रायसेन जिला अस्पताल में स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर एक गंभीर घटना सामने आई है। हाल ही में बाल कल्याण समिति की टीम ने औचक निरीक्षण किया, जिसके दौरान अस्पताल के प्रसूता वार्ड और नवजात शिशु वार्ड में खटमल और कॉकरोच खुलेआम रेंगते हुए पाए गए। यह दृश्य न केवल अस्पताल की सफाई और प्रबंधन की स्थिति को उजागर करता है, बल्कि नवजात शिशुओं और प्रसूताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी उत्पन्न करता है।

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब देखा गया कि ये कीड़े उन बिस्तरों के आसपास रेंग रहे थे, जिनमें छोटे-छोटे नवजात बच्चे और उनकी माताएं भर्ती थीं। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष आदित्य चावला और उनकी टीम ने वार्ड की पूरी जांच की। उन्होंने बेड, चादरें और बेसमेंट का निरीक्षण किया, जिसमें कई गंदी चादरें मिलीं और किनारों पर खटमल नजर आए। इसके अलावा टीम ने वार्डों में रखे खाने की मेजों और वाटर कूलर की भी जांच की। कूलर के नीचे बड़ी संख्या में कॉकरोच पाए गए, और टंकी का ढक्कन खोलने पर भी वहां कीड़े सक्रिय पाए गए।
यह पूरा निरीक्षण सामाजिक कार्यकर्ता संजू सोनी द्वारा की गई शिकायत के बाद हुआ। संजू ने पहले अस्पताल में कीड़ों की समस्या की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने बाल कल्याण समिति से संपर्क किया। निरीक्षण के दौरान सामने आए दृश्य यह दर्शाते हैं कि अस्पताल की सफाई व्यवस्था में गंभीर कमी है।
अध्यक्ष आदित्य चावला ने बताया कि खटमल और कॉकरोच के कारण नवजात शिशुओं और प्रसूताओं के लिए संक्रमण का गंभीर खतरा है। यदि ये कीड़े शिशुओं की आंख, कान या मुंह में चले जाएं, तो संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने अपनी पूरी रिपोर्ट जिला सीएमएचओ को भेजने की बात कही।
यह घटना इंदौर के एमवाय अस्पताल में हाल ही में सामने आए चूहा कांड की याद दिलाती है, जिसमें नवजात बच्चों को चूहों ने काट लिया था। रायसेन जिला अस्पताल की यह स्थिति यह साबित करती है कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य और स्वच्छता की व्यवस्था में अभी भी गंभीर सुधार की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में नियमित सफाई, कीट नियंत्रण और ऑडिट प्रक्रिया का पालन न होने पर ऐसे हालात बन सकते हैं। अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि वे तुरंत कार्रवाई करें, ताकि नवजात बच्चों और प्रसूताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस पूरे मामले ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की निगरानी और सक्रिय भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते शिकायतें नहीं उठाई जातीं, तो नवजात बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। रायसेन जिला अस्पताल में उठाए गए कदम और बाल कल्याण समिति की जांच उम्मीद दिलाती है कि आने वाले समय में अस्पताल प्रशासन की ओर से उचित सुधार किए जाएंगे।
