पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यमन पहले से ही वर्षों से युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय संकट का दंश झेल रहा है, लेकिन अब हालात और भी ज्यादा विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं। इस बार तनाव का केंद्र यमन में सक्रिय अलगाववादी संगठन, क्षेत्रीय शक्तियों के आपसी मतभेद और सीधे सैन्य टकराव की धमकियां हैं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, जो लंबे समय तक यमन संकट में सहयोगी रहे, अब आमने-सामने आते दिख रहे हैं।

हालिया घटनाक्रम में सऊदी अरब ने यूएई को यमन से अपनी सेना हटाने के लिए केवल 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी साफ है कि यदि यह मांग पूरी नहीं हुई तो सऊदी अरब सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सऊदी वायुसेना पहले ही यमन के एक महत्वपूर्ण बंदरगाह पर बमबारी कर चुकी है।
सऊदी अरब की खुली चेतावनी और राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। बयान में कहा गया कि सऊदी अरब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और यदि उसे खतरा महसूस हुआ तो वह निर्णायक कदम उठाने से नहीं हिचकेगा।
सऊदी अरब का आरोप है कि यमन में सक्रिय सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल, जिसे एसटीसी कहा जाता है, को संयुक्त अरब अमीरात का खुला समर्थन प्राप्त है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार एसटीसी की सैन्य गतिविधियां और उसका आगे बढ़ना सीधे तौर पर यूएई की रणनीति का हिस्सा है, जो यमन को और अधिक अस्थिर कर रही है।
मुकाला पोर्ट पर हवाई हमला और उसके मायने
इस पूरे विवाद की जड़ उस समय और गहरी हो गई, जब सऊदी अरब की वायुसेना ने यमन के मुकाला बंदरगाह पर हवाई हमला किया। सऊदी अरब का दावा है कि इस बंदरगाह के जरिए यूएई ने एसटीसी के लिए हथियारों की खेप भेजी थी।
मुकाला पोर्ट यमन का एक रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह माना जाता है। यहां हमला न केवल सैन्य संदेश था, बल्कि यह भी दिखाने की कोशिश थी कि सऊदी अरब अब परोक्ष चेतावनियों से आगे बढ़कर सीधे कार्रवाई के लिए तैयार है। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि यह एक सीमित सैन्य अभियान था, लेकिन इसका संदेश बेहद कड़ा था।
यमन की राष्ट्रपति परिषद और यूएई के लिए आदेश
इस घटनाक्रम के बीच यमन की सऊदी-समर्थित राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख रशद अल अलीमी का बयान भी सामने आया। उन्होंने टीवी पर दिए गए संबोधन में कहा कि यूएई के सभी सैनिकों को अगले 24 घंटे के भीतर यमन की धरती छोड़ देनी चाहिए।
रशद अल अलीमी ने अपने भाषण में सऊदी अरब और गठबंधन सेनाओं की भूमिका की सराहना की और यह भी स्पष्ट किया कि यमन की संप्रभुता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने यूएई के साथ पहले से चली आ रही रक्षा डील को भी रद्द करने की घोषणा की, जिससे यह संकेत मिला कि यमन की अंतरिम सत्ता अब यूएई के प्रति सख्त रुख अपना रही है।
आपातकाल और सीमाओं का बंद होना
सऊदी अरब द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद यमन में हूती-विरोधी बलों ने आपातकाल की घोषणा कर दी। इन बलों ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सभी सीमा चौकियों को 72 घंटे के लिए बंद करने का निर्णय लिया।
इसके साथ ही हवाई अड्डों और बंदरगाहों में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। केवल उन्हीं लोगों को आने-जाने की अनुमति दी गई है, जिन्हें सऊदी अरब की ओर से विशेष मंजूरी प्राप्त है। यह कदम इस बात का संकेत है कि यमन में हालात तेजी से सैन्य नियंत्रण की ओर बढ़ रहे हैं।
एसटीसी, यूएई और दक्षिणी यमन का समीकरण
सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल दक्षिणी यमन में सक्रिय एक अलगाववादी संगठन है, जो लंबे समय से एक स्वतंत्र दक्षिणी यमन की मांग करता रहा है। इस संगठन को संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन प्राप्त बताया जाता है, जबकि सऊदी अरब यमन की एकता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के पक्ष में रहा है।
यही मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। सऊदी अरब का मानना है कि यूएई एसटीसी के जरिए यमन में अपने रणनीतिक हित साधना चाहता है, जिससे देश का विभाजन और गहराता जा रहा है।
पहले से चल रहा तनाव और ताजा आरोप
इससे पहले दक्षिणी यमन के अलगाववादियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने उनकी सेनाओं पर हवाई हमले किए हैं। यह आरोप ऐसे समय में सामने आया, जब सऊदी अरब ने हाल ही में कुछ प्रांतों से अपनी सेनाएं हटाने की चेतावनी दी थी।
एसटीसी का कहना है कि ये हमले यमन के हद्रामौत क्षेत्र में हुए। हालांकि सऊदी अरब ने इन आरोपों की तत्काल पुष्टि नहीं की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और गहराता चला गया।
हद्रामौत में झड़पें और हताहत
हद्रामौत क्षेत्र में हुई झड़पों ने हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। एसटीसी के विदेश मामलों के विशेष प्रतिनिधि अम्र अल बिध ने बताया कि उनके लड़ाके पूर्वी हद्रामौत में सक्रिय थे, जहां उन पर घात लगाकर हमले किए गए।
इन हमलों में एसटीसी के दो लड़ाके मारे गए, जबकि 12 अन्य घायल हो गए। हालांकि इन घटनाओं में शामिल पक्षों को लेकर स्पष्टता नहीं है, लेकिन इससे यह साफ हो गया कि यमन में हिंसा एक बार फिर तेज हो रही है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन पर मंडराता संकट
इन घटनाओं ने उस सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जो पिछले लगभग एक दशक से यमन के उत्तरी हिस्से में ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहा है।
यदि सऊदी अरब और यूएई के बीच यह टकराव खुली जंग में बदलता है, तो इससे न केवल यमन बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
