हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मध्यपूर्वी संकट ने पाकिस्तान की विदेश नीति और सैन्य नेतृत्व को चुनौतीपूर्ण स्थिति में ला दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर पर गाजा पट्टी में आतंकी संगठन हमास से हथियार छीनने और उनकी निरस्त्रीकरण प्रक्रिया में सेना भेजने का दबाव बनाया है। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से जटिल साबित हो रही है।

गाजा पट्टी पिछले दो वर्षों से इजरायल-हमास संघर्ष की वजह से पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। यहां के नागरिक आधारभूत सुविधाओं, आवासीय इलाकों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। कई देश इस क्षेत्र में अपनी सेना भेजने के लिए संकोच कर रहे हैं, क्योंकि गाजा में सैनिक भेजना न केवल जोखिमपूर्ण है बल्कि अंतरराष्ट्रीय मान्यताओं और क्षेत्रीय सहयोग को भी प्रभावित कर सकता है।
असीम मुनीर और अमेरिका के संबंध
असीम मुनीर ने हाल के समय में भारत के प्रभाव को काउंटर करने के लिए अमेरिकी नेतृत्व के साथ तेजी से संबंध बनाए। उनकी यह पहल पाकिस्तान की विदेश नीति में एक नई दिशा दिखाती है, लेकिन अब यह रिश्ता उनकी सबसे बड़ी परीक्षा का कारण बन सकता है। अमेरिका ने असीम मुनीर को गाजा में हमास के निरस्त्रीकरण अभियान में सहयोग देने के लिए कई बार वॉशिंगटन बुलाया है। आने वाले हफ्तों में असीम मुनीर की यह तीसरी अमेरिका यात्रा होने की संभावना है, जिसमें मुख्य फोकस गाजा संकट और वहां सेना भेजने की रणनीति पर रहेगा।
डोनाल्ड ट्रंप का 20 प्वाइंट प्लान
डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए एक 20 प्वाइंट का प्लान तैयार किया है। इस योजना में कई मुस्लिम देशों के सैनिकों को गाजा में तैनात करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि गाजा में पुनर्निर्माण और आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद की जा सके। इसके साथ ही, इन सैनिकों को हमास से हथियार छीनने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। हालांकि इस प्रस्ताव को कई मुस्लिम देशों ने अपनाने में हिचकिचाहट जताई है।
इस्लामिक देशों का मुख्य डर यह है कि अगर उन्होंने गाजा में सैनिक भेजे, तो उन्हें अपने घर में विरोध का सामना करना पड़ेगा और साथ ही यह उनके लिए एक ऐसे संघर्ष में उलझने का कारण बनेगा जो वर्तमान में गाजा में चल रहा है। इस स्थिति में उनकी छवि भी प्रभावित हो सकती है, जिससे वे इजरायल समर्थक या गाजा विरोधी नजरिए में आ सकते हैं।
पाकिस्तान के आंतरिक हालात
पाकिस्तान के लिए गाजा में सेना भेजना आसान नहीं है। देश में पहले से ही गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इमरान खान और उनके समर्थक लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। असीम मुनीर को गाजा में सेना भेजने का आदेश देना, देश में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान शांति स्थापना के लिए सैनिक भेजने पर विचार कर सकता है, लेकिन हमास को निरस्त्र करना पाकिस्तान का काम नहीं है। इस बीच, अमेरिका के निवेश और सुरक्षा सहयोग को पुनः शुरू करने में भी पाकिस्तान को लाभ मिल सकता है, लेकिन इसके लिए असीम मुनीर को अपनी सेना को गाजा भेजने पर विचार करना होगा।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पाकिस्तान का दबाव
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पाकिस्तान इस मिशन से इनकार करता है, तो डोनाल्ड ट्रंप नाराज हो सकते हैं। ट्रंप के नजरिए में यह कदम पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय नीति और अमेरिका के साथ सहयोग को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के आंतरिक हालात और राजनीतिक अस्थिरता इसे गाजा में सैनिक भेजने के लिए कठिन बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की सेना और राजनीतिक नेतृत्व के सामने दो चुनौतियां हैं। पहली, अमेरिका के दबाव का सामना करना और दूसरा, देश के आंतरिक विरोध प्रदर्शन और गृहयुद्ध जैसी स्थिति को संभालना। असीम मुनीर के लिए यह चुनौती केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी घरेलू साख और सेना की प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकती है।
गाजा में संभावित परिणाम और वैश्विक दृष्टिकोण
अगर पाकिस्तान ने गाजा में सैनिक भेजे, तो देश के अंदर व्यापक विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। इसके अलावा, गाजा में सैनिक भेजने के निर्णय से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, अगर पाकिस्तान ने सैनिक नहीं भेजे, तो अमेरिका के गुस्से और उनके दबाव का सामना करना होगा। इस स्थिति में असीम मुनीर की कूटनीतिक क्षमता और निर्णय क्षमता पर दुनिया की नजरें टिकी होंगी।
गाजा में सेना भेजना केवल हथियार छीनने का अभियान नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक पुनर्निर्माण और नागरिक सुरक्षा से जुड़ा एक संवेदनशील मिशन होगा। पाकिस्तान के लिए यह मिशन राजनीतिक, सामाजिक और कूटनीतिक तीनों दृष्टियों से चुनौतीपूर्ण है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर की गाजा में सेना भेजने की संभावना एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। यह केवल अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों की परीक्षा नहीं है, बल्कि देश की आंतरिक स्थिरता और राजनीतिक संतुलन की भी परीक्षा है। गाजा संकट में सैनिक भेजने का निर्णय असीम मुनीर के नेतृत्व, पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच संतुलन बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
यह स्थिति पाकिस्तान की कूटनीति और मध्यपूर्व में उसकी भूमिका को भी प्रभावित कर सकती है। आने वाले हफ्तों में असीम मुनीर की अमेरिका यात्रा और वहां की बातचीत इस जटिल स्थिति का भविष्य तय करेगी।
