भोपाल शहर की सर्द सुबह। अशोका गार्डन इलाके की घनी गलियों में रहने वाले एक छात्र ने रात के समय ऐसी चुप्पी ओढ़ ली, जो अब हमेशा के लिए स्थिर हो चुकी है। छात्र MBA की पढ़ाई कर रहा था और किराए का कमरा लेकर अकेले रहता था। पढ़ाई, सपने, संघर्ष, और उम्मीदों के बीच उसे क्या ऐसा क्षण मिला जिसने जीवन समाप्त करने जैसा कदम उठाने पर मजबूर किया, उसके पीछे की तस्वीर फिलहाल धुंधली ही है।

यह घटना रविवार देर रात सामने आई। पड़ोसियों को जब दरवाजा नहीं खुलने पर शक हुआ, तो मकान मालिक को सूचना दी गई। कमरे का दरवाजा जब खोला गया तो युवक रस्सी के सहारे लटका हुआ मिला। आसपास की चीजें सामान्य थीं। बिस्तर वैसे ही ठीक रखा था, मोबाइल एक किनारे रखा था, मेज पर किताबें थीं और बीच में एक असहज शांत कमरा।
आखिरी कॉल—मां से सामान्य बातचीत, कोई तनाव का संकेत नहीं
जब पुलिस ने मृतक का मोबाइल जब्त किया और कॉल डिटेल चेक की, तो सबसे अंतिम कॉल मां को किया गया था। समय लगभग रात 10:15 बजे के आसपास बताया जा रहा है। बातचीत की अवधि सामान्य थी।
परिवार के अनुसार उसने कभी किसी परेशानी का जिक्र नहीं किया।
मां ने बताया,
“उसने बस पूछा कि अगले सप्ताह घर आऊं तो क्या खाना बनाओगी… उसके बाद कोई असामान्य बात नहीं हुई।”
घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, जिससे उसकी मानसिक स्थिति के अंदर छिपे कारणों की पुष्टि अभी संभव नहीं।
कमरे की स्थिति बिल्कुल सामान्य: भीतर संघर्ष, बाहर सब ठीक?
कमरे में पुलिस को मिला—
- बिस्तर सजा हुआ
- अध्ययन संबंधी नोट्स और प्रोजेक्ट फाइल
- एक बैग जिसमें कॉलेज से संबंधित दस्तावेज
- मोबाइल जिसमें उसके क्लास ग्रुप के संदेश
यह कमरा किसी ऐसे छात्र का प्रतीत हुआ, जो परीक्षा की तैयारी में व्यस्त रहता हो। किसी भी प्रकार के अव्यवस्था के संकेत नहीं मिले।
यह स्थिति अक्सर ऐसे मामलों में सामने आती है जहां व्यक्ति भीतर से टूट चुका होता है, लेकिन बाहर साधारण दिनचर्या जारी रहती है।
अधिकारियों की जांच—मोबाइल डाटा, चैट रिकॉर्ड, कॉल हिस्ट्री पर फोकस
पुलिस ने मोबाइल सील कर लैब विश्लेषण के लिए भेज दिया है। जांच इन बिंदुओं पर केंद्रित है—
- क्या किसी मित्र से विवाद हुआ था?
- क्या ऑनलाइन चैट में तनाव, दबाव या अपमान का उल्लेख?
- क्या अकादमिक दबाव अधिक था?
- क्या किसी रिश्ते का तनाव इसकी वजह बना?
इसके अलावा पुलिस उस दिन की गतिविधियों का ट्रैक तैयार कर रही है।
हैरानी की बात यह है कि मृतक कॉलेज भी नियमित रूप से जा रहा था। कक्षाओं में शामिल हो रहा था और दोस्तों के साथ सामान्य बातचीत में सक्रिय था।
मित्रों ने कहा—“वह हमेशा शांत, लेकिन लक्ष्य को लेकर गंभीर”
जो छात्र उसके साथ पढ़ते थे, उन्होंने कहा—
“वह गंभीर रहता था, लेकिन कभी परेशान नहीं लगता था। असाइनमेंट समय पर जमा करता था, क्लास में सवाल भी पूछता था।”
कुछ छात्रों ने बताया कि पिछले 10 दिनों में वह थोड़ा शांत जरूर दिखाई दे रहा था, लेकिन उन्होंने इसे सामान्य थकान माना।
परिवार का दुख—“बच्चा कभी बोझ नहीं बना, फिर भी क्यों छोड़ गया?”
घरवालों का कहना है कि उन्होंने कभी पढ़ाई का दबाव नहीं डाला। उन्होंने कहा—
“हमने उससे कभी नौकरी और करियर को लेकर कुछ नहीं कहा। वह खुद ही अपने लक्ष्य को लेकर अनुशासित था।”
परिवार का दर्द यह भी है कि वह त्योहार पर घर आने की बात कह चुका था।
अशोका गार्डन क्षेत्र का पक्ष—एक व्यस्त इलाका, कई छात्र किराए पर
यह क्षेत्र उन छात्रों का केंद्र है जो MBA, इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी कोर्सों के लिए भोपाल आते हैं।
शहर का शैक्षणिक माहौल आकर्षित करता है, लेकिन कई छात्र अकेलेपन का सामना करते हैं।
पड़ोसियों ने बताया—
“वह ज्यादा मेल-जोल नहीं रखता था। बस कमरे से क्लास और क्लास से वापस।”
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टिप्पणी—“एक अदृश्य दबाव तेजी से बढ़ रहा है”
विशेषज्ञों के अनुसार आज बड़ी संख्या में छात्र—
- स्वयं से ही ऊंची अपेक्षाएं
- करियर चिंता
- अकेलापन
- सोशल मीडिया तुलना
- रिश्तों में टूटन
का सामना करते हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे बाहरी स्तर पर इसे व्यक्त नहीं करते।
अंदर से दबाव गहराता है और बाहर की दुनिया से पूरी तरह अलग नहीं दिखता।
जांच की वर्तमान स्थिति
- पोस्टमॉर्टम पूरा
- शव परिजनों को सौंपा गया
- छानबीन जारी
- मोबाइल डाटा प्रमुख सुबूत माना जा रहा
- दोस्तों से बयान दर्ज
परिजनों ने किसी पर संदेह नहीं जताया।
सामाजिक संदर्भ—यहीं समाज की हकीकत छिपी हुई है
भारत में हर वर्ष हजारों छात्र जीवन, उपल्बधियों और प्रदर्शनों के दबाव के बीच तनाव की स्थिति में पहुंच जाते हैं। समस्या यह है कि यह अव्यक्त तनाव कभी घर में चर्चा का विषय नहीं बनता।
कई बार माता-पिता की यह सोच होती है कि बच्चा मजबूत है, वह संभाल लेगा। कॉलेज सोचता है कि छात्र परिपक्व है। सहपाठी सोचते हैं कि हर कोई संघर्ष कर रहा है।
लेकिन मानसिक टूटन अचानक नहीं आती, और जो व्यक्ति भीतर से टूटता है वह टूटने के बाद अक्सर अन्य लोगों के बीच अपनी सामान्य छवि बनाए रखता है।
इसी घटना में यही हुआ—
बातचीत सामान्य
दिनचर्या सामान्य
दिखावट सामान्य
लेकिन मन में कुछ था, जो अंधेरे कमरे में केवल उसी के साथ था।
