वेनेज़ुएला, दक्षिण अमेरिका का एक ऐसा देश है, जो अपनी विशाल तेल संपदा के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है। यह देश दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शामिल रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक और आर्थिक संकटों ने इसके तेल उद्योग को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। 2019 में अमेरिकी प्रशासन ने वेनेज़ुएला के तेल उद्योग पर सख्त प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य यह था कि देश और कंपनियां वेनेज़ुएला से तेल न खरीदें और न उसका व्यापार करें। परिणामस्वरूप, देश का तेल निर्यात आधे से भी कम रह गया।

जनवरी 2019 में, वेनेज़ुएला का तेल निर्यात लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन था, जो वर्ष के अंत तक घटकर 4.95 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया। यह गिरावट स्पष्ट रूप से प्रतिबंधों की सफलता को दर्शाती थी। लेकिन समय के साथ, यह स्पष्ट हुआ कि मादुरो की सरकार ने इन प्रतिबंधों से बचने के लिए नए उपाय ढूंढ लिए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण और विवादित तरीका था, जिसे “घोस्ट फ़्लीट” कहा जाता है।
घोस्ट फ़्लीट क्या है और यह कैसे काम करती है
घोस्ट फ़्लीट वास्तव में तेल टैंकरों का एक समूह है, जो अपने संचालन को छिपाने के लिए कई तरह की रणनीतियों का उपयोग करता है। इन जहाज़ों का संचालन इतना गुप्त होता है कि उनकी वास्तविक पहचान और लोकेशन का पता लगाना लगभग असंभव होता है। इस तरह की गतिविधियाँ केवल वेनेज़ुएला तक सीमित नहीं हैं; रूस और ईरान जैसे अन्य प्रतिबंधित देशों ने भी इस रणनीति को अपनाया है।
एक अनुमान के अनुसार, दुनिया के हर पांच में से एक तेल टैंकर प्रतिबंधित देशों से तेल की तस्करी में इस्तेमाल होता है। इसमें वेनेज़ुएला का योगदान लगभग 10 प्रतिशत है, ईरान 20 प्रतिशत और रूस का हिस्सा 50 प्रतिशत है। शेष 20 प्रतिशत ऐसे टैंकर हैं, जो कई देशों के तेल का परिवहन कर सकते हैं।
घोस्ट फ़्लीट की प्रमुख चालों में शामिल है जहाज़ का नाम या झंडा बदलना। उदाहरण के लिए, हाल ही में अमेरिका द्वारा ज़ब्त किए गए टैंकर “द स्किपर” का नाम पहले “अदीसा” और उससे पहले “द टोक्यो” था। इस जहाज़ का इस्तेमाल रूसी तेल कारोबारी और प्रतिबंधित नेटवर्क के लिए किया जाता रहा है।
ज़ॉम्बी शिप्स और उनकी पहचान
कुछ पुराने जहाज़ जिन्हें कबाड़ किया जा चुका है, उनकी पहचान चोरी करके घोस्ट फ़्लीट में शामिल कर लिए जाते हैं। ये जहाज़ अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा दिए गए यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर का दुरुपयोग करते हैं। इन्हें “ज़ॉम्बी शिप्स” कहा जाता है। इन जहाज़ों की उम्र 20 साल से अधिक होती है और अक्सर 25 साल बाद इन्हें कबाड़ कर दिया जाता है। इनकी पहचान और लोकेशन को छुपाने के लिए आधुनिक तकनीकें, जैसे कि एआईएस (ऑटोमैटिक आइडेंटिफ़िकेशन सिस्टम) को बंद करना या गलत सिग्नल भेजना, उपयोग में लाए जाते हैं।
तेल के असली स्रोत को छिपाना
एक अन्य रणनीति में, प्रतिबंधित देश का तेल अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में दूसरे टैंकरों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। यह टैंकर किसी अन्य देश के झंडे के तहत यात्रा करता है, जिससे तेल की असली पहचान छुप जाती है। इस तरीके से चीन जैसे देशों तक तेल पहुँचाया गया। इसके अलावा, कई जहाज़ लंबे समय तक बंदरगाहों पर बिना डॉक किए रहते हैं और लोकेशन सिग्नल बंद रखते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और अमेरिकी कार्रवाई
हाल ही में, अमेरिकी सेना ने वेनेज़ुएला के तट के पास एक विशाल तेल टैंकर को ज़ब्त किया। इसे अब तक का सबसे बड़ा टैंकर बताया गया। इस कार्रवाई का उद्देश्य वेनेज़ुएला की घोस्ट फ़्लीट पर दबाव डालना और प्रतिबंधों को प्रभावी बनाना है। अमेरिका ने अपने सबसे बड़े एयरक्राफ़्ट कैरियर को भी कैरिबियन क्षेत्र में तैनात किया, जिससे वेनेज़ुएला के तेल नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाई जा सके।
मादुरो की सरकार ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और इसे “समुद्री डकैती” कहा। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह कार्रवाई घोस्ट फ़्लीट पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नेटवर्क की जटिलता और इसके संचालन की गुप्त रणनीतियाँ अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती हैं।
घोस्ट फ़्लीट का वैश्विक महत्व
घोस्ट फ़्लीट न केवल वेनेज़ुएला के तेल उद्योग के लिए बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह प्रतिबंधित देशों को वैश्विक तेल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने में मदद करता है, जबकि दूसरी ओर यह अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यापारिक नियमों के उल्लंघन का संकेत भी देता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन जहाज़ों के संचालन का प्रभाव केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी प्रभाव डालता है।
निष्कर्ष
वेनेज़ुएला की घोस्ट फ़्लीट यह दर्शाती है कि कैसे प्रतिबंधों के बावजूद देश अपनी रणनीतियों के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रख सकता है। यह नेटवर्क अत्यधिक गुप्त और तकनीकी रूप से परिष्कृत है, जिससे इसका पता लगाना और नियंत्रण करना चुनौतीपूर्ण है। अमेरिकी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय निगरानी इस पर कुछ हद तक असर डाल सकती है, लेकिन वैश्विक तेल व्यापार और राजनीति में इसके प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना आसान नहीं है।
