मध्य पूर्व में वर्षों से चली आ रही राजनयिक और सैन्य तनाव की एक नई दिशा सामने आई है। सऊदी अरब के पूर्व राजनयिक और प्रिंस तुर्की अल फैसल ने हाल ही में आयोजित मिडिल ईस्ट और अफ्रीका समिट में कहा कि इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा अब इजरायल बन चुका है। उनका यह बयान न केवल क्षेत्रीय राजनीति में बदलाव का संकेत देता है बल्कि परमाणु हथियारों और सैन्य रणनीति के संदर्भ में भी नए सवाल खड़े करता है।

तुर्की अल फैसल ने अपने भाषण में बताया कि लंबे समय से शिया देश ईरान और सुन्नी देश सऊदी अरब के बीच विरोध और तनाव का इतिहास रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं है कि ईरान ही क्षेत्रीय खतरा है। उनके अनुसार, लेबनान में हिजबुल्लाह के प्रभाव में कमी और सीरिया में असद सरकार की स्थिति कमजोर होने के बाद ईरान का क्षेत्रीय प्रभुत्व कम हो गया है। इसके विपरीत, इजरायल की लगातार सैन्य गतिविधियां और हमले क्षेत्र की स्थिरता को सबसे अधिक प्रभावित कर रहे हैं।
तुर्की अल फैसल ने इजरायल द्वारा लेबनान, गाजा और सीरिया में किए गए बमबारी के उदाहरण देते हुए कहा कि यह दिखाता है कि इजरायल शांति का प्रतीक नहीं है। उनके अनुसार, अमेरिका को इजरायल की गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन और इजरायल के बीच चल रहे विवादों पर अंतरराष्ट्रीय चुप्पी चरमपंथी समूहों के उदय का कारण बन सकती है।
सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख ने यह भी खुलासा किया कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों ने एक संयुक्त हवाई रक्षा प्रणाली बनाने की योजना बनाई है। उनका कहना था कि कतर और इजरायल पर हालिया हमलों ने यह जरूरत और स्पष्ट कर दी है कि हवाई सुरक्षा को लेकर सभी सदस्य देशों को तैयार रहना चाहिए।
परमाणु हथियार पर सऊदी अरब का गंभीर दृष्टिकोण
तुर्की अल फैसल ने परमाणु हथियार के संदर्भ में भी सऊदी अरब की गंभीरता का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में इजरायल जैसे परमाणु संपन्न देश की उपस्थिति और अस्थिरता के कारण सऊदी अरब को भी इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने यह याद दिलाया कि पहले सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने स्पष्ट किया था कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है तो सऊदी अरब भी इसी दिशा में कदम बढ़ाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि गाजा जैसे मुद्दों का स्थायी हल निकालना अत्यंत आवश्यक है, नहीं तो अनसुलझे विवाद और अधिक अशांति और हिंसा को जन्म दे सकते हैं। उनका मानना है कि वैश्विक समुदाय को इस बात पर गंभीर ध्यान देना चाहिए।
सऊदी और ईरान के रिश्तों में नरमी का संकेत
प्रिंस तुर्की अल फैसल के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि सऊदी और ईरान के रिश्तों में अब नरमी और संवाद की संभावना बन रही है। दशकों से चले आ रहे विरोध और संघर्ष के बाद क्षेत्रीय तनावों में कमी और सहयोग की संभावनाएं अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।
सऊदी अरब के इस दृष्टिकोण से न केवल क्षेत्रीय राजनीति पर असर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और परमाणु हथियारों के संतुलन पर भी प्रश्न खड़े होंगे। यह क्षेत्रीय और वैश्विक नीति निर्माताओं के लिए चुनौतीपूर्ण समय की शुरुआत हो सकती है।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व की राजनीति में यह बयान एक नया मोड़ है। इजरायल को सबसे बड़ा खतरा मानने और परमाणु हथियार के लिए गंभीर विचार करने की सिफारिश से स्पष्ट होता है कि सऊदी अरब अब सुरक्षा और सैन्य नीति को नए दृष्टिकोण से देख रहा है। यह बयान क्षेत्रीय स्थिरता, सैन्य रणनीति और वैश्विक कूटनीति पर लंबे समय तक प्रभाव डाल सकता है।
