भारतीय शेयर बाजार इन दिनों एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां एक ओर विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली चिंता बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को गिरने से बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दिसंबर 2025 के शुरुआती कारोबारी दिनों में बाजार के भीतर जो हलचल देखने को मिली है, वह केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक संकेत, घरेलू आर्थिक स्थिति और निवेशकों की बदलती मानसिकता भी शामिल है।

दिसंबर के पहले नौ कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 18 हजार करोड़ रुपये की निकासी की है। यह आंकड़ा अपने आप में बड़ा है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में कोई बड़ी गिरावट नहीं देखने को मिली। इसका सबसे बड़ा कारण घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी मानी जा रही है, जिन्होंने विदेशी बिकवाली से लगभग दोगुनी रकम बाजार में लगाकर संतुलन बनाए रखा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे की वजहें
विदेशी निवेशक किसी भी देश के बाजार में केवल मुनाफे के लिए नहीं आते, बल्कि वे वैश्विक आर्थिक हालात, ब्याज दरों, मुद्रा की स्थिति और राजनीतिक स्थिरता को भी ध्यान में रखते हैं। मौजूदा समय में अमेरिका और यूरोप में महंगाई, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों ने उभरते बाजारों से पूंजी निकालने की प्रवृत्ति को बढ़ाया है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियां भी विदेशी निवेशकों को सतर्क कर रही हैं। इन सभी कारणों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों का बढ़ता भरोसा
जहां विदेशी निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहे हैं, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती पर भरोसा जता रहे हैं। बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड और पेंशन फंड जैसे बड़े घरेलू निवेशकों ने इस बिकवाली के दौरान जमकर खरीदारी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की यह सक्रियता भारतीय बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि देश के भीतर निवेशकों का भरोसा बना हुआ है और वे मौजूदा गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं।
बेंचमार्क सूचकांकों पर सीमित असर
इतनी बड़ी विदेशी बिकवाली के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में कोई बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन घरेलू खरीदारी ने हर गिरावट को थाम लिया।
हालांकि, बाजार की चौड़ाई यानी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव देखा गया, लेकिन ब्लू-चिप कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल गुणवत्ता वाले शेयरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सेंसेक्स की टॉप कंपनियों की घटती वैल्यू
पिछला सप्ताह शेयर बाजार के लिए ज्यादा अनुकूल नहीं रहा। सेंसेक्स की शीर्ष दस कंपनियों में से आठ की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 79 हजार करोड़ रुपये की कमी आई। इस गिरावट में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की बड़ी कंपनियों का योगदान ज्यादा रहा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है, क्योंकि इन कंपनियों के मूलभूत आंकड़े अभी भी मजबूत हैं। जैसे ही वैश्विक माहौल स्थिर होगा, इन शेयरों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
आने वाला हफ्ता क्यों है अहम
आगामी सप्ताह निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दौरान देश और विदेश से आने वाले कई आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। भारत में थोक महंगाई के आंकड़े यह संकेत देंगे कि कीमतों पर दबाव कितना है, वहीं अमेरिका से आने वाले रिटेल सेल्स, महंगाई और रोजगार के आंकड़े वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित करेंगे।
यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम रहते हैं, तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, मजबूत आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों को लेकर नई चिंताएं भी पैदा कर सकते हैं।
रियल एस्टेट और सरकारी पहलें
बाजार के बीच एक राहत भरी खबर रियल एस्टेट सेक्टर से आई है। सरकारी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक नई आवास योजना की घोषणा की गई है, जिसके तहत फ्लैट खरीदने पर विशेष छूट दी जाएगी। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में मांग बढ़ने की उम्मीद है और इसका सकारात्मक असर संबंधित कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ सकता है।
बोनस शेयर और निवेशकों का उत्साह
एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी द्वारा बोनस शेयर देने की घोषणा ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हर एक शेयर पर एक नया शेयर मिलने की योजना से छोटे निवेशकों में उत्साह देखने को मिला है। बोनस शेयर अक्सर कंपनी के मजबूत भविष्य और प्रबंधन के भरोसे का संकेत माने जाते हैं।
एविएशन सेक्टर की हलचल
देश का एविएशन सेक्टर भी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। एक युवा विमानन कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह आने वाले वर्षों में अपना आईपीओ ला सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो नई और तेजी से बढ़ती कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं।
नेपाल में भारतीय मुद्रा को लेकर बदलाव
व्यापार जगत से जुड़ी एक अहम खबर पड़ोसी देश नेपाल से भी आई है। वहां लंबे समय बाद उच्च मूल्यवर्ग के भारतीय नोटों के इस्तेमाल की अनुमति देने की तैयारी की जा रही है। इससे सीमावर्ती व्यापार, पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
रक्षा क्षेत्र और आत्मनिर्भरता
रक्षा क्षेत्र में भी बड़े सौदों और स्वदेशी परियोजनाओं ने ध्यान खींचा है। बीते वर्षों में स्वदेशी रक्षा उपकरणों की खरीद में तेजी आई है, जिससे न केवल रक्षा कंपनियों को फायदा हुआ है, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिली है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई
ईंधन की कीमतें आम आदमी और बाजार दोनों के लिए अहम होती हैं। प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी किए गए हैं, जो महंगाई की तस्वीर को समझने में मदद करते हैं। ईंधन कीमतों में स्थिरता बाजार के लिए सकारात्मक मानी जाती है।
निष्कर्ष: संतुलन का दौर
कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार इस समय संतुलन के दौर से गुजर रहा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जरूर चिंता का विषय है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने बाजार को संभाल रखा है। आने वाले हफ्तों में आर्थिक आंकड़े और वैश्विक संकेत यह तय करेंगे कि बाजार किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
