साल 2026 की शुरुआत मध्यप्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के लिए अहम साबित होने जा रही है। राज्य सरकार ने नए वर्ष के पहले ही दिन से बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी कर ली है। लंबे समय से चर्चा में रहे प्रमुख सचिव पद पर बदलाव को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसके साथ ही कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं, जबकि विवादों और जांच के चलते कुछ अधिकारियों की पदोन्नति फिलहाल रोक दी गई है। यह पूरा घटनाक्रम न केवल प्रशासनिक संतुलन बल्कि शासन की पारदर्शिता और अनुशासन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एम. सेलवेंद्रन को सौंपी जाएगी प्रदेश की प्रशासनिक कमान
राज्य सरकार ने 2002 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम. सेलवेंद्रन को मध्यप्रदेश का नया प्रमुख सचिव नियुक्त करने का फैसला किया है। यह नियुक्ति एक जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। एम. सेलवेंद्रन अब प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर कार्यभार संभालेंगे और शासन की नीतियों को लागू करने में उनकी भूमिका निर्णायक होगी। उन्हें प्रशासनिक अनुभव और विभिन्न विभागों में काम करने की लंबी पृष्ठभूमि के कारण यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रमुख सचिव का पद राज्य प्रशासन की रीढ़ माना जाता है। इस पद पर बैठा अधिकारी मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के निर्णयों को अमल में लाने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और प्रशासनिक मशीनरी को सुचारु रूप से चलाने की अहम जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे में एम. सेलवेंद्रन की नियुक्ति को सरकार की रणनीतिक और अनुभव आधारित पसंद के रूप में देखा जा रहा है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयार किए आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुमोदन के बाद पदोन्नति और नियुक्ति से जुड़े आदेशों का मसौदा तैयार कर लिया है। सूत्रों के अनुसार, नए साल के पहले दिन यह आदेश औपचारिक रूप से जारी कर दिए जाएंगे। इसके तहत न केवल प्रमुख सचिव की नियुक्ति होगी, बल्कि 2010 बैच के कई आईएएस अधिकारियों को सचिव पद पर पदोन्नत किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि प्रशासनिक ढांचे में समय-समय पर बदलाव से नई ऊर्जा का संचार होता है और कामकाज की गति तेज होती है। इसी सोच के तहत यह व्यापक फेरबदल किया जा रहा है।
2010 बैच के अधिकारियों को मिलेगा सचिव पद
राज्य प्रशासन में 2010 बैच के आईएएस अधिकारियों को लंबे समय से सचिव पद पर पदोन्नति का इंतजार था। नए साल में यह इंतजार कई अधिकारियों के लिए खत्म होने जा रहा है। उज्जैन में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के रूप में कार्यरत आशीष सिंह, आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल और भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह जैसे अधिकारी सचिव बनाए जाएंगे।
इन अधिकारियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रशासनिक क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता का परिचय दिया है। सचिव पद पर पहुंचने के बाद इनके जिम्मे नीति निर्माण से लेकर बड़े विभागीय फैसलों की भूमिका होगी। इससे शासन के कामकाज में नई दृष्टि और गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।
विवादों में घिरे अधिकारियों का प्रमोशन रोका गया
जहां एक ओर कई अधिकारियों को पदोन्नति दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर पांच आईएएस अधिकारियों का प्रमोशन फिलहाल रोक दिया गया है। इनमें संतोष वर्मा, पवन जैन, तरुण भटनागर, ऋषि गर्ग और अनुराग चौधरी शामिल हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ या तो जांच चल रही है या फिर वे किसी न किसी विवाद से जुड़े रहे हैं।
संतोष वर्मा का नाम विशेष रूप से उस मामले में सामने आया था जिसमें ब्राह्मण बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर व्यापक विवाद हुआ था। इसके अलावा अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच या शिकायतें लंबित हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक इन मामलों में स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक इन अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जाएगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश
प्रमोशन रोकने के इस फैसले को सरकार के उस रुख से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सरकार यह संदेश देना चाहती है कि केवल वरिष्ठता या पद के आधार पर ही नहीं, बल्कि आचरण और कार्यशैली के आधार पर भी अधिकारियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
यह कदम अन्य अधिकारियों के लिए भी एक संकेत है कि विवादों और अनुशासनहीनता के मामलों को हल्के में नहीं लिया जाएगा। शासन की इस नीति से प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन मजबूत होने की उम्मीद की जा रही है।
सचिव बनने वाले अन्य वरिष्ठ अधिकारी
पदोन्नति सूची में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिन्हें सचिव स्तर की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनमें जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना, आयुक्त कोष एवं लेखा भास्कर लक्षकार, आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा, आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी और विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक अनय द्विवेदी शामिल हैं।
इसके अलावा आयुक्त पंचायतराज छोटे सिंह, अपर आयुक्त ग्वालियर सपना निगम, संचालक स्वास्थ्य दिनेश श्रीवास्तव, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन, अपर सचिव श्रम बसंत कुर्रे, अपर सचिव मुख्यमंत्री चंद्रशेखर बालिंबे, अपर सचिव नगरीय विकास शीलेंद्र सिंह और आयुक्त चंबल सुरेश कुमार को भी सचिव पद की जिम्मेदारी दी जाएगी।
इन सभी अधिकारियों को शासन के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
2013 बैच के अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव पद
केवल 2010 बैच ही नहीं, बल्कि 2013 बैच के आईएएस अधिकारियों को भी नए साल में बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है। इन्हें अतिरिक्त सचिव पद पर पदोन्नत किया जाएगा। इससे प्रशासनिक संरचना में एक नई परत जुड़ेगी और वरिष्ठ अधिकारियों पर काम का बोझ कुछ हद तक कम होगा।
अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से शासन की योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंचती हैं।
पुलिस विभाग में भी बड़े स्तर पर फेरबदल
प्रशासनिक बदलाव केवल सिविल सेवा तक सीमित नहीं हैं। पुलिस महकमे में भी एक जनवरी 2026 से बड़े स्तर पर पदोन्नति और फेरबदल होने जा रहे हैं। एडीजी अजाक आशुतोष राय को स्पेशल डीजी पद पर पदोन्नत किया जाएगा। यह पद पुलिस विभाग में अत्यंत वरिष्ठ माना जाता है और इससे जुड़े फैसलों का असर पूरे राज्य की कानून व्यवस्था पर पड़ता है।
इसके अलावा जबलपुर के आईजी प्रमोद वर्मा को एडीजी पद पर पदोन्नति दी जाएगी। तीन डीआईजी को आईजी और सोलह एसपी को डीआईजी पद पर प्रमोशन मिलने की तैयारी है। गृह विभाग द्वारा इसकी औपचारिक सूची जारी की जाएगी।
कानून व्यवस्था पर पड़ेगा असर
पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति और नई नियुक्तियों से राज्य की कानून व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है। वरिष्ठ पदों पर अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से अपराध नियंत्रण, प्रशासनिक निगरानी और पुलिसिंग के स्तर में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
सरकार का मानना है कि प्रशासन और पुलिस दोनों में एक साथ बदलाव से शासन की कार्यक्षमता में संतुलन बनेगा और जनता तक बेहतर सेवाएं पहुंचेंगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा
इस व्यापक फेरबदल को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। कुछ लोग इसे नए साल की नई शुरुआत बता रहे हैं, तो कुछ इसे शासन की सख्त छवि के रूप में देख रहे हैं। खासतौर पर विवादों में घिरे अधिकारियों का प्रमोशन रोके जाने को लेकर यह संदेश जा रहा है कि सरकार अब किसी भी तरह की लापरवाही या विवाद को नजरअंदाज नहीं करेगी।
आने वाले समय में और बदलाव संभव
सूत्रों का कहना है कि यह फेरबदल अभी अंतिम नहीं है। आने वाले महीनों में और भी प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ जिलों के कलेक्टर और विभागीय प्रमुखों के तबादलों पर भी मंथन चल रहा है।
नए प्रमुख सचिव की नियुक्ति के बाद शासन की प्राथमिकताओं और कार्यशैली में भी कुछ बदलाव संभव हैं। प्रशासनिक अमले की नजर अब इस बात पर टिकी है कि एम. सेलवेंद्रन के नेतृत्व में प्रदेश का प्रशासन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
निष्कर्ष
साल 2026 की शुरुआत मध्यप्रदेश प्रशासन के लिए बदलाव और सख्ती का संकेत लेकर आई है। जहां एक ओर अनुभवी अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर विवादों में घिरे अधिकारियों पर रोक लगाकर शासन ने स्पष्ट संदेश दिया है। आने वाला समय बताएगा कि यह प्रशासनिक फेरबदल प्रदेश की कार्यप्रणाली को कितना प्रभावी और पारदर्शी बनाता है।
