अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार ऐसे क्षण आते हैं जो कूटनीतिक समीकरणों को झकझोर देते हैं। हाल ही में अमेरिका में हुआ एक घटनाक्रम इसी श्रेणी में आता है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की मौजूदगी में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन की खुलकर प्रशंसा कर दी। यह वही अर्दोआन हैं, जिन पर नेतन्याहू अक्सर तीखे हमले करते रहे हैं और जिनके साथ इसराइल के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं।

फ्लोरिडा में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह दृश्य उस समय और भी चौंकाने वाला हो गया, जब नेतन्याहू सीरिया से जुड़े मुद्दों पर बोल रहे थे और ट्रंप ने उन्हें बीच में रोकते हुए अर्दोआन की भूमिका को सराहना शुरू कर दी। इस एक पल ने यह साफ कर दिया कि अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति में प्राथमिकताएं बदलती दिख रही हैं या कम से कम संतुलन साधने की कोशिश हो रही है।
नेतन्याहू और अर्दोआन, टकराव का लंबा इतिहास
तुर्की और इसराइल के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन इसराइल की नीतियों, खासकर फिलिस्तीन और गज़ा को लेकर, लगातार आलोचना करते आए हैं। वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी अर्दोआन को जवाब देने में कभी पीछे नहीं रहे।
दिसंबर में हुए ग्रीस, साइप्रस और इसराइल के त्रिपक्षीय सम्मेलन में नेतन्याहू ने तुर्की को खुली चेतावनी दी थी कि वह ऑटोमन साम्राज्य के दौर की महत्वाकांक्षाओं को भूल जाए। उनका यह बयान सीधे तौर पर अर्दोआन की क्षेत्रीय नीतियों पर हमला माना गया था। अर्दोआन को लेकर यह धारणा भी रही है कि वह तुर्की को एक बार फिर उस प्रभावशाली स्थिति में ले जाना चाहते हैं, जो कभी ऑटोमन साम्राज्य के दौर में थी।
ट्रंप का अप्रत्याशित रुख और नेतन्याहू की चुप्पी
ऐसे माहौल में जब नेतन्याहू अमेरिका दौरे पर थे, ट्रंप का रुख इसराइल के लिए अप्रत्याशित साबित हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने अर्दोआन को अपना अच्छा दोस्त बताया और कहा कि उन्हें भरोसा है कि नेतन्याहू और अर्दोआन के बीच कोई बड़ी समस्या नहीं होगी।
ट्रंप ने सीरिया में कथित शांति प्रयासों के लिए अर्दोआन की भूमिका की सराहना की और यहां तक कह दिया कि सीरिया में बशर असद को सत्ता से हटाने में सबसे अहम भूमिका तुर्की के राष्ट्रपति की रही है। यह बयान इसराइल के लिए खासा असहज करने वाला था, क्योंकि इसराइल लंबे समय से सीरिया को लेकर अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर सतर्क रहा है।
एफ-35 फाइटर जेट और इसराइल की चिंता
ट्रंप का बयान यहीं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका तुर्की को एफ-35 फाइटर जेट देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह टिप्पणी इसराइल के लिए और ज्यादा चिंता का कारण बन गई।
इसराइल ने अतीत में तुर्की और अन्य पड़ोसी देशों को अत्याधुनिक लड़ाकू विमान दिए जाने पर आपत्ति जताई थी। इसराइल नहीं चाहता कि उसके आसपास कोई ऐसा देश सैन्य रूप से बढ़त हासिल करे, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हो।
2019 में अमेरिका ने तुर्की को एफ-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया था। इसकी वजह यह थी कि तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने का फैसला किया था। अमेरिका को यह डर था कि इससे नाटो की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका-तुर्की संबंधों में नई गर्माहट
हाल के महीनों में अमेरिका और तुर्की के संबंधों में फिर से गर्माहट देखने को मिल रही है। तुर्की में अमेरिका के राजदूत और सीरिया के लिए विशेष दूत टॉम बराक ने संकेत दिए थे कि दोनों देश एफ-35 कार्यक्रम को लेकर लगातार बातचीत कर रहे हैं और आने वाले समय में कोई सकारात्मक नतीजा निकल सकता है।
बराक के अनुसार, ट्रंप और अर्दोआन के बीच व्यक्तिगत संबंधों ने सहयोग के लिए एक नया माहौल तैयार किया है। यही वजह है कि लंबे समय से अटकी सैन्य डील पर फिर से विचार किया जा रहा है।
सीरिया, गज़ा और क्षेत्रीय राजनीति
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी कहा कि सीरिया को लेकर उनकी और नेतन्याहू के बीच एक समझ है। उन्होंने भरोसा जताया कि इसराइल और सीरिया के नए नेतृत्व के बीच तालमेल बन सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब असद शासन के पतन के बाद इसराइल ने गोलान हाइट्स में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है।
इसके अलावा ट्रंप ने गज़ा में संघर्षविराम को लेकर भी तुर्की की संभावित भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अर्दोआन के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और यदि तुर्की इस दिशा में कोई सकारात्मक भूमिका निभाता है तो यह स्वागतयोग्य होगा।
ट्रंप और अर्दोआन की पुरानी दोस्ती
ट्रंप और अर्दोआन के रिश्ते नए नहीं हैं। 2012 में इस्तांबुल में ट्रंप टावर के उद्घाटन के दौरान ट्रंप ने अर्दोआन की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने अर्दोआन को एक मजबूत नेता बताया था, जो तुर्की के लोगों का प्रभावी प्रतिनिधित्व करते हैं।
हाल ही में अर्दोआन का व्हाइट हाउस दौरा और ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर दिए गए बयान इस बात की ओर इशारा करते हैं कि दोनों नेता सैन्य और कारोबारी समझौतों को लेकर गंभीर हैं। इसमें बोइंग विमान, एफ-16 और संभावित रूप से एफ-35 डील भी शामिल है।
रणनीतिक रूप से अहम तुर्की
तुर्की की भौगोलिक स्थिति उसे वैश्विक राजनीति में बेहद अहम बनाती है। यह देश यूरोप, एशिया और मध्य-पूर्व के बीच एक रणनीतिक सेतु की तरह है। ब्लैक सी तक पहुंच को नियंत्रित करने वाला तुर्की नाटो का भी एक अहम सहयोगी है।
यही कारण है कि अमेरिका तुर्की को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकता, चाहे इसराइल जैसी करीबी साझेदारी क्यों न हो। ट्रंप का बयान इसी संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
यही कारण है कि अमेरिका तुर्की को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकता, चाहे इसराइल जैसी करीबी साझेदारी क्यों न हो। ट्रंप का बयान इसी संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
