भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की तेजी से बढ़ती मांग ने ऑटोमोबाइल बाजार का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। इस बीच एक ऐसा बड़ा विकास सामने आया है जिसने ईवी उद्योग की दिशा का संकेत दे दिया है। ओला इलेक्ट्रिक ने आधिकारिक रूप से 4680 भारत सेल तकनीक आधारित स्कूटर की डिलीवरी प्रारंभ कर दी है। यह कोई साधारण घोषणा नहीं है, बल्कि भारत में सेल निर्माण से लेकर व्हीकल उत्पादन तक आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण संकेत है।

ओला ने दावा किया है कि यह तकनीक भविष्य के वाहनों के लिए रीढ़ साबित हो सकती है। इस सेल तकनीक से ऊर्जा क्षमता अधिक मिलती है, तापमान नियंत्रण बेहतर होता है और बैटरी की विश्वसनीयता में सुधार होता है। भारतीय बाजार लंबे समय से ऐसी तकनीक का इंतजार कर रहा था जिसमें ऊर्जा दक्षता के साथ सुरक्षा भी प्राथमिकता पर हो।
ओला इलेक्ट्रिक की तकनीकी क्रांति की शुरुआत
भारत में अभी तक सेल तकनीक बड़े पैमाने पर बाहर से आयात होती रही। अधिक लागत और सीमित उपलब्धता के चलते ईवी कीमतों में इज़ाफ़ा देखा जाता रहा, लेकिन ओला इलेक्ट्रिक ने एक नया रास्ता खोला। कंपनी ने 4680 भारत सेल का पहला सीधा प्रयोग अपने प्रमुख मॉडल S1 Pro Plus में किया।
कंपनी के अनुसार इस तकनीक ने बैटरी संरचना को अधिक टिकाऊ बनाया है। 4680 बैटरी सेल पारंपरिक सेल की तुलना में अधिक ऊर्जा समाहित करती है, जिससे एक चार्ज में दूरी बढ़ती है। भारत के भौगोलिक क्षेत्र, मौसम, सड़क स्थितियों और लंबी यात्राओं को ध्यान में रखते हुए यह तकनीक अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है।
S1 Pro Plus: रेंज, परफॉर्मेंस और सुरक्षा में बड़ा उछाल
4680 भारत सेल तकनीक का पहला प्रत्यक्ष प्रदर्शन S1 Pro Plus (5.2 kWh) मॉडल में देखने को मिला। इस स्कूटर में स्थापित 13 kW मोटर केवल 2.1 सेकंड में 0 से 40 किमी की गति पकड़ लेती है। यह आंकड़ा इसे सेगमेंट का बेहद तेज स्कूटर बनाता है।
रेंज अब 300 किलोमीटर से भी आगे बढ़कर लगभग 320 किलोमीटर (विशिष्ट IDC मोड) तक पहुंच गई है। इससे यात्रा चिंता मुक्त हो जाती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां चार्जिंग सुविधाएं सीमित हैं।
कंपनी ने सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल की है। पहली बार इस श्रेणी में फ्रंट और रियर दोनों में डुअल ABS उपलब्ध है। नए एल्यूमीनियम ग्रैब हैंडल, डुअल-टोन सीट, मजबूत डिज़ाइन और अधिक स्थिर ब्रेकिंग वाहन को अधिक सुरक्षित बनाते हैं।
चार मोड का संतुलन
S1 Pro Plus चार राइडिंग मोड प्रदान करता है।
हर मोड अलग अनुभव देता है। इन मोडों में बदलाव का उद्देश्य सिर्फ गति बदलना नहीं बल्कि ऊर्जा उपयोग को नियंत्रित करना भी है।
ओला की वैल्यू चेन स्वदेशीकरण की ओर
कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह बैटरी सेल निर्माण, बैटरी पैक उत्पादन, सॉफ़्टवेयर निर्माण और व्हीकल असेंबली, सभी प्रक्रियाओं को देश में ही विकसित कर रही है। इस पूर्ण वैल्यू चेन स्वदेशीकरण का सीधा मतलब है कि आने वाले वर्षों में ईवी की लागत कम होगी, देश में ईवी इंडस्ट्री के लिए रोजगार बढ़ेंगे और भारत को ईवी निर्यात में अग्रणी भूमिका मिल सकती है।
शेयरों में गिरावट क्यों और आगे क्या विकल्प?
ईवी सेक्टरों में शुरुआत में निवेशकों की उम्मीदें बढ़ी थीं, लेकिन हाल के महीनों में ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। बाजार में गिरावट के कई कारण सामने आए।
निवेशक इस पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं क्योंकि नई तकनीक की डिलीवरी बाजार की धारणा बदल सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कंपनी की डिलीवरी तेजी से बढ़ती है तो शेयर में सुधार संभव है।
आने वाले महीनों में संभावनाएं
ओला इलेक्ट्रिक की नई पहल से उद्योग में कई प्रभाव देखने मिलेंगे।
- स्वदेशी उपकरण
- कम आयात
- कम लागत
- नई फैक्ट्रियां
- नौकरी निर्माण
- देश में इनोवेशन केंद्र
यदि यह मॉडल स्थिर और टिकाऊ साबित होता है तो भारत ईवी विनिर्माण में अग्रणी बन सकता है।
