आज के दौर में जब बच्चे मोबाइल और डिजिटल मनोरंजन में अधिक उलझे रहते हैं, ऐसे समय में गणितीय कौशल और मानसिक क्षमता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले से ताल्लुक रखने वाले छात्र वैभव वर्मा ने ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने ऑनलाइन इंटरनेशनल अबेकस प्रतियोगिता में देशभर में पहला स्थान प्राप्त कर न केवल अपने स्कूल और परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित किया है।

यह प्रतियोगिता हिन्दुस्तान बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें देश और विदेश के हजारों प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से आयोजित हुई, जिसमें प्रतिभागियों को सीमित समय में अधिकतम गणनाएं सही तरीके से हल करनी थीं। इस चुनौतीपूर्ण माहौल में वैभव वर्मा ने असाधारण एकाग्रता और तेज मानसिक गणना क्षमता का परिचय दिया।
दस मिनट में 150 प्रश्न हल कर बनाई पहचान
प्रतियोगिता की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें समय सीमा बेहद कम रखी गई थी। प्रतिभागियों को केवल दस मिनट में अधिकतम प्रश्न हल करने थे। वैभव वर्मा ने इस दौरान 150 जटिल गणितीय प्रश्नों को सही तरीके से हल कर निर्णायकों को चौंका दिया। उनकी यह गति और सटीकता किसी अनुभवी गणितज्ञ से कम नहीं मानी गई।
अबेकस गणना में केवल उंगलियों की गति ही नहीं, बल्कि दिमाग की तीव्रता, स्मरण शक्ति और फोकस की भी अहम भूमिका होती है। वैभव ने यह साबित कर दिया कि सही प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास से कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
पढ़ाई के साथ कौशल विकास की मिसाल
वैभव वर्मा सीहोर स्थित माइंड्स आई इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा आठवीं के छात्र हैं। सामान्य शैक्षणिक पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अबेकस को अपनी रुचि और अभ्यास का माध्यम बनाया। स्कूल और घर दोनों जगह मिले सकारात्मक माहौल ने उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके शिक्षक बताते हैं कि वैभव शुरू से ही गणित में रुचि रखते थे। अबेकस सीखने के बाद उनकी गणना क्षमता में तेजी से सुधार हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने मानसिक गणना में ऐसी दक्षता हासिल कर ली कि कठिन से कठिन सवाल भी कुछ ही सेकंड में हल कर लेते हैं।
ऑनलाइन मंच पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा
इस प्रतियोगिता में केवल भारत ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया। ऑनलाइन मंच होने के कारण प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा था। हर प्रतिभागी अपने देश और संस्था का प्रतिनिधित्व कर रहा था। ऐसे में प्रथम स्थान हासिल करना किसी भी छात्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
वैभव वर्मा ने इस वैश्विक मंच पर न केवल खुद को साबित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि छोटे शहरों के छात्र भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उनकी इस सफलता ने कई अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित किया है।
परिवार और शिक्षकों का योगदान
वैभव की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके माता-पिता ने शुरू से ही पढ़ाई के साथ-साथ कौशल विकास को महत्व दिया। उन्होंने कभी वैभव पर अनावश्यक दबाव नहीं डाला, बल्कि उनकी रुचि को समझते हुए हर संभव सहयोग किया।
शिक्षकों ने भी वैभव की क्षमता को पहचान कर उन्हें सही मार्गदर्शन दिया। नियमित अभ्यास, समय प्रबंधन और मानसिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे वैभव प्रतियोगिता के दौरान पूरी तरह फोकस बनाए रख सके।
अबेकस शिक्षा का बढ़ता महत्व
आज के समय में अबेकस केवल गणना का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह बच्चों के मानसिक विकास का एक प्रभावी साधन बन चुका है। इससे बच्चों की एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास में जबरदस्त सुधार देखा जाता है। वैभव वर्मा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि अबेकस शिक्षा बच्चों को अकादमिक और प्रतिस्पर्धात्मक दोनों स्तरों पर मजबूत बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूल स्तर पर अबेकस जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए, तो छात्रों में गणित का डर खत्म हो सकता है और वे विषय को रुचि के साथ सीख सकते हैं।
जिले के लिए गर्व का क्षण
सीहोर जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल करना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। वैभव की इस उपलब्धि के बाद स्कूल परिसर में खुशी का माहौल देखने को मिला। साथी छात्रों ने भी उनसे प्रेरणा लेते हुए अबेकस और अन्य मानसिक कौशलों में रुचि दिखानी शुरू कर दी है।
यह सफलता केवल एक छात्र की नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो यह मानती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
भविष्य की राह और नई प्रेरणा
वैभव वर्मा की यह उपलब्धि उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आने वाले समय में वे गणित और मानसिक कौशल के क्षेत्र में और आगे बढ़ना चाहते हैं। उनका सपना है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करें और अन्य बच्चों को भी इस दिशा में प्रेरित करें।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से कोई भी छात्र असाधारण सफलता हासिल कर सकता है।
