तुर्की ने एक समय ऐसा दौर देखा जब वह खुद अपने रक्षा उपकरणों के लिए अन्य देशों पर निर्भर था। पश्चिमी देशों की तकनीकी और हथियारों की आपूर्ति के बिना तुर्की का सैन्य उद्योग लगभग ठप पड़ गया था। लेकिन पिछले कुछ दशकों में तुर्की ने रक्षा क्षेत्र में एक साहसिक परिवर्तन किया है। अब यह देश न केवल अपने लिए हथियार बनाता है बल्कि दुनिया के हथियार बाजार में एक बड़ा खिलाड़ी भी बन चुका है। इस परिवर्तन की कहानी केवल उद्योग और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की राजनैतिक और सामरिक रणनीति का भी हिस्सा बन चुकी है।

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नीति को अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया। उनका मानना है कि जब देश अपनी रक्षा जरूरतों को खुद पूरा कर सकता है, तब ही उसकी सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। अर्दोआन का दृष्टिकोण यह भी रहा कि तुर्की को हथियारों के लिए बाहरी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और साथ ही दुनिया में हथियार निर्यात से आर्थिक लाभ भी उठाना चाहिए।
स्टॉकहोम पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिप्री) की 2024 की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि तुर्की की पांच कंपनियां अब वैश्विक हथियार उद्योग की शीर्ष 100 कंपनियों में शामिल हैं। इसमें एसल्सन, बायकर, एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़, द मशीनरी एंड केमिकल इंडस्ट्री कॉरपोरेशन और एमकेई जैसी कंपनियां शामिल हैं।
तुर्की की प्रमुख रक्षा कंपनियां और उनकी विशेषताएँ
एसल्सन (Aselsan):
एसल्सन कंपनी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में माहिर है। यह कम्यूनिकेशन रडार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम बनाती है। 1975 में शुरू हुई यह कंपनी तब अस्तित्व में आई जब तुर्की पर हथियार खरीदने पर प्रतिबंध लगा हुआ था। 2024 में एसल्सन की आय 3.4 अरब डॉलर तक पहुंची, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 25% वृद्धि हुई। एसल्सन ने दुनिया के 92 देशों के साथ रक्षा समझौते किए हैं।
बायकर (Baykar):
बायकर कंपनी के बायरकतार टीबी ड्रोन पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इन ड्रोन का इस्तेमाल लीबिया, सीरिया और यूक्रेन में हुआ। बायकर कंपनी तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन के दामाद के नेतृत्व में काम करती है। 2024 में बायकर की आय 1.9 अरब डॉलर रही। हाल ही में इस कंपनी ने तुर्की का पहला मानवरहित लड़ाकू विमान ‘बायरकतार किज़िलेल्मा’ विकसित किया।
एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ (TAI):
TAI एयरोस्पेस और एविएशन क्षेत्र में हेलीकॉप्टर, एयरक्राफ्ट और ऑटोमैटिक लड़ाकू गाड़ियां बनाती है। 2024 में इसकी आय 2.1 अरब डॉलर रही। TAI के उत्पादों में डिफेंस टूल्स, लड़ाकू ड्रोन, हेलीकॉप्टर और विभिन्न सैन्य वाहन शामिल हैं। फ़िलीपींस, ट्यूनीशिया, किर्गिस्तान, नाइजीरिया और अज़रबैजान इस कंपनी से रक्षा उपकरण खरीदते हैं।
रोकेत्सान (Roketsan):
रोकेत्सान कंपनी रॉकेट, बैलिस्टिक मिसाइल, हथियार और गोला-बारूद बनाती है। 2024 में रोकेत्सान की आमदनी 1.39 अरब डॉलर रही।
एमकेई (MKE):
एमकेई छोटे हथियार, आर्टिलरी और गोला-बारूद का निर्माण करती है। 2024 में इसकी आय 1.2 अरब डॉलर थी।
आत्मनिर्भरता की यात्रा और वैश्विक प्रभाव
1974 में साइप्रस विवाद और 90 के दशक में कुर्द मिलिशिया के खिलाफ़ लड़ाई ने तुर्की को यह महसूस कराया कि हथियारों की आपूर्ति पर निर्भर रहना देश की सुरक्षा के लिए जोखिम है। इसके परिणामस्वरूप तुर्की ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए। साइप्रस विवाद, सीरिया की जंग और अन्य संघर्षों के दौरान तुर्की ने खुद के हल्के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन, मिसाइल और गोला-बारूद का निर्माण किया।
अब तुर्की की लगभग 80% रक्षा जरूरतें स्थानीय उत्पादन से पूरी होती हैं। वैश्विक हथियार बाजार में तुर्की का प्रभाव भी बढ़ा है। 2014 में इसका वैश्विक हथियार खरीद का हिस्सा 3% था, जो 2024 में घटकर 1.5% हो गया। यही संकेत है कि तुर्की अब मुख्यतः निर्यातक देश बन चुका है।
आर्थिक और तकनीकी सफलता
तुर्की का रक्षा उद्योग न केवल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी साबित हुआ है। 2014 में रक्षा उत्पादन क्षेत्र की आय 1.64 अरब डॉलर थी, जो 2024 में बढ़कर 7 अरब डॉलर से अधिक हो गई। सिप्री की भविष्यवाणी के अनुसार, 2028 तक यह आय 11 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
देश में 1,100 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं, जिनके लिए 100 अरब डॉलर से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। रक्षा उद्योग में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं और 2025 तक इस उद्योग में नौकरियों की संख्या 1.10 लाख तक पहुंच जाएगी।
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय पहल
तुर्की की सरकार और मीडिया ने आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय गर्व और राजनीतिक नैरेटिव का केंद्र बना दिया है। इसके अलावा, तुर्की टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को अपने परियोजनाओं में शामिल होने का निमंत्रण भी देती है। इस प्रकार तुर्की न केवल अपनी सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए वैश्विक प्रभाव भी बढ़ा रहा है।
तुर्की की यह यात्रा यह दिखाती है कि कैसे एक देश ने दशकों की निर्भरता को चुनौती दी और अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक हथियार बाजार में अपनी पहचान बनाई।
