इस्लामाबाद में हाल ही में पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य दुनिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) बनाने का नोटिफिकेशन जारी किया। यह कदम न केवल पाकिस्तान के सैन्य ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, बल्कि इसके क्षेत्रीय प्रभाव और रणनीतिक संतुलन पर भी गहरा असर डाल सकता है। असीम मुनीर की यह नियुक्ति पाकिस्तान में तीनों सेनाओं—थलसेना, वायुसेना और नौसेना—के सर्वोच्च पदों को जोड़ने वाले पहले जनरल के रूप में की गई है।

असीम मुनीर की सेना में तेज़ी से बढ़ती प्रतिष्ठा और राजनीतिक खेल ने उन्हें इस ऊंचे पद तक पहुँचाया है। लंबे समय तक चलने वाले राजनीतिक मोलभाव और शक्तियों के संतुलन के बाद यह नोटिफिकेशन जारी हुआ। नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ के साथ की गई बातचीत के बाद ही असीम मुनीर की नियुक्ति को अंतिम रूप दिया गया। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में मीडिया से बातचीत में यह भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान अब सुधार की दिशा में अग्रसर है और देश नई ऊँचाइयों को छूने वाला है।
विश्लेषकों का मानना है कि असीम मुनीर ने यह पद हासिल करने के लिए न केवल सैन्य प्रदर्शन को बढ़ाया बल्कि राजनीतिक दबाव भी अच्छे तरीके से संभाला। उनके निशाने पर भारत और तालिबान हैं, और यह उनके जिहादी दृष्टिकोण की स्पष्ट झलक देता है। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी सेना की हार और तालिबान के जवाबी हमले ने उनकी सैन्य रणनीति पर प्रश्न चिन्ह लगाए हैं। इसके अलावा, देश में बेरोजगारी और आंतरिक विद्रोह भी उनके लिए चुनौती बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस नियुक्ति की सिफारिश की और राष्टपति जरदारी ने इसे मंजूरी दी। असीम मुनीर का कार्यकाल पांच साल का है, जबकि वायुसेना प्रमुख जहीर अहमद बाबर सिद्धू का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया गया है। राणा सनाउल्लाह ने कहा कि CDF का गठन राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके लिए कानून में बदलाव किए गए हैं।
विश्लेषकों ने यह भी बताया कि नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ की मोलभाव प्रक्रिया में असीम मुनीर का डिप्टी नियुक्त करना उनके हित में था। असीम मुनीर की जिहादी सोच और डोनाल्ड ट्रंप के साथ दोस्ताना संबंध भविष्य में भारत और पड़ोसी देशों के लिए सतर्कता की आवश्यकता दिखाते हैं।
इस नियुक्ति के बाद पाकिस्तान की सेना की रणनीति में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। परमाणु हथियारों के बजाय मिसाइल और ड्रोन प्रौद्योगिकी पर जोर देना, एयरफोर्स और नौसेना की नई योजनाएं, और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए सैन्य साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करना इसके संकेत हैं। भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के साझा अभ्यास से भी क्षेत्रीय संतुलन में बदलाव की संभावनाएं नजर आती हैं।
इसके अलावा, पाकिस्तान अमेरिका और तुर्की के साथ अपनी सैन्य साझेदारी मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है। लड़ाकू ड्रोन फैक्ट्रियों की स्थापना और पांचवीं पीढ़ी के जेट प्रोग्राम पर काम इस दिशा में उठाए गए कदम हैं। देश में राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक विद्रोह के बीच असीम मुनीर की नियुक्ति ने उन्हें देश के सबसे ताकतवर जनरल के रूप में स्थापित किया है।
विश्लेषकों का कहना है कि असीम मुनीर की भूमिका अब केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और क्षेत्रीय रणनीति में भी निर्णायक होगी। उनकी नियुक्ति से पाकिस्तान के सामरिक दृष्टिकोण, भारत-पाक सीमा पर हालात, और तालिबान व टीटीपी के साथ संघर्ष प्रभावित होंगे। असीम मुनीर की सख्त और निर्णायक सोच ने उन्हें पाकिस्तान के इतिहास में पहले CDF बनने वाला जनरल बना दिया है।
इस नियुक्ति के बाद पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और सेना की रणनीति में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। नवाज और शहबाज शरीफ के बीच मोलभाव ने यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक और सैन्य ताकत का संतुलन पाकिस्तान के भविष्य को प्रभावित करने वाला है।
