मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ग्राम सिहाड़ा में पिछले कुछ समय से एक संवेदनशील और जटिल विवाद चला आ रहा था। यह विवाद उस समय सार्वजनिक ध्यान में आया जब ग्राम पंचायत द्वारा शासकीय जमीन पर दुकान निर्माण के लिए दरगाह समिति को नोटिस दिया गया और दरगाह समिति ने इस नोटिस का विरोध करते हुए पूरे सिहाड़ा गांव को वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताना शुरू कर दिया। इस मामले में ग्राम पंचायत ने न्यायिक मार्ग अपनाते हुए मप्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल, भोपाल का रुख किया।

ग्राम पंचायत का कहना था कि दरगाह समिति द्वारा प्रस्तुत दावे में पूरी तरह से विसंगतियाँ हैं और वास्तविकता यह है कि अधिकतर भूमि सरकारी और ग्रामवासियों की निजी संपत्ति है। ट्रिब्यूनल में दाखिल अपील के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि वक्फ बोर्ड द्वारा निर्धारित समय अवधि में अपने दावे के पक्ष में आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके परिणामस्वरूप ट्रिब्यूनल ने दरगाह समिति और वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया।
इस निर्णय के बाद ग्राम पंचायत ने तुरंत शासकीय भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा के साथ की गई। राजस्व विभाग और पुलिस के उच्च अधिकारियों की निगरानी में दरगाह क्षेत्र की तार फेंसिंग और अन्य अतिक्रमण हटाए गए। इस कार्रवाई के दौरान गांव का वातावरण पूरी तरह नियंत्रण में रखा गया और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव किया गया।
ग्रामवासियों ने इस न्यायिक निर्णय को लेकर राहत की सांस ली। इस मामले की प्रमुखता से प्रकाशन होने पर गांव के ग्रामीणों और सरपंच प्रतिनिधि ने ग्राम पंचायत की कार्रवाई के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। बता दें कि करीब एक माह पूर्व ट्रिब्यूनल ने वक्फ बोर्ड की ओर से खसरा क्रमांक 781, रकबा 14.500 हेक्टयर को अपनी संपत्ति बताने का नोटिस जारी किया था। इस रकबे पर पूरा गांव बसा होने के कारण ग्रामीणों में हड़कंप मच गया था।
सिहाड़ा गांव में करीब दस हजार हिन्दू-मुस्लिम परिवार निवासरत हैं। सरपंच प्रतिनिधि हेमंत चौहान ने वक्फ बोर्ड के नोटिस को अपने अधिवक्ता के माध्यम से चुनौती दी और ट्रिब्यूनल में इस भूमि को सरकारी व आबादी की संपत्ति बताया। इस निर्णय से न केवल ग्रामवासियों का विश्वास न्याय व्यवस्था पर बढ़ा बल्कि उनके जीवन में शांति और सुरक्षा की भावना भी वापस आई।
ग्राम पंचायत की यह कार्रवाई समाज में कानून के प्रति जागरूकता और जमीन के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने का एक उदाहरण है। यह मामला यह स्पष्ट करता है कि न्यायिक संस्थाओं के माध्यम से किसी भी विवाद को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से हल किया जा सकता है।
