टोरंटो से मुंबई की ओर रवाना हुई एक लंबी उड़ान, कई घंटे की देरी, थकान, चिंता, और फिर एक ऐसी घटना जिसके बारे में शायद कोई भी यात्री सोचकर भी असहज हो जाए। 1980 और 90 के दशक में अपनी खूबसूरती और अभिनय से दर्शकों का दिल जीत चुकीं नीलम कोठारी ने हाल ही में एक ऐसा अनुभव साझा किया जिसने विमान सेवाओं की जिम्मेदारी, मानवीय संवेदनाओं की परवाह और आपात स्थिति में स्टाफ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा दिए।

नीलम कोठारी की यह यात्रा सिर्फ एक फ्लाइट जर्नी नहीं रही, बल्कि एक ऐसी घटना बन गई जिसमें उनका स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया और मदद की अपेक्षा रखने के बावजूद वह उपेक्षा का सामना करती रहीं। सोशल मीडिया के माध्यम से जब उन्होंने अपनी कहानी दुनिया के सामने रखी तो उनकी बातों ने हजारों यात्रियों के दिलों में बसे उन छिपे अनुभवों को भी उजागर कर दिया जिन्हें लोग अक्सर चुपचाप सहते हैं।
यह कहानी सिर्फ एक सेलिब्रिटी की परेशानी नहीं, बल्कि उन तमाम यात्रियों की आवाज भी है जिन्हें कभी न कभी विमान यात्रा के दौरान अनदेखा किया गया है।
फ्लाइट की 9 घंटे की देरी: यात्रा की शुरुआत ही बन गई एक परीक्षा
नीलम कोठारी ने अपनी पोस्ट में बताया कि टोरंटो से मुंबई की उड़ान समय पर रवाना नहीं हो पाई। फ्लाइट लगभग 9 घंटे लेट थी। हवा में उड़ान भरने से पहले ही यात्रियों को लंबे इंतजार का बोझ झेलना पड़ा।
जो यात्री लंबे सफर और जेटलैग से जूझते हैं, उनके लिए इतनी बड़ी देरी शारीरिक और मानसिक रूप से थकाने वाली हो सकती है। कई यात्रियों के प्लान बिगड़ जाते हैं, कुछ की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट जाती है, और कई ऐसे होते हैं जिन्हें लंबी देरी मेडिकल कंडीशन्स की वजह से भारी पड़ती है।
नीलम ने लिखा कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से पहले ही बेहद थक चुकी थीं। 9 घंटे की देरी एक ऐसे सफर की शुरुआत थी जिसका असर आगे चलकर और भयावह रूप लेने वाला था।
उड़ान भरने के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
फ्लाइट के उड़ान भरने के कुछ समय बाद यात्रियों को भोजन परोसा गया। नीलम ने भी सामान्य तरह से खाना खाया। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद उन्हें चक्कर आने लगे और शरीर ढीला पड़ने लगा।
उन्होंने बताया कि उन्हें अचानक तेज कमजोरी महसूस हुई और वह अपनी सीट पर ही बेहोश हो गईं।
फ्लाइट में किसी भी यात्री का अचानक बेहोश हो जाना एक गंभीर मेडिकल स्थिति माना जाता है। एयरलाइंस के स्टाफ को ऐसी परिस्थितियों में तुरंत कार्रवाई करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
लेकिन नीलम के अनुसार, जो होना चाहिए था, वह बिल्कुल नहीं हुआ।
सबसे बड़ी चिंता: स्टाफ ने नहीं दी कोई मदद
जब नीलम बेहोशी की हालत में थीं, तब एक सहयात्री ने उन्हें संभाला और उनकी सीट तक वापस ले गया। यह बात बेहद दर्दनाक है कि एक अनजान यात्री तो सहायता के लिए आगे आया, लेकिन फ्लाइट का स्टाफ — जो ज़िम्मेदार होता है — उसने नीलम की ओर ध्यान तक नहीं दिया।
नीलम के अनुसार:
- स्टाफ ने न तो उनकी हालत पूछी
- न किसी मेडिकल सहायता की कोशिश की
- न पानी तक दिया
- न ब्लड प्रेशर चेक किया
किसी विमान में बेहोश हो जाना कोई छोटी बात नहीं है। यह डिहाइड्रेशन, फूड रिएक्शन, अचानक लो बीपी, ऑक्सीजन की कमी, या कई अन्य गंभीर कारणों से हो सकता है। ऐसे में केबिन क्रू का लापरवाही दिखाना बेहद चिंताजनक है।
नीलम ने कहा कि इतनी बड़ी घटना का सामना करने के बाद भी स्टाफ इस तरह अनजान बना रहा मानो कुछ हुआ ही नहीं।
कस्टमर केयर ने भी नहीं सुनी बात
फ्लाइट में मदद न मिलने के बाद जब नीलम ने कस्टमर केयर से संपर्क करने की कोशिश की तो वहां से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। स्टाफ और ग्राहक सेवा दोनों की यह चुप्पी नीलम के गुस्से का कारण बनी।
उन्होंने लिखा कि किसी एयरलाइन के लिए यह रवैया बिल्कुल अस्वीकार्य है।
सोशल मीडिया पर फूटा दर्द: एयरलाइन से की सार्वजनिक शिकायत
नीलम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी आपबीती विस्तार से बताई।
उन्होंने लिखा
Hello Etihad Airways
This is unacceptable. I fainted after the meal, yet your staff ignored me.
उनकी पोस्ट कुछ ही समय में वायरल हो गई। हजारों लोगों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
कई यात्रियों ने अपनी पुरानी समस्याएं भी साझा कीं, जिससे पता चला कि ऐसी उपेक्षा अक्सर होती रहती है।
एतिहाद एयरवेज का जवाब आया लेकिन…
एयरलाइन ने सार्वजनिक तौर पर नीलम को जवाब दिया।
उन्होंने सिर्फ इतना कहा
Sorry to hear this. Please DM us. We will look into the matter.
हालांकि एयरलाइन का यह जवाब औपचारिक लग रहा था, लेकिन नीलम की पोस्ट के बाद यह घटना चर्चा का विषय बन गई।
नीलम कोठारी: 80s और 90s की स्टार, आज भी प्रासंगिक
नीलम कोठारी 1980 और 1990 के दशक की लोकप्रिय अभिनेत्री रही हैं। उनकी शांत मुस्कान, सौम्य व्यक्तित्व और अभिनय ने उन्हें एक खास पहचान दी।
लंबे समय के ब्रेक के बाद उन्होंने ओटीटी के जरिए वापसी की और दोबारा लोगों के बीच चर्चा में आईं।
क्या कहता है यह पूरा मामला?
यह घटना सिर्फ एक अभिनेत्री की परेशानी का वर्णन नहीं, बल्कि बड़े सवाल उठाती है।
- क्या एयरलाइंस मेडिकल इमरजेंसी के लिए तैयार हैं
- क्या यात्रियों की परेशानी को गंभीरता से लिया जाता है
- क्या स्टाफ का जवाबदेह होना जरूरी नहीं
- क्या देरी और बदइंतजामी यात्रियों को भुगतनी चाहिए
हर साल ऐसे हजारों मामले सामने आते हैं जिनमें यात्रियों को उपेक्षित किया जाता है।
नीलम की घटना इसलिए वायरल हुई क्योंकि उन्होंने अपनी बात रखी, लेकिन हर वह यात्री जिसकी आवाज नहीं सुनी गई, यह लेख उनकी कहानी भी कहता है।
यात्री सुरक्षा सिर्फ नियमों में नहीं, व्यवहार में होनी चाहिए
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में मेडिकल इमरजेंसी आम बात है।
इन परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
नीलम की घटना बताती है कि कई बार नियम किताबों में रह जाते हैं और जमीन पर व्यवहार बिल्कुल अलग होता है।
