सीहोर जिले में न्याय व्यवस्था को और अधिक सुलभ बनाने के लिए 13 दिसंबर, शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन जिला न्यायालय परिसर के साथ-साथ जिले की सभी तहसील न्यायालयों और 21 खंडपीठों पर संपन्न होगा। प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र आर्य के दिशा-निर्देशों के अनुसार इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को जनता के करीब लाना और लंबित प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का शीघ्र निपटान करना है।

लोक अदालत की यह पहल कानूनी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और नागरिकों के लिए आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके तहत कुल 16,250 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। ये प्रकरण विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक विवादों से संबंधित हैं, जिन्हें आम नागरिकों के लिए न्यायिक प्रक्रिया में आसानी के साथ निपटाया जाएगा।
नेशनल लोक अदालत का आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं है। यह उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें न्यायपालिका समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने का प्रयास करती है। लोक अदालत में मामलों की सुनवाई करते समय, पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा, विवादों का समाधान सहमति और समझौते के माध्यम से करने पर जोर दिया जाएगा।
जिला न्यायालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न अनुभवी न्यायाधीश, अधिवक्ता और विधिक सेवा प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। प्रत्येक खंडपीठ का गठन विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि सभी प्रकरणों का निपटान समान रूप से और समयबद्ध तरीके से हो। यह प्रणाली न्यायालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के साथ-साथ नागरिकों के बीच न्याय के प्रति विश्वास भी बढ़ाएगी।
लोक अदालत की योजना का उद्देश्य केवल प्रकरणों को निपटाना ही नहीं है, बल्कि आम जनता को कानूनी जागरूकता और उनके अधिकारों के प्रति सचेत करना भी है। इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि विवादों का समाधान कानूनी मार्ग से कैसे संभव है और किस प्रकार वे बिना लंबी प्रक्रिया के न्याय प्राप्त कर सकते हैं।
प्रकाश चंद्र आर्य ने बताया कि यह आयोजन जिले के हर नागरिक को न्याय तक पहुँचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में किए जाने वाले निपटान से लोगों का समय, पैसा और श्रम बचाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यह पहल न्यायपालिका और आम जनता के बीच एक मजबूत संवाद का माध्यम भी बनेगी।
लोक अदालत में निपटाए जाने वाले प्रकरणों में भूमि विवाद, पारिवारिक झगड़े, अनुबंध और लेन-देन से जुड़े मामलों के अलावा अन्य सामाजिक और आर्थिक मुद्दे भी शामिल होंगे। इन प्रकरणों के त्वरित निपटान से न्यायपालिका पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा। यह पहल न्यायपालिका की कार्यकुशलता और लोगों की संतुष्टि दोनों में इजाफा करेगी।
इस आयोजन में खंडपीठों का गठन इस प्रकार किया गया है कि प्रत्येक खंडपीठ लगभग समान संख्या में प्रकरणों को निपटाने के लिए जिम्मेदार होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी प्रकरण की सुनवाई में देरी न हो और सभी मामले समयबद्ध तरीके से निपट जाएं। न्यायाधीशों द्वारा प्रकरणों का निपटान करते समय सभी पक्षकारों को समान अवसर मिलेगा और उन्हें न्याय प्रक्रिया की पूरी जानकारी प्रदान की जाएगी।
इस पहल के माध्यम से यह संदेश भी जाता है कि न्याय केवल न्यायालय की चार दीवारों तक सीमित नहीं है। न्यायालय परिसर और तहसील न्यायालयों के बाहर आयोजित लोक अदालत से यह सुनिश्चित होता है कि आम नागरिक भी बिना किसी भय और असुविधा के न्याय तक पहुँच सकते हैं। यह कार्यक्रम विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा।
नेशनल लोक अदालत का यह आयोजन न्यायपालिका की पारदर्शिता, सुलभता और निष्पक्षता का प्रतीक है। यह पहल यह दर्शाती है कि न्यायपालिका केवल निर्णय देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के हित में सक्रिय भूमिका निभाने वाली संस्था भी है। प्रकरणों के त्वरित निपटान से समाज में न्याय के प्रति विश्वास और सामाजिक सामंजस्य बढ़ेगा।
