इंदौर शहर का यातायात लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। बढ़ती आबादी, सड़कों पर रोजाना उतरने वाले लाखों वाहन, नियमों की अनदेखी और तीव्र विकास ने ट्रैफिक प्रबंधन को एक गंभीर विषय बना दिया है। इसी पृष्ठभूमि में पिछले 24 घंटों के दौरान स्थानीय पुलिस और परिवहन विभाग ने विशेष निगरानी अभियान चलाया। इस अभियान का मकसद केवल जुर्माना वसूलना नहीं था, बल्कि उन वाहन चालकों को अनुशासित करना था जो अब भी सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हुए शहर में संभावित दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर रहे हैं।

पिछले एक दिन में जारी आंकड़ों से स्थिति काफी स्पष्ट होती है। कुल 918 चालान बनाए गए और 118 वाहनों पर सीधी कार्रवाई की गई। इनमें ऑटो, ई-रिक्शा, यात्री बसें और निजी उपयोग में आने वाले वाहन शामिल रहे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अचानक नहीं थी, बल्कि कई सप्ताह से चल रहे जागरूकता अभियानों का परिणाम थी। कई वाहन चालकों को समझाइश दी गई, हेलमेट बांटे गए, दस्तावेज की जांच की गई, और सुरक्षा नियमों की जानकारी साझा की गई। इसके बावजूद नियम उल्लंघन की घटनाएँ कम नहीं हुईं।
हेलमेट पहनने को लेकर लगातार चेतावनी
शहर में हेलमेट संबंधी जागरूकता कोई नई पहल नहीं है। कई बार बड़े आयोजन किए गए, जनसभाओं के माध्यम से संदेश दिए गए, और शहर की सड़कों पर पुलिस अधिकारियों ने खुद खड़े होकर यात्रियों को हेलमेट पहनने की महत्ता समझाई। थानों के स्तर पर विशेष ‘सुरक्षा सप्ताह’ के आयोजन हुए, जिनमें वाहन चालकों को मुफ्त हेलमेट वितरित किए गए।
हरिगीत प्रवाह द्वारा संकलित रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि सार्वजनिक अभियान की संरचना सही थी और लोगों ने उसमें भाग भी लिया, परन्तु वास्तविक समस्या तब सामने आई जब जागरूकता का असर व्यवहार में नहीं दिखा। बीते 24 घंटों में जिन लोगों पर कार्रवाई हुई, उनमें से अधिकांश वही थे जो सड़क सुरक्षा को हल्के में लेते हुए नियमित रूप से बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चला रहे थे।
बिना दस्तावेज वाहन चलाने वालों पर सख्ती
कार्रवाई केवल हेलमेट तक सीमित नहीं रही। प्रशासन की नजर गैरवाजिब तरीके से चल रहे वाहनों पर भी रही। कई वाहन चालकों के पास जरूरी दस्तावेज या तो उपलब्ध नहीं थे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। वाहन प्रदूषण प्रमाण पत्र, बीमा दस्तावेज, रजिस्ट्रेशन की मूल प्रति जैसे दस्तावेजों की कमी मिलने पर चालान दर्ज किए गए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर में जिन स्थानों पर कार्रवाई की गई, उनमें राजवाड़ा, पलासिया, विजय नगर, मल्हारगंज, चंद्रभागा रोड, भंवरकुआं क्षेत्र जैसे प्रमुख मार्ग शामिल रहे। इन क्षेत्रों में भारी यातायात के कारण नियमों की अनदेखी से दुर्घटनाओं की संभावना दोगुनी हो जाती है। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए मौके पर दस्तावेज जांच की।
भारी वाहनों पर विशेष निगरानी
इस अभियान में विशेष रूप से ई-रिक्शा और बड़े ऑटो वाहन शामिल किए गए। पिछले कुछ समय में शिकायतें मिली थीं कि कई ऑटो वाहन निर्धारित मार्ग से हटकर भीड़भाड़ वाले हिस्सों से गुजरते हैं, बिना सिग्नल पालन के यात्रियों को उतारते या चढ़ाते हैं। कई ई-रिक्शा बिना पंजीकरण चल रहे थे। कुछ बस चालकों ने निर्धारित स्टॉप बिंदुओं पर न रुककर अव्यवस्थित सड़क नीतियों को जन्म दिया। इन सभी तथ्यों ने निर्णय को कठोर बनाया।
पिछले 24 घंटों में जब्त किए गए 118 वाहनों में ऐसे वाहन भी थे जिन्हें चालक मौके पर छोड़कर भाग गए। पुलिस ने इन्हें क्रेन से उठवाकर सुरक्षित स्थल पर रखवाया। जांच पूरी होने पर ही इन वाहनों को वापस किया जाएगा।
5 चालकों पर 25 हजार तक का जुर्माना
यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि प्रशासन ने केवल छोटे जुर्माने ही नहीं लगाए। कुल पाँच चालकों पर 25 हजार रुपये तक की कार्रवाई की गई। ये चालान उस श्रेणी में आए जहां दोहराए गए उल्लंघन पाए गए, वाहन पर अनधिकृत संरचनाएं थीं, या यातायात संकेतों के जानबूझकर उल्लंघन की पुष्टि हुई।
यह कार्रवाई संदेश देने का साधन बनी कि सड़क सुरक्षा नियम हल्के में नहीं लिए जाएंगे।
अभियान का वास्तविक उद्देश्य
यह समझना आवश्यक है कि चालान काटना प्रशासन का लक्ष्य नहीं है। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा संस्कृति विकसित करना है। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हेलमेट न पहनने और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसे कारणों से दुर्घटना दर उच्च स्तर पर बनी रही। विशेष रूप से युवा वर्ग और कॉलेज विद्यार्थियों में यह आदतें अधिक पाई गईं।
शहर की क्रियाशीलता और तेज यातायात व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन चाह रहा है कि लोग जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाएं। वाहन खरीदने से अधिक जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन है। प्रशासन की यह बात बार–बार दोहराई गई।
नागरिक प्रतिक्रियाएं और जन धारणा
कई नागरिकों ने माना कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन कुछ लोग इसे आर्थिक बोझ की तरह देखते हैं। कुछ चालकों का यह तर्क भी सामने आया कि छोटे दूरी के लिए हेलमेट पहनने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि कानून किसी दूरी के आधार पर राहत नहीं देता।
कुछ वाहन मालिक यह भी कह रहे हैं कि पुलिसकर्मियों को कार्रवाई के साथ समाधान भी प्रदान करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर प्रदूषण प्रमाणपत्र वहीं पर बनवाने की सुविधा, या मोबाइल दस्तावेज सत्यापन काउंटर उपलब्ध हों।
भविष्य की रणनीति
स्थानीय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं निम्न प्रकार की हैं:
- मुख्य चौराहों पर स्थायी जांच पोस्ट
- हेलमेट सेंसर आधारित संकेतक
- यातायात नियम पढ़ने की कार्यशालाएं
- स्कूल, कॉलेज और आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा व्याख्यान
हरिगीत प्रवाह से प्राप्त सूत्रों का मानना है कि जागरूकता और दंडात्मक कार्रवाई का संतुलन रखना प्रशासन की दीर्घकालीन रणनीति है।
निष्कर्ष
इंदौर में 24 घंटों के भीतर 918 चालान और 118 वाहन जब्त होना एक सामान्य सूचना नहीं, बल्कि एक गंभीर संदेश है। यह साबित करता है कि नियमों के पालन में लापरवाही अब स्वीकार्य नहीं है। शहर की यातायात सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है।
अभियान से स्पष्ट हुआ कि प्रशासन भविष्य में भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
