इस्लाम को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। इस्लामिक शरीयत में शराब को “हराम” यानी पूर्णतः निषिद्ध बताया गया है। क़ुरान में कहा गया है कि शराब इंसान की समझ को नष्ट कर देती है और यह इंसान को सही-गलत की पहचान से दूर कर देती है। इसलिए, अधिकतर मुस्लिम देशों में शराब का सेवन, बिक्री या उत्पादन क़ानूनी तौर पर वर्जित है। लेकिन विडंबना देखिए — इन्हीं देशों में कुछ जगहों पर शराब की फैक्ट्रियाँ खुली हुई हैं, जो बीयर, वाइन और व्हिस्की जैसी पेय बना रही हैं। कुछ सरकारें इसे “औद्योगिक”, “फार्मास्यूटिकल” या “निर्यात योग्य उत्पाद” बताकर अनुमति देती हैं। यह स्थिति एक दिलचस्प विरोधाभास पैदा करती है — जहां धर्म और आधुनिकता, परंपरा और अर्थव्यवस्था आमने-सामने खड़े हैं।

1. सऊदी अरब: हराम पर सख्ती, पर उद्योगिक जरूरतों के लिए अपवाद
सऊदी अरब इस्लामी कानून (शरीयत) के सबसे सख्त पालन करने वाले देशों में से एक है। यहाँ शराब पीना, बेचना या रखना अपराध है और इसके लिए जेल से लेकर कोड़े तक की सजा दी जाती है। लेकिन इसके बावजूद, औद्योगिक उपयोग के लिए यहां सरकारी नियंत्रण वाली डिस्टिलरी यूनिट्स मौजूद हैं। ये फैक्ट्रियाँ मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल कंपनियों और प्रयोगशालाओं को शराब (ethanol) सप्लाई करती हैं।
रियाद, दम्माम और जेद्दा के औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी इकाइयाँ हैं, जिन्हें आम जनता नहीं देख सकती। इसके अलावा, विदेशी दूतावासों और राजनयिकों को सीमित मात्रा में शराब आयात की छूट है। इससे साफ झलकता है कि जब धार्मिक नियम और व्यावहारिक जरूरत टकराते हैं, तो सऊदी भी समाधान निकाल लेता है।
2. संयुक्त अरब अमीरात (UAE): परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
UAE ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जहाँ इस्लामी मूल्यों और आधुनिक पर्यटन के बीच संतुलन कायम है। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में लाइसेंसशुदा शराब फैक्ट्रियाँ मौजूद हैं। यहाँ की African + Eastern और Dubai Refreshments Company जैसी कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय मानकों की बीयर, वाइन और स्पिरिट्स बनाती हैं। इन फैक्ट्रियों का संचालन पूरी तरह सरकार की निगरानी में होता है।
हालांकि, मुसलमानों के लिए शराब पीना अब भी प्रतिबंधित है, लेकिन गैर-मुस्लिम पर्यटकों और प्रवासियों को इसकी अनुमति है। UAE में शराब उत्पादन सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि पर्यटन उद्योग का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। 2023 में दुबई ने शराब पर लगने वाला टैक्स भी हटा दिया, ताकि विदेशी पर्यटक अधिक आकर्षित हों।
3. इंडोनेशिया: सबसे बड़ा मुस्लिम देश, पर शराब के लिए लचीला दृष्टिकोण
दुनिया में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश — इंडोनेशिया, शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाता। यहाँ के बाली, जकार्ता और सुमात्रा जैसे क्षेत्र खुले विचारों वाले हैं, जहाँ शराब उत्पादन और बिक्री कानूनी है। यहाँ की मशहूर ब्रुअरी Bintang Beer और Anker Beer स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय हैं।
सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शराब उद्योग को नियंत्रित छूट दी है। हालाँकि रमज़ान या धार्मिक अवसरों पर इसके विज्ञापन और बिक्री पर रोक लगाई जाती है। इंडोनेशिया इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक पहचान और व्यावहारिक अर्थव्यवस्था साथ-साथ चल सकती हैं।
4. पाकिस्तान: हराम, पर अल्पसंख्यकों के लिए अपवाद
पाकिस्तान में शराब पर प्रतिबंध 1977 में ज़िया-उल-हक के शासनकाल में लगाया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यहाँ की सबसे पुरानी शराब कंपनी — Murree Brewery अब भी सक्रिय है। 1860 में ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई यह कंपनी बीयर, रम, जिन और व्हिस्की बनाती है। यह फैक्ट्री रावलपिंडी में स्थित है और पाकिस्तान के संविधान के अनुसार इसे गैर-मुस्लिम नागरिकों को शराब बेचने की अनुमति है। सरकार इसे “अल्पसंख्यकों का सांस्कृतिक अधिकार” मानती है। Murree Brewery अब निर्यात भी करती है — खासकर यूरोप और अफ्रीका में। यह स्थिति पाकिस्तान में धर्म और अल्पसंख्यक अधिकारों के बीच चल रहे द्वंद्व को उजागर करती है।
5. तुर्की: सेक्युलर संविधान और खुले शराब बाजार
तुर्की एक मुस्लिम-बहुल देश है, लेकिन उसका संविधान धर्मनिरपेक्ष है। यहाँ शराब बनाना, बेचना और पीना पूरी तरह कानूनी है। तुर्की की प्रसिद्ध कंपनी Efes Pilsen Brewery यूरोप की सबसे बड़ी बीयर कंपनियों में से एक है। हालाँकि, एर्दोगन सरकार ने धार्मिक भावनाओं के चलते विज्ञापनों और टैक्स पर सख्ती की है। फिर भी, इस्तांबुल और अंकारा जैसे शहरों में हज़ारों बार और फैक्ट्रियाँ सक्रिय हैं। तुर्की इस बात का प्रमाण है कि इस्लामी देश भी धर्मनिरपेक्ष नीति अपनाकर अपने उद्योगों को बढ़ा सकते हैं।
6. ईरान: निषेध के बावजूद भूमिगत शराब संस्कृति
ईरान में शरीयत कानून के तहत शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन प्रतिबंध के बावजूद यहाँ अंडरग्राउंड शराब फैक्ट्रियाँ और घर-घर में डिस्टिलिंग यूनिट्स मौजूद हैं। तेहरान और इस्फहान जैसे शहरों में लोग घरेलू स्तर पर वाइन और वोडका बनाते हैं।
यहां रहने वाले आर्मेनियन और अस्सीरियन ईसाई समुदायों को धार्मिक उपयोग के लिए सीमित उत्पादन की अनुमति है। ईरान में हर साल हजारों लीटर अवैध शराब जब्त होती है, लेकिन मांग कम नहीं होती। यह एक ऐसा देश है जहाँ “प्रतिबंध” और “आवश्यकता” के बीच संघर्ष खुलकर दिखाई देता है।
7. मोरक्को और ट्यूनीशिया: पर्यटन की वजह से खुला दृष्टिकोण
उत्तर अफ्रीका के दो मुस्लिम देश — मोरक्को और ट्यूनीशिया, शराब के मामले में काफी उदार हैं। यहाँ Les Celliers de Meknès (मोरक्को) और Celtia Brewery (ट्यूनीशिया) जैसी कंपनियाँ कानूनी रूप से शराब बनाती हैं। इन देशों में शराब मुख्य रूप से पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराई जाती है। सरकारें इसे विदेशी मुद्रा कमाने का साधन मानती हैं। यहाँ रमज़ान के दौरान शराब की बिक्री सीमित होती है, पर पूरी तरह बंद नहीं| ट्यूनीशिया की अर्थव्यवस्था में शराब उद्योग का योगदान लगभग 2% GDP है।
8. मलेशिया, मिस्र और कज़ाखस्तान: धर्म और बाज़ार का संतुलन
मलेशिया में मुस्लिमों के लिए शराब पर प्रतिबंध है, लेकिन गैर-मुस्लिमों को इसकी अनुमति है। Carlsberg Malaysia Brewery यहाँ की सबसे बड़ी शराब कंपनी है। मिस्र में शराब बाजार सरकार के नियंत्रण में है और काहिरा में Al Ahram Beverages जैसी बड़ी कंपनियाँ काम करती हैं। कज़ाखस्तान, जो पहले सोवियत संघ का हिस्सा था, वहाँ मुस्लिम और यूरोपीय संस्कृतियों का मिला-जुला प्रभाव है, इसलिए वहाँ शराब उद्योग पूरी तरह खुला है। इन देशों ने साबित किया कि संस्कृति और धर्म के साथ व्यावहारिक नीति अपनाई जा सकती है।
निष्कर्ष: जब धर्म और विकास टकराते हैं
मुस्लिम देशों में शराब पर प्रतिबंध का आधार धार्मिक है, लेकिन आर्थिक वास्तविकताएँ इससे कहीं अधिक जटिल हैं।
जहाँ एक तरफ शरीयत शराब को पाप बताती है, वहीं दूसरी ओर पर्यटन, फार्मा और निर्यात उद्योग इसे राजस्व का साधन मानते हैं।
इसी वजह से अधिकतर देशों ने शराब के उत्पादन को “औद्योगिक उपयोग” या “गैर-मुस्लिमों के उपभोग” के नाम पर अनुमति दी है।
आख़िरकार, इस्लामी दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों की अपनी-अपनी जगह है।
शराब अब केवल “हराम” नहीं रही — वह एक नीति का औजार भी बन चुकी है।
