राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लगातार समाज से जुड़ने और जनता के बीच अपने कार्यों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए नए-नए प्रयोग करता रहता है। इसी दिशा में संघ ने हाल ही में ‘कवर्ड कैंपस’ अभियान की शुरुआत की। यह अभियान संगठन और समाज के बीच सामंजस्य बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है और इसका सबसे सफल संचालन भोपाल विभाग में देखा गया।

भोपाल विभाग में पांच जिले शामिल हैं। इनमें भोपाल शहरी क्षेत्र में चार और मंडीदीप–बैरसिया क्षेत्र शामिल है। इस विभाग में 490 कॉलोनियों को कवर्ड कैंपस मॉडल में शामिल किया गया है। इस मॉडल के अंतर्गत प्रत्येक कॉलोनी को एक सक्रिय टीम द्वारा संभाला जाता है, जो स्थानीय लोगों के साथ निरंतर संपर्क में रहती है। टीम स्थानीय समुदाय के मुद्दों को समझती है, और सामाजिक गतिविधियों और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से जनता तक संगठन की पहुंच बढ़ाती है।
कवर्ड कैंपस अभियान की रूपरेखा
कवर्ड कैंपस अभियान की मूल अवधारणा यह है कि प्रत्येक कॉलोनी या इलाके को एक संरचित नेटवर्क के माध्यम से संभाला जाए। इसमें स्वयंसेवक नागरिकों के बीच सीधे संवाद स्थापित करते हैं, उनकी समस्याओं को समझते हैं और संगठन के सामाजिक कार्यक्रमों में उन्हें शामिल करते हैं। इस प्रक्रिया में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियान शामिल किए जाते हैं।
भोपाल में इस मॉडल की सफलता का प्रमुख कारण स्थानीय स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी और नागरिकों के प्रति उनकी संवेदनशीलता रही है। इन स्वयंसेवकों ने नियमित रूप से कॉलोनियों में जाकर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के साथ विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की। इसके साथ ही स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा से जुड़ी कार्यशालाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल का विस्तार
भोपाल में मॉडल की सफलता को देखते हुए संघ ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया है। यह मॉडल केवल भोपाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश के शहरों और कस्बों में इसका विस्तार किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर यह अभियान विभिन्न जिलों और राज्यों में स्थानीय स्वयंसेवकों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों के साथ संघ के संबंध को मजबूत करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।
संघ का यह प्रयास यह दर्शाता है कि संगठन केवल राजनीतिक या सामाजिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग के साथ जुड़ने और उनकी समस्याओं को समझने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। कवर्ड कैंपस मॉडल एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जो लोगों को सीधे संवाद और सहयोग का अवसर प्रदान करता है।
भोपाल मॉडल की विशेषताएँ
भोपाल में 1500 कवर्ड कैंपस की सूची तैयार की गई है। प्रत्येक कैंपस के लिए स्वयंसेवकों की टीम बनाई गई है, जो कॉलोनियों में नियमित रूप से गतिविधियाँ आयोजित करती है। टीम का काम केवल सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि कॉलोनियों के नागरिक संगठन के प्रयासों से जुड़ें और स्थानीय समस्याओं के समाधान में सहयोग करें।
भोपाल के मॉडल की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें तकनीकी साधनों का भी इस्तेमाल किया गया। प्रत्येक कॉलोनी की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार की जाती है। इस डेटा के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर नीति और योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाता है।
सामाजिक प्रभाव और जनता की सहभागिता
कवर्ड कैंपस मॉडल का सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। इस मॉडल के माध्यम से स्थानीय लोग स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में जागरूक होते हैं। बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे उनकी प्रतिभा को निखारने और सामाजिक जिम्मेदारी को समझने का अवसर मिलता है।
स्थानीय समुदाय में इस अभियान ने एक सकारात्मक माहौल बनाया है। लोग स्वयंसेवकों के साथ जुड़कर विभिन्न सामाजिक कार्यों में भाग लेते हैं। यह पहल समाज में सहयोग, एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देती है।
भविष्य की योजनाएँ
भविष्य में संघ इस मॉडल को और व्यापक स्तर पर लागू करने का इरादा रखता है। इसका लक्ष्य केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इसे विस्तार देना है। इसके लिए स्वयंसेवकों की नई टीमों का गठन किया जाएगा और उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
संघ का यह प्रयास यह दिखाता है कि संगठन समय के साथ अपने कार्यों और रणनीतियों में नवाचार करता रहता है। कवर्ड कैंपस मॉडल एक ऐसा उदाहरण है जो संगठन और जनता के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करने में सक्षम है।
