भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में जो बदलाव पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला है, वह केवल परिवहन का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह देश की औद्योगिक और तकनीकी सोच में आए बड़े बदलाव का संकेत है। इसी बदलाव के केंद्र में अब एक नई तकनीक सामने आई है, जिसे “4680 भारत सेल” नाम दिया गया है। यह बैटरी तकनीक न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की क्षमता को नया आयाम देने वाली है, बल्कि भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है।

भारत सेल क्या है और इसका नाम क्यों खास है
4680 भारत सेल एक उन्नत लिथियम-आयन बैटरी सेल है, जिसे विशेष रूप से आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसका नाम इसके भौतिक आकार से जुड़ा है। इस बैटरी सेल का डायमीटर 46 मिलीमीटर और ऊंचाई 80 मिलीमीटर है, इसलिए इसे तकनीकी भाषा में 4680 सेल कहा जाता है। “भारत सेल” नामकरण इस बात का प्रतीक है कि यह तकनीक भारत में विकसित, भारत में निर्मित और भारत की जरूरतों के अनुरूप है।
यह सेल पारंपरिक रूप से उपयोग होने वाले 2170 बैटरी सेल्स की तुलना में अधिक ऊर्जा घनत्व, बेहतर चार्जिंग क्षमता और लंबी लाइफ देने में सक्षम माना जा रहा है। इसका सीधा असर इलेक्ट्रिक स्कूटरों और अन्य ईवी की रेंज, परफॉर्मेंस और विश्वसनीयता पर पड़ता है।
2170 से 4680 तक का तकनीकी सफर
अब तक भारत में अधिकांश इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों में 2170 फॉर्मेट की बैटरियों का उपयोग किया जाता रहा है। ये बैटरियां आकार में छोटी होती हैं और इन्हें बड़ी संख्या में जोड़कर एक बैटरी पैक तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में न केवल अधिक जगह लगती है, बल्कि कूलिंग, वायरिंग और मेंटेनेंस से जुड़ी जटिलताएं भी बढ़ जाती हैं।
4680 भारत सेल इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। बड़े आकार के कारण एक ही सेल में अधिक ऊर्जा संग्रहित की जा सकती है। इससे बैटरी पैक में सेल्स की संख्या कम होती है, जो निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाती है और लागत को भी नियंत्रित करने में मदद करती है। यही वजह है कि इस तकनीक को अगली पीढ़ी की बैटरी तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।
ऊर्जा भंडारण और चार्जिंग में बड़ा सुधार
4680 भारत सेल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ऊर्जा भंडारण क्षमता है। यह बैटरी अधिक ऊर्जा को सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकती है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की रेंज बढ़ती है। इसका मतलब है कि एक बार चार्ज करने पर वाहन ज्यादा दूरी तय कर सकता है, जो भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण पहलू है।
इसके साथ ही चार्जिंग स्पीड में भी सुधार देखा जा रहा है। उन्नत डिजाइन और आधुनिक ड्राई इलेक्ट्रोड तकनीक के कारण यह सेल तेजी से चार्ज हो सकता है और लंबे समय तक अपनी क्षमता बनाए रखता है। इससे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव कम होगा और ईवी अपनाने में लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
70 से अधिक पेटेंट और स्वदेशी इनोवेशन
4680 भारत सेल केवल एक बैटरी नहीं है, बल्कि यह वर्षों की रिसर्च और इनोवेशन का परिणाम है। इस तकनीक को 70 से अधिक पेटेंट्स का संरक्षण प्राप्त है, जो इसे तकनीकी रूप से मजबूत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाता है। इन पेटेंट्स के जरिए बैटरी की डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस, सुरक्षा मानक और परफॉर्मेंस से जुड़े कई अहम पहलुओं को सुरक्षित किया गया है।
यह स्वदेशी इनोवेशन भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक बैटरी टेक्नोलॉजी के मामले में देश को काफी हद तक विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। भारत सेल इस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत की ऊर्जा क्रांति में संभावित भूमिका
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि 4680 भारत सेल भारत की ऊर्जा क्रांति में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए केवल वाहन बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत बैटरी सप्लाई चेन और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम भी जरूरी है। भारत सेल इसी इकोसिस्टम की नींव रखने का काम कर सकता है।
इस तकनीक के जरिए न केवल इलेक्ट्रिक स्कूटरों बल्कि भविष्य में इलेक्ट्रिक कारों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और ग्रिड-लेवल बैटरियों में भी सुधार संभव है। इसका असर रोजगार, निवेश और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी पड़ेगा।
मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और गीगाफैक्ट्री का विस्तार
भारत सेल के मैन्युफैक्चरिंग को लेकर कंपनी की योजनाएं काफी महत्वाकांक्षी हैं। चरणबद्ध तरीके से 2024 तक 5 गीगावाट-आवर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद 2026 तक इसे बढ़ाकर 20 गीगावाट-आवर करने की योजना है। दीर्घकालिक लक्ष्य 2030 तक 100 गीगावाट-आवर उत्पादन क्षमता तक पहुंचना है।
यह विस्तार न केवल भारत को बैटरी निर्माण के वैश्विक नक्शे पर मजबूत करेगा, बल्कि देश को एक प्रमुख एक्सपोर्ट हब बनने की दिशा में भी ले जाएगा। गीगाफैक्ट्री मॉडल से बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव होगा, जिससे लागत कम होगी और तकनीक अधिक सुलभ बनेगी।
बीआईएस प्रमाणन और सुरक्षा मानक
4680 भारत सेल को भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस से प्रमाणन प्राप्त होना इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत करता है। यह प्रमाणन दर्शाता है कि बैटरी सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रदर्शन के भारतीय मानकों पर खरी उतरती है।
इस प्रमाणन के बाद गीगाफैक्ट्री में परीक्षण और उत्पादन को और तेज किया जा रहा है। अगले छह से नौ महीनों में बड़े पैमाने पर टेस्टिंग पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद इन बैटरियों को इलेक्ट्रिक वाहनों में शामिल किया जाएगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग की समयरेखा
योजनाओं के अनुसार, 4680 भारत सेल को अप्रैल 2025 से इलेक्ट्रिक स्कूटरों में शामिल किया जाना है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को बेहतर रेंज, अधिक सुरक्षा और उन्नत परफॉर्मेंस वाले वाहन देखने को मिलेंगे।
यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं होगा, बल्कि उपभोक्ता अनुभव को भी पूरी तरह से बदल सकता है। लंबी दूरी, कम चार्जिंग चिंता और बेहतर विश्वसनीयता ईवी अपनाने की रफ्तार को तेज कर सकती है।
तकनीक चोरी के आरोप और विवाद
जब कोई स्वदेशी तकनीक तेजी से आगे बढ़ती है, तो विवाद भी सामने आते हैं। 4680 भारत सेल को लेकर भी ऐसे ही आरोप सामने आए, जिनमें कहा गया कि इस तकनीक का आइडिया दक्षिण कोरिया की एक बैटरी कंपनी से जुड़ा हो सकता है। इन आरोपों के चलते शेयर बाजार में भी हलचल देखी गई।
हालांकि कंपनी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भारत सेल पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। बयान में कहा गया कि जिस पाउच सेल तकनीक की बात की जा रही है, वह पुरानी है और इस प्रोजेक्ट से उसका कोई संबंध नहीं है।
ड्राई इलेक्ट्रोड तकनीक और तकनीकी श्रेष्ठता
4680 भारत सेल की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी ड्राई इलेक्ट्रोड तकनीक है। यह तकनीक पारंपरिक वेट इलेक्ट्रोड प्रोसेस की तुलना में अधिक उन्नत मानी जाती है। इसमें कम केमिकल वेस्ट होता है, ऊर्जा दक्षता बेहतर होती है और उत्पादन प्रक्रिया भी अधिक पर्यावरण-अनुकूल होती है।
यही वजह है कि कंपनी का दावा है कि 4680 भारत सेल बेलनाकार बैटरियों में सबसे उन्नत तकनीकों में से एक है और यह वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले मजबूती से खड़ी है।
बाजार में प्रभाव और शेयरों की हलचल
4680 भारत सेल से जुड़ी खबरों का असर शेयर बाजार पर भी पड़ा। आरोपों और सफाई के बीच शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा गया। एक समय शेयरों में गिरावट आई, लेकिन बाद में स्वदेशी तकनीक के समर्थन और उत्पादन विस्तार की खबरों से निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत हुआ।
विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि में यह तकनीक कंपनी के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है, क्योंकि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग ईवी उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम
4680 भारत सेल केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की सोच का प्रतीक है। बैटरी टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि भविष्य की ऊर्जा जरूरतें इसी क्षेत्र से जुड़ी होंगी।
इस तकनीक के जरिए भारत न केवल अपनी घरेलू मांग पूरी कर सकता है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकता है। इससे देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी क्षमता को नया बल मिलेगा।
निष्कर्ष
4680 भारत सेल भारत की ऊर्जा यात्रा में एक ऐसा पड़ाव है, जो आने वाले वर्षों में कई बदलावों की नींव रख सकता है। उन्नत तकनीक, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग, बीआईएस प्रमाणन और बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजनाएं इसे एक मजबूत और भरोसेमंद समाधान बनाती हैं। अगर यह तकनीक अपेक्षाओं पर खरी उतरती है, तो यह न केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बल्कि पूरे ऊर्जा इकोसिस्टम को नई दिशा दे सकती है।
