पाकिस्तान की राजनीति लगातार एक उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी मुख्य केंद्र में हैं। हालिया घटनाओं में, असीम मुनीर के चीफ ऑफ़ डिफ़ेंस फोर्सेज (CDF) बनने के बाद पाकिस्तान सेना और PTI के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है। सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने इमरान खान को देश के लिए खतरा बताते हुए गंभीर आरोप लगाए, जिससे राजनीतिक माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया है।

PTI ने इस पर कड़ा जवाब देते हुए कहा कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। पार्टी ने जोर देकर कहा कि इमरान खान न केवल देशभक्त हैं, बल्कि उन्होंने पाकिस्तान के नागरिकों को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। PTI के सेक्रेटरी जनरल सलमान अकरम राजा ने स्पष्ट किया कि देश में बंटवारे और जातीय-सांप्रदायिक तनावों को इमरान खान ने खारिज किया और ऐसे नैरेटिव के खिलाफ खड़े रहे, जो पाकिस्तान के लोगों के हित में नहीं थे।
PTI के चेयरमैन गौहर अली खान ने भी सेना के बयान पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सेना प्रवक्ता के शब्द सही नहीं थे और इमरान खान के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्द गलत थे। यह बयान पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और सेना-राजनीति के बीच बढ़ते टकराव का संकेत देता है।
सेना की ओर से लगाए गए आरोपों में इमरान खान और उनके समर्थकों के खिलाफ गंभीर चेतावनी भी शामिल है। जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि इमरान खान और उनकी पार्टी ने सेना विरोध की हदें पार कर दी हैं और यह देश की सुरक्षा के लिए सीधे खतरे का रूप ले चुका है। उन्होंने इमरान को मानसिक रूप से अस्थिर बताते हुए कहा कि सेना विरोध ही उनकी राजनीति का मूल आधार है।
इमरान खान अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से प्रधानमंत्री पद से हटाए गए थे। इसके बाद उन पर कई मुकदमे दर्ज किए गए। अगस्त 2023 से वे अडियाला जेल में बंद हैं और लगातार असीम मुनीर और पाक सेना को निशाने पर रखे हुए हैं। इमरान खान का आरोप है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिशें की जा रही हैं, जिससे पाकिस्तान में लोकतांत्रिक और राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असीम मुनीर का CDF बनना पाकिस्तान के भीतर सत्ता संघर्ष को और तीव्र करेगा। सेना के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर इसके प्रभाव दिखाई देने लगे हैं। असीम मुनीर की नियुक्ति ने शहबाज शरीफ सहित अन्य राजनीतिक नेताओं के लिए सत्ता संतुलन बदल दिया है। उनकी ताकत और प्रभाव पाकिस्तान की राजनीति के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
PTI की प्रतिक्रिया में स्पष्टता है कि वे अपने नेता इमरान खान का समर्थन जारी रखेंगे और किसी भी तरह के दबाव या धमकी के सामने नहीं झुकेंगे। पार्टी का कहना है कि इमरान खान ने पाकिस्तान को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं और उन्होंने समाज में एकजुटता और समानता को बढ़ावा दिया है।
सैनिक और राजनीतिक सत्ता के बीच यह टकराव पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता और सेना के बढ़ते हस्तक्षेप ने देश की आर्थिक और सामरिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। हाल ही में असीम मुनीर द्वारा पहलगाम हमले की योजना और उसके राजनीतिक असर ने इस टकराव को और बढ़ा दिया है।
इमरान खान की जेल में स्थति और उनकी राजनीतिक सक्रियता पाकिस्तान के भीतर सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाती है। उनकी पार्टी PTI लगातार अपने नेता के समर्थन में खड़ी है और सेना के दावों के खिलाफ स्पष्ट रुख अपना रही है। इससे पाकिस्तान में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिकों के अधिकारों के सवाल भी उठ रहे हैं।
इमरान खान और PTI की यह लड़ाई केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा और भविष्य को तय करने वाली लड़ाई के रूप में देखी जा रही है। सेना और राजनीतिक दलों के बीच यह संघर्ष आने वाले समय में पाकिस्तान की स्थिरता, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेगा।
