दक्षिण चीन सागर में अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हाल ही में फिलीपीनी मछुआरों की नौकाओं पर चीन की कार्रवाई और अमेरिका की निंदा ने दोनों देशों के बीच जुबानी जंग को नया मोड़ दे दिया है। चीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका इस विवाद में कोई पक्ष नहीं है और उसे हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। चीन के अनुसार, दक्षिण चीन सागर के शियानबिन जिआओ और आसपास के पानी पर उसकी संप्रभुता निर्विवाद है।

फिलीपींस पर चीन की कार्रवाई
12 दिसंबर को चीन ने आरोप लगाया कि फिलीपींस ने शियानबिन जिआओ के पास उकसावे और खतरनाक हरकतों के लिए बड़ी संख्या में जहाज भेजे। चीनी तट रक्षक जहाजों ने लैगून में घुसे फिलीपीनी मछुआरों को रोकने के प्रयास किए। इसमें अचानक रास्ता बदलने और चाकू से धमकाने जैसी घटनाएं भी शामिल थीं। चीन ने इसे अपनी संप्रभुता और समुद्री अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी विदेश विभाग ने फिलीपीनी मछुआरों पर चीन की कार्रवाई की निंदा की। प्रवक्ता थॉमस टॉमी पिगोट ने कहा कि इस तरह की आक्रामक कार्रवाई से फिलीपीनी मछुआरों की आजीविका प्रभावित हो रही है। अमेरिका ने कहा कि वह अपने फिलीपीनी सहयोगियों के साथ खड़ा है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए चीन की उकसाने वाली रणनीति के खिलाफ आवाज उठाएगा।
चीन का कड़ा संदेश
चीन ने अमेरिकी दूतावास के माध्यम से चेतावनी दी कि अमेरिका को तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और भड़काऊ टिप्पणियां करने से बचना चाहिए। चीन ने कहा कि उसकी हर कार्रवाई वैध, कानूनी और पेशेवर है और फिलीपींस को अपनी उकसावे वाली गतिविधियों को तुरंत रोक देना चाहिए।
कूटनीतिक और वैश्विक असर
यह विवाद न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है, बल्कि दक्षिण चीन सागर में नौसेना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों पर भी असर डाल सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा रणनीतियों पर भी पड़ेगा। इस विवाद में फिलीपींस की भूमिका, चीन की संप्रभुता दावेदारी और अमेरिका की प्रतिक्रिया सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं।
