सूरत शहर में रहने वाले सुरेंद्र वर्मा का नाम पिछले कई वर्षों से चर्चा में था। वह अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में जेल में बंद था और आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा था। साल 2016 में पैरोल पर रिहा होने के बाद वह फरार हो गया। नौ साल तक सुरेंद्र पुलिस की नजरों से दूर रहा, लेकिन उसकी एक सामान्य आदत ने अंततः उसे पकड़ने में मदद की।

सुरेंद्र वर्मा ने अपनी पत्नी की हत्या के मामले में सजा काटते हुए जेल से पैरोल प्राप्त किया था। पैरोल अवधि में उसने पुलिस की नजरों से बचने के लिए अपने पैतृक गांव और परिवार से संपर्क नहीं रखा। वह उत्तर प्रदेश के छोटे गाँव बेओहरा से सूरत आया और वहां एक इंजीनियरिंग कंपनी में काम करने लगा।
जीवन का दूसरा अध्याय और फरारी
पुलिस के अनुसार, सुरेंद्र ने पैरोल के दौरान अपनी पत्नी की हत्या के अपराध से बचते हुए अपनी जिंदगी में नया अध्याय शुरू किया। उसने दूसरी शादी कर ली और सचिन इलाके में किराए के मकान में रहकर रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। सुरेंद्र ने नए जीवन में सामान्य नागरिक की तरह व्यवहार किया, लेकिन उसकी पुरानी पहचान पुलिस के लिए हमेशा एक चुनौती बनी रही।
पुलिस की जांच और रणनीति
सूरत पुलिस ने सुरेंद्र को पकड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया। एसीपी नीरव गोहिल ने बताया कि प्रारंभ में पुलिस ने सुरेंद्र के पैतृक गांव और आसपास के रिश्तेदारों से पूछताछ की। उत्तर प्रदेश की पुलिस के सहयोग से सुरेंद्र के ठिकाने का पता लगाया गया।
पुलिस ने पाया कि सुरेंद्र अपने नए जीवन में भी कुछ स्थायी आदतों का पालन कर रहा था। उनमें से एक महत्वपूर्ण आदत थी – चाय के साथ बिस्किट खाना। पुलिस ने सुरेंद्र की इस आदत का लाभ उठाया और उसे पकड़ने की योजना बनाई।
बिस्किट ने दी सफलता
निगरानी के दौरान पुलिस ने देखा कि सुरेंद्र हर सुबह बिस्किट खरीदने आता था। दो दिनों तक सादे कपड़ों में सुरेंद्र के घर के पास निगरानी रखी गई। 14 नवंबर को जब वह अपने बेटे के साथ बिस्किट खरीदने आया, पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसके बाद उसे उत्तर प्रदेश से सूरत लाकर अदालत में पेश किया गया।
पैरोल का महत्व
पैरोल की प्रक्रिया के बारे में अधिवक्ता आशीष शुक्ला ने बताया कि हत्या के मामलों में सजा भुगत रहे अपराधियों को केवल विशेष परिस्थितियों में ही पैरोल मिलती है। इसमें परिवार का गंभीर बीमार होना या न्यायालय से आवेदन स्वीकार होना शामिल है। सुरेंद्र ने पैरोल प्राप्त किया और उसका लाभ उठाकर फरारी की योजना बनाई।
सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण
सुरेंद्र वर्मा की गिरफ्तारी ने समाज और कानून व्यवस्था के बीच के संबंध को उजागर किया। यह मामला दिखाता है कि अपराधी चाहे कितने सालों तक फरार रहे, लेकिन कानूनी प्रणाली और सतर्क पुलिस उन्हें पकड़ने में सक्षम है। इसके अलावा, यह घटना नागरिकों के लिए भी एक चेतावनी है कि अपराध कभी न कभी उजागर होता है।
