रायसेन जिले में हाल के दिनों में यातायात नियमों को लेकर सख्त व्यवस्था की जा रही है। लगातार बढ़ते सड़क दुर्घटना मामलों, लापरवाह ड्राइविंग, अनियंत्रित गति और सड़कों पर अव्यवस्थित यातायात के कारण प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू किया है। रायसेन जिले का मुख्य फोकस सड़क पर अनुशासन कायम रखना, नागरिकों को जागरूक करना और दुर्घटनाओं को रोकना है। इस अभियान के तहत यातायात पुलिस की कार्रवाइयों ने जिले में अनुशासन को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया है कि ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वालों को अब किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी।

अभियान की पृष्ठभूमि
बीते कुछ महीनों में परिवहन विभाग और यातायात विभाग दोनों को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शहर में बिना हेलमेट वाहन चलाना, तेज गति से बाइक और कार चलाना, गलत दिशा में वाहन निकालना, सीट बेल्ट का उपयोग न करना और ओवरलोडिंग जैसी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। इसके अलावा, छोटे बच्चों को गाड़ियों की चाबियां सौंपने की प्रवृत्ति भी सामने आई जो न केवल अवैध है बल्कि जानलेवा भी हो सकती है।
इस संदर्भ में पुलिस मुख्यालय द्वारा जिलों को निर्देश जारी किए गए कि सार्वजनिक रूप से अनुशासन लाने और लोगों को यातायात कानूनों के प्रति जागरूक करने हेतु विशेष अभियान चलाया जाए। इसी निर्देश के बाद रायसेन यातायात पुलिस सक्रिय हुई।
बड़े स्तर पर कार्रवाई
शनिवार को अभियान के तहत रायसेन ट्रैफिक पुलिस ने एक व्यापक कार्रवाई करते हुए कुल 218 वाहनों के चालान काटे। इनमें अधिकतर मामले बिना हेलमेट दोपहिया चलाने, सीट बेल्ट न लगाने, वैध दस्तावेज न रखने, गलत पार्किंग तथा सड़क अवरोध संबंधी थे। कुल मिलाकर 88,600 रुपये का जुर्माना तत्काल वसूला गया। यह आंकड़ा काफी बड़ा है और यह दर्शाता है कि लापरवाही करने वाले वाहन चालकों की संख्या भी बड़ी है।
इस कार्रवाई के दौरान कुछ वाहन चालकों ने मौके पर दस्तावेज प्रस्तुत किए, जबकि कई लोगों ने उल्लंघन को स्वीकार करते हुए तत्काल चालान राशि जमा करवाई। कुछ मामलों में चेतावनी देकर भी छोड़ा गया लेकिन ऐसे उल्लंघन कम थे।
नियम पालन और जागरूकता का अभाव
ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के अनुसार शहर में कई वाहन चालक नियमों का ज्ञान होने के बाद भी नियमों का पालन नहीं करते। कई वाहन चालक हेलमेट पहनने से बचते हैं जबकि उन्हें पता है कि दुर्घटना के समय हेलमेट ही उनकी जान बचा सकता है। कई लोग सीट बेल्ट लगाने में लापरवाही करते हैं, हालांकि यही बेल्ट अचानक ब्रेक लगने पर जीवन बचा सकती है।
यातायात पुलिस का यह भी कहना है कि किशोरों द्वारा मोटरसाइकिल चलाने की शिकायतें भी लगातार मिलती हैं, इसलिए आने वाले दिनों में लाइसेंस और आयु संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। अभियान में विद्यालयों और कॉलेजों के आसपास विशेष निगरानी की भी योजना है।
सामाजिक स्तर पर असर
इस कार्रवाई के बाद कई वाहन चालकों ने मान्यता दी कि अभियान से जागरूकता बढ़ी है। पहले लोग अक्सर चालान से बचने की कोशिश करते थे, लेकिन इस बार पुलिस ने प्रणाली को डिजिटल रूप से व्यवस्थित किया है। चालान के साथ वाहन चालक के मोबाइल पर भी संदेश भेजे जा रहे हैं ताकि वह जुर्माने की रसीद सुरक्षित रख सके।
कई लोग इस अभियान के समर्थन में सामने आए। उनका कहना है कि सड़कें सुरक्षित बनानी हों तो जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की नहीं बल्कि आम नागरिकों की भी है। वाहन चालक खुद नियमों का पालन करेंगे तभी यह अभियान अपना उद्देश प्राप्त करेगा।
दस दिसंबर तक अभियान जारी
पुलिस मुख्यालय के निर्देश अनुसार यह विशेष अभियान आगामी 10 दिसंबर तक चलेगा। इस अवधि में प्रतिदिन इसी प्रकार की कार्रवाई होगी। शहर की मुख्य सड़कें, बाजार क्षेत्र, सरकारी कार्यालयों के निकट मार्ग, और व्यस्त चौराहों पर विशेष निगरानी स्थापित की गई है।
इस दौरान वाणिज्यिक वाहनों, ऑटो, बस और मालवाहक वाहनों पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। ओवरलोडिंग, परमिट की कमी, दस्तावेजों की अवैधता और यात्री क्षमता से अधिक सवारी होने पर कार्रवाई तय मानी जाएगी।
यातायात और सुरक्षा के बीच संबंध
अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल चालान वसूलना नहीं बल्कि दुर्घटनाओं को कम करना है। शहर में पहले हुए हादसों की समीक्षा में पाया गया कि बिना हेलमेट चलाना, शराब पीकर वाहन चलाना, गलत दिशा में वाहन चलाना और तेज गति दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण रहे।
कई परिवारों ने दुर्घटनाओं में अपने परिजन खोए हैं। उनके लिए प्रशासन ने नियमों को सख्त करने का निर्णय लिया। यह कदम मानव जीवन की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आने वाले समय में बदलाव
अभियान के बाद संकेत मिल रहे हैं कि शहर में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा। सड़क संकेत और मार्किंग कार्य भी शुरू किया जा रहा है। संभव है कि पार्किंग व्यवस्था को अलग से निर्धारित किया जाए। चालान के बाद वाहन चालकों को नियम पुस्तिका उपलब्ध कराने की भी योजना है।
इस अभियान को harigeet pravaah ने जिम्मेदारीपूर्ण प्रयास बताते हुए कहा कि सामाजिक अनुशासन के लिए ऐसे अभियानों को समय समय पर जारी रखना आवश्यक है।
