मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर लाखों यात्रियों के लिए नया साल राहत नहीं, बल्कि अतिरिक्त खर्च की सौगात लेकर आ सकता है। राज्य में अप्रैल 2026 से यात्री बसों के किराये में बढ़ोतरी की तैयारी शुरू हो चुकी है। बस संचालकों ने परिवहन विभाग के सामने अपनी मांग रख दी है और सरकार भी इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो रोजमर्रा के सफर से लेकर लंबी दूरी की यात्राएं तक महंगी हो जाएंगी।

राज्य में बसें न केवल शहरों को जोड़ती हैं, बल्कि ग्रामीण इलाकों के लिए भी जीवनरेखा मानी जाती हैं। ऐसे में किराया बढ़ने का सीधा असर आम आदमी, मजदूर वर्ग, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों की जेब पर पड़ना तय है।
बस संचालकों की दलील: खर्च बढ़ा, किराया वहीं का वहीं
बस ऑपरेटरों का कहना है कि वर्ष 2021 के बाद से बस किराये में कोई संशोधन नहीं किया गया है। उस समय कोरोना संक्रमण के बाद परिवहन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए किराये में मामूली बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन उसके बाद से हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। डीजल के दाम, स्पेयर पार्ट्स की कीमतें, टायर, बीमा, परमिट शुल्क और कर्मचारियों का वेतन सभी में भारी इजाफा हुआ है।
संचालकों के अनुसार पिछले चार वर्षों में बस संचालन की कुल लागत लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। ऐसे में मौजूदा किराये पर बस चलाना घाटे का सौदा बनता जा रहा है। उनका तर्क है कि यदि किराये में समय रहते संशोधन नहीं किया गया, तो कई रूटों पर बस सेवाएं बंद होने की नौबत आ सकती है।
दो रुपये प्रति किलोमीटर की मांग क्यों
बस संचालक संघ की ओर से सामान्य बसों का किराया दो रुपये प्रति किलोमीटर किए जाने की मांग की जा रही है। वर्तमान में अलग-अलग श्रेणी की बसों में किराये की दरें अलग हैं, लेकिन सामान्य बसों के लिए यह दर इससे कम है। संचालकों का कहना है कि दो रुपये प्रति किलोमीटर की दर भी पूरी तरह लाभकारी नहीं है, लेकिन इससे कम से कम संचालन खर्च की भरपाई हो सकेगी।
उनका यह भी कहना है कि पड़ोसी राज्यों में पहले ही बस किराया अधिक है, जबकि मध्य प्रदेश में दरें अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में यहां के बस ऑपरेटर प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं।
परिवहन विभाग का रुख: आंकड़ों के आधार पर फैसला
परिवहन विभाग इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाने की बात कर रहा है। विभाग का कहना है कि किराया बढ़ोतरी का फैसला मनमाने तरीके से नहीं किया जाएगा। इसके लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, ईंधन मूल्य सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक जैसे आर्थिक संकेतकों का अध्ययन किया जाएगा।
इन सभी आंकड़ों के विश्लेषण के बाद किराये में तार्किक वृद्धि तय की जाएगी। शुरुआती संकेतों के अनुसार किराया 1.50 रुपये से 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर के बीच तय हो सकता है। यह दर बस संचालकों की मांग से कम है, लेकिन सरकार यात्रियों पर अत्यधिक बोझ नहीं डालना चाहती।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से पहले फैसला संभव
सरकार की योजना है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होने से पहले ही किराये को लेकर अंतिम निर्णय ले लिया जाए। यह नई सेवा राज्य में सार्वजनिक परिवहन को अधिक व्यवस्थित, सुलभ और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लाई जा रही है। ऐसे में किराया संरचना का स्पष्ट होना जरूरी माना जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि नई सेवा शुरू होने के बाद किराये में बदलाव किया गया, तो यात्रियों में भ्रम और असंतोष बढ़ सकता है। इसलिए अप्रैल से पहले ही इस पर मुहर लग सकती है।
यात्रियों की चिंता: महंगाई में एक और मार
बस किराये में संभावित बढ़ोतरी को लेकर यात्रियों में चिंता साफ दिखाई दे रही है। पहले ही महंगाई से जूझ रहे आम लोगों के लिए रोज का सफर महंगा होना बड़ी समस्या बन सकता है। खासतौर पर वे लोग जो रोज बस से दफ्तर, स्कूल या कॉलेज जाते हैं, उनके मासिक बजट पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में काम करने आने वाले मजदूरों के लिए भी यह बढ़ोतरी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। कई यात्रियों का कहना है कि यदि किराया बढ़ाया जाता है, तो बसों की सुविधाओं और समयबद्धता में भी सुधार होना चाहिए।
बस सेवाओं की अहमियत और भविष्य की चुनौती
मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बस सेवाएं परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं। रेल नेटवर्क हर जगह उपलब्ध नहीं है और निजी वाहन हर किसी के पास नहीं होते। ऐसे में बसें ही लोगों की आवाजाही का मुख्य जरिया हैं।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि बस संचालकों की आर्थिक परेशानियों को भी समझा जाए और यात्रियों पर बोझ भी सीमित रखा जाए। यदि संतुलन नहीं बना, तो या तो बस सेवाएं प्रभावित होंगी या फिर यात्रियों को महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
निष्कर्ष: फैसला सबके लिए अहम
बस किराये में बढ़ोतरी का फैसला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव भी रखता है। यह तय करेगा कि आम आदमी का सफर कितना सस्ता या महंगा होगा और सार्वजनिक परिवहन कितना सुलभ रहेगा। आने वाले महीनों में सरकार का फैसला मध्य प्रदेश के यात्रियों की जेब और बस उद्योग दोनों की दिशा तय करेगा।
