छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में एक ऐसी मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई, जिसने न केवल अस्पताल परिसर को बल्कि पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। परासिया शासकीय सिविल अस्पताल के महिला शौचालय में सोमवार दोपहर एक नवजात का शव कमोड में फंसा पाया गया। इस घटना की जानकारी सबसे पहले उस महिला सफाईकर्मी को हुई, जो नियमित रूप से अस्पताल के शौचालयों की सफाई करती थी।

सफाई के दौरान जब उसने देखा कि शौचालय का पानी सामान्य तरीके से बह नहीं रहा है, तो उसे लगा कि शायद किसी वस्तु के फंसने की वजह से पानी का प्रवाह रुक गया है। जैसे ही उसने करीब जाकर निरीक्षण किया, तो उसकी आँखों के सामने एक बेहद डरावना दृश्य था। कमोड में एक नवजात का सिर और हाथ दिखाई दे रहे थे। वह घबरा गई और तुरंत अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी।
इस खबर के फैलते ही पूरे अस्पताल में अफरातफरी मच गई। प्रशासन ने तुरंत पुलिस को बुलाया। मौके पर पहुंची पुलिस के सामने चुनौती बड़ी थी, क्योंकि नवजात का शव कमोड में फंसा हुआ था और उसे निकालना आसान नहीं था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने अस्पताल कर्मचारियों और नगर पालिका के कर्मचारियों के सहयोग से कमोड को तोड़कर शव को निकालने का निर्णय लिया।
इस प्रक्रिया में करीब सात घंटे का समय लगा। यह पूरा समय अस्पताल में एक अजीब सा तनाव और बेचैनी पैदा कर रहा था। आखिरकार शाम के समय नवजात का शव बाहर निकाला गया। इसके बाद तत्काल अस्पताल के एएनसी, पीएनसी और लेबर रूम की जांच की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाल ही में कोई महिला प्रसव के बाद अस्पताल में है या नहीं। जांच के दौरान ऐसा कोई सुराग नहीं मिला।
इस घटना ने न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और नैतिकता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है। पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नवजात को शौचालय में छोड़ने वाली महिला की खोज शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अक्सर मानसिक तनाव, सामाजिक दबाव या अपरिपक्वता कारण हो सकते हैं। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि यह घटना बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत को उजागर करती है। स्थानीय लोग इस घटना को सुनकर सकते में हैं और सामाजिक जागरूकता की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि वह इस मामले में पूरी तरह सहयोग कर रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और सुरक्षा बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। समाज के हर वर्ग से यह अपेक्षा की जाती है कि वे न केवल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के प्रति सजग रहें, बल्कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर समाजिक सहानुभूति और जिम्मेदारी भी निभाएं।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि बच्चों की सुरक्षा और महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना कितना जरूरी है। अस्पताल प्रशासन, पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस मामले की पूरी जांच कर रहे हैं ताकि जिम्मेदारों को कानून के अनुसार दंडित किया जा सके।
इस प्रकार, छिंदवाड़ा की यह घटना समाज के लिए चेतावनी है कि स्वास्थ्य संस्थानों में निगरानी, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
