जुलाई 2025 में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पांच दिन तक चले युद्ध के बाद पूरा एशियाई क्षेत्र एक बार फिर से तनावपूर्ण माहौल में आ गया है। इस संघर्ष में दर्जनों सैनिकों और नागरिकों की जान गई थी, जबकि लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए थे। उस संघर्ष के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता में एक युद्धविराम समझौता हुआ था।

लेकिन दिसंबर के पहले सप्ताह में ही थाईलैंड ने कंबोडिया पर जोरदार एयरस्ट्राइक कर इस समझौते को चुनौती दे दी। बैंकॉक से मिली जानकारी के अनुसार, थाईलैंड की वायुसेना ने कंबोडिया की सीमा पर स्थित कई मिलिट्री बेसों को निशाना बनाया। इस हमले का उद्देश्य कंबोडियाई सेना द्वारा थाईलैंड पर की गई गोलाबारी और मोर्टार हमलों का जवाब देना बताया गया।
हमले की तफ्तीश और दोनों पक्षों के आरोप
थाईलैंड के मेजर जनरल विन्थाई सुवारी ने बताया कि ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य हथियारों को सपोर्ट करने वाले केंद्र और सीमा के पास कंबोडियाई यूनिट्स को निशाना बनाना था। उनके अनुसार, इससे पहले कंबोडियाई सेना ने बार-बार थाई सीमा में गोलाबारी की थी, जिसमें एक थाई सैनिक की मौत और दो अन्य घायल हो गए थे।
दूसरी ओर, कंबोडिया ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया और कहा कि पहला हमला सुबह 5 बजे थाईलैंड की सेना ने किया। उनका कहना था कि थाईलैंड ने कई दिनों तक सीमा पर उकसावे वाली गतिविधियाँ की थीं, जिससे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी। दोनों देशों ने सीमा पर नागरिक क्षेत्रों में भारी गोलीबारी की सूचना दी, जिससे सामान्य जीवन प्रभावित हो गया।
युद्धविराम समझौते का उल्लंघन
कंबोडिया पर किए गए एयरस्ट्राइक को, जुलाई में हुए पांच दिन तक चले संघर्ष के बाद साइन किए गए शांति समझौते का सबसे गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है। उस समझौते में दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्र में किसी भी प्रकार के हमले से परहेज़ करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
हालांकि, थाईलैंड का तर्क है कि समझौते के बावजूद कंबोडिया ने विवादित क्षेत्रों में नई लैंडमाइंस बिछाईं, जिससे उनके कई सैनिक घायल हुए। थाईलैंड ने कंबोडिया पर यह भी आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर सीमा पर तनाव बढ़ाया और समझौते का उल्लंघन किया।
सीमा पर नागरिक और मानवता संकट
इन सैन्य घटनाओं के बीच सीमा के आसपास लगभग 70% नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर निकाल लिया गया है। प्रेय चान गांव में गोलीबारी के दौरान एक नागरिक की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाइयाँ आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा हैं।
इतिहास और पिछली घटनाएँ
जुलाई 2025 में हुए संघर्ष में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कब्जे और सीमा विवाद का आरोप लगाया था। उस समय पांच दिन तक चलने वाली लड़ाई में दर्जनों सैनिकों और आम लोगों की मौत हुई थी, जबकि लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए। युद्धविराम समझौता उसी समय हुआ था।
लेकिन हाल ही में हुए एयरस्ट्राइक और गोलीबारी ने यह दिखा दिया कि समझौते की वास्तविकता और लागू होने की संभावना सीमित रही। थाईलैंड का यह ऑपरेशन दर्शाता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति दोनों देशों के लिए संवेदनशील मुद्दा हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
डोनाल्ड ट्रंप और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के माध्यम से जो शांति समझौता हुआ था, उसे अब पूरी तरह चुनौती मिल गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और वार्ता के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो एशिया में सैन्य तनाव और आम नागरिकों के लिए खतरा दोनों बढ़ सकते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में हर तरफ सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और संयुक्त राष्ट्र को भी स्थिति पर नजर रखने के लिए कहा गया है।
निष्कर्ष
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमावर्ती संघर्ष और क्षेत्रीय विवादों को हल करने में कूटनीति और सैन्य संतुलन दोनों आवश्यक हैं। एयरस्ट्राइक और गोलाबारी ने न केवल युद्धविराम समझौते को चुनौती दी बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर भी गंभीर प्रभाव डाला है।
भविष्य में यह देखना होगा कि दोनों देश वार्ता के जरिए समाधान निकालते हैं या फिर स्थिति और बिगड़ती है। अंतरराष्ट्रीय निगरानी और संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।
