नए साल का आगमन हमेशा उम्मीदों, संकल्पों और उत्सव का संदेश लेकर आता है, लेकिन जब साल 2026 की पहली सुबह दुनिया पर उतरी, तो यह केवल जश्न तक सीमित नहीं रही। एशिया से लेकर यूरोप तक, सत्ता के केंद्रों, शाही महलों, तानाशाही व्यवस्थाओं और आम जनता के बीच नए साल का स्वागत अलग-अलग रंगों में दिखाई दिया। कहीं यह उत्सव शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बना, तो कहीं लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं का उत्सव।

उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से लेकर जापान के शाही महल, ताइवान के राष्ट्रपति भवन, रूस के रेड स्क्वायर और चीन की महान दीवार तक, नए साल की तस्वीरों में सिर्फ खुशियां नहीं, बल्कि सत्ता, विचारधारा और वैश्विक राजनीति की झलक भी साफ दिखाई दी।
प्योंगयांग में किम जोंग उन का पारिवारिक प्रदर्शन
उत्तर कोरिया में नए साल का जश्न हमेशा एक राजनीतिक संदेश के साथ जुड़ा होता है। प्योंगयांग में 31 दिसंबर 2025 की रात आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन अपनी पत्नी री सोल जू और बेटी के साथ सार्वजनिक रूप से नजर आए। यह दृश्य अपने आप में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर कोरिया में शासक परिवार की सार्वजनिक उपस्थिति हमेशा रणनीतिक संकेत देती है।
किम जोंग उन अपनी बेटी का हाथ थामे सांस्कृतिक कार्यक्रम देखते नजर आए। मंच पर चल रहे कार्यक्रमों में संगीत, नृत्य और राष्ट्रवादी भावनाओं से भरी प्रस्तुतियां शामिल थीं। इस पूरे आयोजन का मकसद सिर्फ नए साल का स्वागत नहीं था, बल्कि सत्ता की निरंतरता, पारिवारिक उत्तराधिकार और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना भी था।
उत्तर कोरिया में ऐसे कार्यक्रम आम जनता के लिए एक तयशुदा दृश्य होते हैं, लेकिन वैश्विक नजरिए से यह तस्वीरें शासन व्यवस्था की प्रकृति और भविष्य के संकेत भी देती हैं। किम जोंग उन का अपनी बेटी के साथ मंच पर आना, आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा को लेकर अटकलों को भी हवा देता है।
ताइवान में लोकतंत्र और संप्रभुता का प्रतीकात्मक उत्सव
जहां उत्तर कोरिया में नया साल सत्ता के केंद्रीकरण का प्रतीक बना, वहीं ताइवान में यह लोकतांत्रिक पहचान और संप्रभुता के प्रदर्शन के रूप में सामने आया। ताइपे में राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने राष्ट्रपति कार्यालय में नए साल के मौके पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
झंडारोहण का यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं था। यह ताइवान की राजनीतिक पहचान, आत्मनिर्भरता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक माना गया। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान और औपचारिक संबोधन ने देशवासियों को एकजुटता और स्थिरता का संदेश दिया।
वैश्विक राजनीति के संदर्भ में यह आयोजन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि ताइवान की संप्रभुता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार तनाव बना रहता है। नए साल की शुरुआत में झंडारोहण का यह दृश्य ताइवान की राजनीतिक दृढ़ता को दर्शाता है।
जापान में शाही परंपरा और जनता की उम्मीदें
जापान में नए साल का स्वागत शांति, परंपरा और अनुशासन के साथ किया गया। शाही परिवार की ओर से जारी आधिकारिक पोर्ट्रेट्स में सम्राट नारुहितो, महारानी मसाको और राजकुमारी आइको नजर आए। यह तस्वीरें जापान की शाही परंपरा, निरंतरता और स्थिरता का प्रतीक हैं।
इसके साथ ही क्राउन प्रिंस अकिशिनो, क्राउन प्रिंसेस किको, प्रिंसेस काको और प्रिंस हिसाहितो की तस्वीरों ने शाही उत्तराधिकार और पारिवारिक एकता को दर्शाया। जापान में शाही परिवार की छवि केवल औपचारिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा मानी जाती है।
राजधानी टोक्यो में आम लोगों ने नए साल की पहली सुबह सूर्योदय देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र होकर एक पुरानी परंपरा निभाई। यह परंपरा नई शुरुआत, आशा और शांति की कामना से जुड़ी हुई है। ठंड के बावजूद लोग खुले आसमान के नीचे खड़े होकर उगते सूरज का स्वागत करते नजर आए।
रूस के रेड स्क्वायर में ठंड के बीच गर्मजोशी
रूस में नए साल का जश्न राजधानी मॉस्को के रेड स्क्वायर पर देखने को मिला। सेंट बेसिल कैथेड्रल और स्पास्काया टावर के आसपास जमा हुए लोगों ने भयंकर ठंड के बावजूद उत्साह के साथ नए साल का स्वागत किया।
लोग एक-दूसरे के साथ तस्वीरें लेते, हंसते और जश्न मनाते नजर आए। यह दृश्य रूस की आम जनता के जज्बे को दिखाता है, जहां कठिन हालात और ठंडे मौसम के बावजूद उत्सव की भावना जीवित रहती है।
राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच यह सार्वजनिक उत्सव आम लोगों के लिए राहत और सामान्य जीवन की झलक लेकर आया।
चीन में सांस्कृतिक विरासत के साथ नए साल का स्वागत
चीन में नए साल का जश्न सांस्कृतिक रंगों में रंगा नजर आया। बीजिंग के जूयोंगगुआन क्षेत्र में, ग्रेट वॉल के पास कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए साल 2026 का स्वागत किया।
संगीत, पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य ने इस आयोजन को खास बना दिया। यह कार्यक्रम चीन की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और सामूहिक पहचान का प्रतीक बना। नए साल का यह जश्न केवल उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गर्व का प्रदर्शन भी था।
वैश्विक तस्वीरें, एक साझा संदेश
इन सभी आयोजनों को एक साथ देखा जाए, तो साफ नजर आता है कि नया साल केवल कैलेंडर बदलने का नाम नहीं है। यह हर देश के लिए अपनी पहचान, राजनीति और परंपरा को दिखाने का मौका भी होता है। कहीं सत्ता का प्रदर्शन हुआ, कहीं लोकतंत्र का उत्सव, कहीं शाही परंपरा और कहीं आम जनता की उम्मीदें।
साल 2026 की शुरुआत ने यह दिखा दिया कि दुनिया भले ही अलग-अलग रास्तों पर चल रही हो, लेकिन नए साल की सुबह हर जगह नए संकल्प और उम्मीदें लेकर आती है।
