दो दिन की अपेक्षाकृत राहत के बाद, राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता गुरुवार को फिर से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 24 घंटे का औसत AQI 307 दर्ज किया गया, जो पिछले दिन 259 था। इसका अर्थ यह है कि दिल्ली-NCR की हवा में प्रदूषक कणों का स्तर पिछले 24 घंटों में 48 पॉइंट बढ़ गया। इस बढ़ती वायु प्रदूषण की स्थिति ने एक बार फिर नागरिकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चेतावनी जारी कर दी है।

दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण और मॉनिटरिंग रिपोर्ट
शहर के 39 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 25 ने वायु गुणवत्ता को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रिकॉर्ड किया। CPCB के SAMEER ऐप के अनुसार रोहिणी क्षेत्र में सबसे अधिक AQI 372 दर्ज किया गया। इसके अलावा, जहांगीरपुरी में 366, अशोक विहार, बवाना और DTU में 358, नेहरू नगर में 351, वज़ीरपुर में 340, आनंद विहार और चांदनी चौक में 338, अलीपुर में 336 और ITO में 334 दर्ज किया गया।
ऐसे आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में वायु प्रदूषण अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि AQI 300 से ऊपर होना गंभीर स्तर माना जाता है, जिसमें सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
IITM पुणे के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान परिवहन क्षेत्र का था, जो कुल प्रदूषण का 16.6 प्रतिशत है। इसके बाद उद्योगों का 8.3 प्रतिशत, निर्माण कार्यों का 2.2 प्रतिशत और आवासीय स्रोतों का 4 प्रतिशत योगदान रहा। NCR क्षेत्र के आसपास झज्जर ने 18 प्रतिशत योगदान दिया, रोहतक 5.8 प्रतिशत, सोनीपत 2.7 प्रतिशत, भिवानी 3.9 प्रतिशत और गुरुग्राम 1.9 प्रतिशत योगदान के साथ प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की वायु प्रदूषण की समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और पार-राज्यीय कारणों से भी बढ़ रही है। हर साल नवंबर-दिसंबर के महीने में उत्तर भारत में ठंड के बढ़ते मौसम और अंधाधुंध कचरा जलाने की प्रथा के कारण वायु गुणवत्ता और भी खराब हो जाती है।
PM 2.5 और PM 10 का खतरनाक स्तर
मानकों के अनुसार हवा तभी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित मानी जाती है जब PM 10 प्रदूषक का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कम और PM 2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कम हो। लेकिन गुरुवार दोपहर 1 बजे दिल्ली-NCR की हवा में PM 10 का औसत स्तर 275 और PM 2.5 का औसत स्तर 150 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। यह आंकड़ा दिल्ली में हवा में प्रदूषक कणों के स्तर के औसत को ढाई गुना से अधिक बताता है।
मौसम और स्थलीय कारक
सर्दियों के मौसम में हवा में ठंडी परत बनने के कारण वायु अधिक समय तक जमीन के पास बनी रहती है। इस वजह से दिल्ली और NCR में स्मॉग की स्थिति बन जाती है। हवाओं की गति धीमी होने के कारण प्रदूषण का फैलाव नहीं होता और शहर के ऊपर एक प्रदूषण की परत छा जाती है। इस पर धुआं, वाहनों से निकलने वाले धुएँ और उद्योगों के प्रदूषक मिलकर दिल्ली को एक तरह से ‘गैस चैंबर’ में बदल देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन हालात में लोगों को मास्क पहनने, अधिक समय तक घर के अंदर रहने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है। बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोग से पीड़ित लोगों के लिए ये हालात और अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं।
सरकारी और तकनीकी प्रयास
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने SAMEER ऐप के माध्यम से नागरिकों को वायु गुणवत्ता की लाइव अपडेट देने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के तहत अगले दो-तीन दिनों तक दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहने की संभावना जताई गई है।
सरकारी प्रयासों में वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करना, निर्माण कार्यों को सीमित करना और कचरा जलाने पर रोक लगाना शामिल है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों के प्रयासों के बावजूद प्रदूषण की समस्या हर साल गहराती जा रही है।
दिल्लीवासियों पर प्रभाव
इस बढ़ती वायु प्रदूषण की वजह से सांस की बीमारियों, आंखों और त्वचा की परेशानियों में वृद्धि हुई है। अस्पतालों में सांस संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या में भी इजाफा देखा गया है। लोग असामान्य खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और थकान जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इन प्रदूषक कणों के संपर्क में रहने से फेफड़ों और हृदय पर गंभीर असर पड़ सकता है। AQI लगातार उच्च स्तर पर रहने से स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की संभावना होती है।
भविष्य की चेतावनी और उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना कम है। ठंडी हवाओं के कारण स्मॉग और वायु प्रदूषण की स्थिति बनी रह सकती है। इसलिए नागरिकों को अपनी सुरक्षा के लिए मास्क पहनना, घर के अंदर शुद्ध हवा वाले उपकरणों का उपयोग करना और अनावश्यक बाहर निकलने से बचना चाहिए।
इसके अलावा, ट्रांसपोर्टेशन के प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन को मजबूती देना और उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषकों पर नियंत्रण लागू करना बेहद आवश्यक है।
