दिसंबर 2025 में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ आया, जब पतंजलि आयुर्वेद और रूस सरकार ने औपचारिक रूप से व्यापार और वेलनेस के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता किया। यह समझौता केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक संबंधों को भी नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है। इस सहयोग का उद्देश्य रूसी बाजार में आयुर्वेद, योग और हर्बल उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना है, साथ ही स्वास्थ्य, लंबी उम्र और वेलनेस को बढ़ावा देना भी है।

पतंजलि के संस्थापक योग गुरु बाबा रामदेव और रूस के मंत्री सर्गेई चेरेमिन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। बाबा रामदेव ने कहा कि रूस में लोग योग और आयुर्वेद को बहुत महत्व देते हैं और इस समझौते के जरिए पतंजलि रूसी जनता तक अपनी विशेषज्ञता और स्वास्थ्य उत्पादों की गुणवत्ता पहुँचाएगी। उनका यह भी मानना है कि यह समझौता भारत और रूस के बीच मित्रता और विश्वास को और मजबूत करेगा।
इस समझौते के अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण पहलु आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से उम्र को नियंत्रित करने और लंबी उम्र पर शोध करना है। इस शोध का उद्देश्य गंभीर बीमारियों को उनके प्रारंभिक चरण में ही पहचानना और रोकना है। पतंजलि की टीम रूसी विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऐसे उपाय और तकनीक विकसित करेगी, जो जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने और स्वास्थ्य समस्याओं को पहले ही दूर करने में सहायक होंगे।
इसके अलावा, समझौते के तहत भारत की सांस्कृतिक धरोहर, योग और आयुर्वेद से संबंधित ज्ञान को रूस में प्रस्तुत किया जाएगा। पतंजलि यह सुनिश्चित करेगी कि रूसी लोग भारतीय ऋषियों और योग गुरुओं की शिक्षाओं और आयुर्वेदिक परंपराओं से लाभ उठा सकें। यह पहल न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और दोस्ती को भी बढ़ावा देगी।
इस समझौते का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू कुशल मानव संसाधन का आदान-प्रदान है। पतंजलि ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 2 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया है, और अब इस अनुभव का उपयोग रूस में कुशल योगियों और प्रशिक्षित कर्मियों को उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा। यह पहल रूसी समाज में योग, वेलनेस और आयुर्वेद के प्रभाव को बढ़ाने में मदद करेगी।
पतंजलि की योजना रूस में अपने विश्वस्तरीय उत्पादों की पहुंच को भी बढ़ाने की है। इसके तहत रूसी नागरिकों को आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता का लाभ मिलेगा। यह समझौता भारतीय ब्रांडों और रूसी ब्रांडों के बीच व्यापारिक संबंधों को भी मजबूत करेगा और नए व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलेगा।
स्वामी रामदेव ने इस अवसर पर कहा कि भारत और रूस के बीच मित्रता केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावी पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक होगी। उन्होंने कहा कि रूस भारत का सच्चा मित्र देश है और पतंजलि इस समझौते के माध्यम से इस मित्रता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।
रूस के मंत्री सर्गेई चेरेमिन ने भी इस समझौते की सराहना की और कहा कि पतंजलि के योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा से रूस में स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार आएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साझेदारी से दोनों देशों के नागरिकों को लंबे समय तक लाभ मिलेगा।
इस समझौते से भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग के नए मार्ग भी खुलेंगे। आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में संयुक्त रिसर्च और विकास से दोनों देशों को नवाचार और रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, स्वास्थ्य पर्यटन और वेलनेस कार्यक्रमों के माध्यम से रूसी नागरिक भारत की यात्रा करके स्वास्थ्य लाभ भी उठा सकते हैं।
पतंजलि का यह कदम न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय वेलनेस और आयुर्वेद के प्रति विश्वास और सम्मान को भी बढ़ाएगा। इस समझौते से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय योग, आयुर्वेद और हर्बल उत्पाद अब वैश्विक मंच पर मजबूती से अपनी पहचान बनाने को तैयार हैं।
इस तरह, पतंजलि और रूस का यह ऐतिहासिक समझौता केवल व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत है जो स्वास्थ्य, वेलनेस, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव डालेगा। यह समझौता भविष्य में भारत और रूस के लिए स्वास्थ्य और आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा।
