पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाबरी मस्जिद के निर्माण में वे सरकार से एक रुपया भी नहीं लेंगे। इस ऐतिहासिक बयान के साथ उन्होंने स्थानीय जनता और मुस्लिम समुदाय को यह भरोसा दिलाया कि मस्जिद का निर्माण पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से और समुदाय के सहयोग से होगा।

हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद के बेलडांगा पहुंचे, जहां बाबरी मस्जिद के शिलान्यास समारोह का आयोजन हुआ। समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मस्जिद की पवित्रता और धार्मिक महत्व बनाए रखने के लिए सरकारी धन की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने यह भी बताया कि मस्जिद निर्माण के लिए कुल 80 करोड़ रुपये का योगदान स्थानीय लोगों और अन्य जिलों से जुटाया जाएगा। मालदा, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना के लोग इस निर्माण में सहयोग करेंगे।
सरकारी धन से दूरी और धार्मिक पवित्रता
हुमायूं कबीर ने यह स्पष्ट किया कि यदि निर्माण के लिए सरकारी धन लिया गया, तो मस्जिद की पवित्रता पर असर पड़ सकता है। इसी कारण उन्होंने तय किया कि केवल निजी और सामुदायिक योगदान के जरिए यह निर्माण होगा। उन्होंने उपस्थित लोगों को यह विश्वास दिलाया कि मस्जिद निर्माण में किसी प्रकार की राजनीतिक दखलंदाजी नहीं होगी और यह पूरी तरह से धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से सुरक्षित रहेगा।
पार्टी से निलंबन और राजनीतिक संघर्ष
हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस से पार्टी विरोधी गतिविधियों और सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए निलंबित किया गया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को कई बार चेतावनी देने और उनके विरोध के बावजूद सार्वजनिक रूप से बयान देने के कारण यह कदम उठाया गया। निलंबन के बाद हुमायूं कबीर ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने और नई पार्टी बनाने की योजना की घोषणा भी की है। उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
मुर्शिदाबाद में शिलान्यास समारोह
मुर्शिदाबाद में शिलान्यास के दौरान हुमायूं कबीर ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि दोपहर 12 बजे के बाद कुरान पढ़ी जाएगी और उसके बाद नींव रखी जाएगी। उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस का धन्यवाद किया जिन्होंने सुरक्षा और समारोह के सुचारू संचालन में मदद की। समारोह में कई मुस्लिम समुदाय के लोग अपने सिर पर ईंट रखकर मस्जिद निर्माण में भाग ले रहे थे। यह एक सामुदायिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
मस्जिद निर्माण के लिए जुटाई जा रही सहायता और संसाधन
बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए मालदा समेत विभिन्न जिलों से निर्माण सामग्री मुर्शिदाबाद के बेलडांगा पहुंचाई जा रही है। कई लोग व्यक्तिगत प्रयास से सामग्री लेकर आए हैं। कुछ लोगों ने अपने सिर पर ईंट रखकर इस ऐतिहासिक निर्माण कार्य में भागीदारी दिखाई। हुमायूं कबीर ने जनता से अपील की कि वे अपने सहयोग और समर्थन से इस धार्मिक धरोहर को पूरा करें।
सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण
हुमायूं कबीर ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को यह विश्वास दिलाया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण उनके सहयोग से स्वतंत्र रूप से होगा। उन्होंने समुदाय की एकजुटता और सहयोग पर जोर दिया। इस निर्माण को केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे समाज में सांप्रदायिक सौहार्द और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य की योजना और स्थानीय प्रशासन का समर्थन
हुमायूं कबीर ने बताया कि मस्जिद निर्माण के लिए उनके पास 25 बीघा जमीन है, लेकिन स्थानीय प्रशासन कुछ सीमाओं और प्रक्रियाओं के कारण उन्हें रोकने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास में प्रशासन और सुरक्षा बल सहयोग कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि निर्माण कार्य सुचारू रूप से चले। उन्होंने लोगों को विश्वास दिलाया कि सरकार से एक रुपया भी न लेने का उनका निर्णय धार्मिक पवित्रता की रक्षा और समुदाय के विश्वास को बनाए रखने के लिए है।
निष्कर्ष
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना है। हुमायूं कबीर ने सरकारी धन को ठुकराकर और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से इस निर्माण को स्वतंत्र और सुरक्षित बनाने का संकल्प लिया है। इस कदम ने न केवल मुस्लिम समुदाय को बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले दिनों में मस्जिद निर्माण और हुमायूं कबीर की राजनीतिक गतिविधियां दोनों ही जनता और मीडिया के लिए महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।
