मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहर इंदौर में मेट्रो परियोजना अब एक नए तकनीकी दौर में प्रवेश करने जा रही है। यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और तेज़ सेवाओं को ध्यान में रखते हुए दिल्ली और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है। इस समझौते के तहत भोपाल और इंदौर मेट्रो में अत्याधुनिक ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लागू किया जाएगा।

यह प्रणाली मेट्रो यात्रा को पूरी तरह डिजिटल, संपर्क रहित और सुगम बनाएगी। अब यात्रियों को टिकट काउंटर पर लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। स्मार्ट कार्ड और क्यूआर कोड आधारित टिकटिंग से यात्रा आसान और तेज़ हो जाएगी।
ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम क्या है और क्यों है जरूरी
ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम एक डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसके माध्यम से यात्री बिना नकद लेनदेन के मेट्रो में प्रवेश और निकास कर सकते हैं। इस सिस्टम में स्मार्ट कार्ड, मोबाइल क्यूआर टिकट और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाता है।
देश के बड़े शहरों में यह प्रणाली पहले से ही सफल साबित हो चुकी है। यात्रियों के अनुभव में सुधार, समय की बचत और राजस्व प्रबंधन में पारदर्शिता इसके प्रमुख लाभ हैं। भोपाल और इंदौर जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में यह तकनीक मेट्रो को भविष्य के लिए तैयार करेगी।
दिल्ली और मध्य प्रदेश मेट्रो के बीच हुआ महत्वपूर्ण एमओयू
इस तकनीकी बदलाव को लागू करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के बीच औपचारिक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत दिल्ली मेट्रो अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और संचालन अनुभव साझा करेगी।
दिल्ली मेट्रो देश की सबसे सफल मेट्रो परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। उसकी विकसित की गई टिकटिंग और किराया संग्रह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है। भोपाल और इंदौर में उसी तर्ज पर सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को भरोसेमंद और सुरक्षित सेवा मिलेगी।
पहले क्यों अटका था एएफसी सिस्टम
भोपाल और इंदौर मेट्रो के लिए पहले ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम का टेंडर एक विदेशी कंपनी को दिया गया था। बाद में तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से यह समझौता रद्द कर दिया गया। इसके चलते परियोजना में देरी हुई और यात्रियों को अस्थायी व्यवस्थाओं से काम चलाना पड़ा।
अब दिल्ली मेट्रो के साथ एमओयू होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ होगा। इससे भविष्य में किसी तरह की तकनीकी अस्थिरता की आशंका भी कम होगी।
यात्रियों को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी
नए ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम के लागू होने के बाद भोपाल और इंदौर मेट्रो यात्रियों को स्मार्ट कार्ड की सुविधा मिलेगी, जिसे बार-बार रिचार्ज किया जा सकेगा। इसके अलावा मोबाइल से क्यूआर कोड आधारित टिकट भी जनरेट किया जा सकेगा।
यात्री स्टेशन पर लगे गेट्स से केवल कार्ड टैप या क्यूआर स्कैन करके मेट्रो में प्रवेश कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा।
टिकट काउंटर पर खत्म होंगी लंबी कतारें
अब तक मेट्रो स्टेशनों पर टिकट काउंटर पर यात्रियों की लंबी कतारें देखी जाती थीं, खासकर पीक ऑवर्स में। नए सिस्टम के लागू होने से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
डिजिटल टिकटिंग से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि कर्मचारियों पर भी दबाव कम होगा। स्टेशन परिसर अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित बन सकेगा।
राजस्व प्रबंधन होगा अधिक पारदर्शी
ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम का एक बड़ा लाभ यह है कि इससे राजस्व संग्रह पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो जाता है। हर लेनदेन का रिकॉर्ड स्वतः सिस्टम में सुरक्षित रहता है।
इससे न केवल मेट्रो प्रशासन को आर्थिक योजना बनाने में मदद मिलेगी बल्कि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना भी कम होगी।
तकनीकी सहयोग में दिल्ली मेट्रो की भूमिका
एमओयू के तहत दिल्ली मेट्रो केवल सिस्टम इंस्टॉलेशन तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि तकनीकी और परिचालन सहयोग भी देगी। सिस्टम के रखरखाव, सॉफ्टवेयर अपडेट और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में भी सहयोग किया जाएगा।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि भोपाल और इंदौर मेट्रो का टिकटिंग सिस्टम लंबे समय तक सुचारू रूप से चलता रहे।
मेट्रो का डिजिटल भविष्य
भोपाल और इंदौर मेट्रो में एएफसी सिस्टम केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह परियोजना भविष्य में अन्य स्मार्ट सिटी सेवाओं के साथ भी एकीकृत की जा सकती है।
सार्वजनिक परिवहन में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देकर यह सिस्टम शहरी जीवन को अधिक सहज और आधुनिक बनाएगा।
