए इससे रोजगार के अनेक अवसर सृजित होंगे — जैसे गाइड, तकनीकी सहायक, रिसर्च स्टाफ और प्रबंधन कर्मी।
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सौर ऊर्जा से संचालित होगा पूरा परिसर
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, नक्षत्रशाला का पूरा परिसर सौर ऊर्जा से संचालित होगा।
यह पहल ऊर्जा संरक्षण और ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट उदाहरण है।
कुल 11,149 वर्ग मीटर भूमि में विकसित होने वाले इस साइंस पार्क में कई अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी:
भूतल पर नक्षत्रशाला (Planetarium Dome)
साइंस एग्जीबिशन हॉल
वर्कशॉप और प्रयोगशाला क्षेत्र
डिजिटल पेंट्री और ऑडियो-विजुअल कक्ष
बच्चों के लिए साइंस फन ज़ोन
इससे छात्रों को विज्ञान को केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव से समझने का अवसर मिलेगा।
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भविष्य के वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणास्रोत
भारतीय सभ्यता में सदियों से खगोलशास्त्र का गहरा संबंध रहा है। आर्यभट्ट और वराहमिहिर जैसे महान विद्वानों ने तारों और ग्रहों की गति पर विश्व को नई दिशा दी थी।
नक्षत्रशाला इसी विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का प्रयास है।
भाजपा के महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने कहा, “इस परियोजना का उद्देश्य छात्रों को विज्ञान और खगोलशास्त्र के रहस्यों से रूबरू कराना है। इससे बच्चों में वैज्ञानिक सोच का विकास होगा और देश को नए वैज्ञानिक मिलेंगे।”
इस अवसर पर ओम प्रताप सिंह और सुनील करमचंदानी भी उपस्थित रहे।
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विज्ञान, संस्कृति और पर्यटन का संगम
आगरा पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों का पसंदीदा गंतव्य है।
अब जब नक्षत्रशाला और साइंस सिटी अस्तित्व में आएगी, तो यह शहर संस्कृति, विज्ञान और पर्यटन — इन तीनों के संगम का प्रतीक बन जाएगा।
यहां स्कूली छात्र, शोधकर्ता, परिवार और पर्यटक — सभी के लिए ज्ञानवर्धक अनुभव होंगे।
इसके अलावा, शहर के स्कूलों और कॉलेजों के विज्ञान विभागों को भी इससे शोध और प्रयोग के नए अवसर मिलेंगे।
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निष्कर्ष: आगरा बनेगा विज्ञान और खगोलशास्त्र का नया केंद्र
आगरा की नक्षत्रशाला सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भविष्य की वैज्ञानिक चेतना का प्रतीक है।
यह केंद्र युवाओं में ब्रह्मांड के प्रति जिज्ञासा जगाएगा, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा और शहर की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगा।
जब यह परियोजना पूरी तरह तैयार हो जाएगी, तब आगरा न केवल ताजमहल की वजह से, बल्कि नक्षत्रों की दुनिया की वजह से भी विश्वभर में जाना जाएगा।
