एशिया-प्रशांत क्षेत्र एक बार फिर वैश्विक राजनीति और सैन्य रणनीति के केंद्र में आ गया है। ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने न केवल क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ाई है, बल्कि विश्व की बड़ी ताकतों को भी आमने-सामने ला खड़ा किया है। हालिया घटनाक्रम में ताइवान द्वारा जारी किया गया वह वीडियो खासा चर्चा में है, जिसमें उसके F-16V फाइटर जेट ने चीनी J-16 लड़ाकू विमान को सफलतापूर्वक ट्रैक और लॉक किया। यह घटना सिर्फ एक सैन्य अभ्यास का हिस्सा नहीं थी, बल्कि यह स्पष्ट संकेत थी कि ताइवान किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।

चीन का सैन्य दबाव और ताइवान की चुनौती
चीन ने हाल के दिनों में ताइवान के चारों ओर बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किए। इन अभ्यासों में आधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम, नौसैनिक जहाज और कोस्टगार्ड की सक्रिय भागीदारी देखी गई। बीजिंग ने इसे नियमित सैन्य अभ्यास करार दिया, लेकिन ताइवान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे सीधा उकसावे वाला कदम माना। चीन ने खुले तौर पर कहा कि ये अभ्यास ताइवान के मुख्य द्वीप को घेरने और महत्वपूर्ण बंदरगाहों को अवरुद्ध करने की रणनीति का हिस्सा हैं।
ताइवान सरकार ने इस कदम को क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया। ताइपे का कहना है कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां केवल डर का माहौल पैदा करने और राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से की जा रही हैं।
F-16 बनाम J-16: तकनीक का आमना-सामना
तनाव के बीच ताइवान ने जो वीडियो जारी किया, उसने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी। वीडियो में देखा गया कि ताइवान की वायुसेना का F-16V फाइटर जेट चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स के J-16 लड़ाकू विमान को सटीक रूप से ट्रैक कर रहा है। यह लॉक AN/AAQ-33 स्नाइपर पॉड के जरिए किया गया, जो एक अत्याधुनिक टार्गेटिंग सिस्टम है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक बेहद खतरनाक और प्रभावी मानी जाती है क्योंकि इसमें दुश्मन के विमान को किसी भी प्रकार का चेतावनी संकेत नहीं मिलता। यानी सामने वाला पायलट यह भी नहीं जान पाता कि वह पूरी तरह निशाने पर आ चुका है। आवश्यकता पड़ने पर F-16V तुरंत AIM-9X साइडवाइंडर मिसाइल दाग सकता है।
ताइवान का स्पष्ट संदेश
ताइवान ने इस वीडियो के माध्यम से यह साफ कर दिया कि संख्या में कमजोर होने के बावजूद उसकी वायुसेना अत्याधुनिक तकनीक और रणनीति से लैस है। यह केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि चीन को दिया गया सीधा संदेश था कि किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वह क्षेत्रीय शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक हस्तक्षेप
चीन के सैन्य अभ्यासों पर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि चीन की सैन्य ड्रिल और आक्रामक बयानबाजी ताइवान जलडमरूमध्य में अनावश्यक तनाव पैदा कर रही है। उन्होंने चीन से अपील की कि वह सैन्य दबाव कम करे और संवाद का रास्ता अपनाए।
अमेरिका ने दोहराया कि वह ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है और यथास्थिति को बलपूर्वक बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध करता है।
शी जिनपिंग का बयान और उसका असर
नए साल के मौके पर दिए गए अपने संबोधन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने फिर कहा कि ताइवान का चीन में विलय रोका नहीं जा सकता। उन्होंने ताइवान और चीन के लोगों को खून और रिश्तों से जुड़ा बताते हुए एकीकरण को समय की मांग बताया।
इस बयान को ताइवान और उसके समर्थक देशों ने सीधी चेतावनी के रूप में लिया। ताइवान का मानना है कि ऐसे बयान सैन्य दबाव के साथ मिलकर खतरे को और बढ़ा देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चीन का पलटवार
चीन के सबसे बड़े सैन्य अभ्यास पर जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और कुछ यूरोपीय देशों ने चिंता जताई। इन प्रतिक्रियाओं से नाराज चीन ने उन पर पाखंड का आरोप लगाया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि ये देश ताइवान की अलगाववादी गतिविधियों और बाहरी दखल पर चुप रहते हैं, लेकिन चीन की वैध कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं।
चीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इन देशों के बयानों को पूरी तरह खारिज किया।
डोनाल्ड ट्रंप का संतुलित रुख
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की ड्रिल पर अपेक्षाकृत संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें फिलहाल किसी तात्कालिक हमले का खतरा नहीं दिखता और चीन लंबे समय से इस क्षेत्र में अभ्यास करता रहा है। हालांकि, अमेरिका ने यह भी साफ किया कि वह ताइवान की आत्मरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हथियार सौदे और बढ़ता तनाव
हाल ही में अमेरिका द्वारा ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दिए जाने से चीन और भड़क गया है। चीन का मानना है कि यह सौदा क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं ताइवान इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है।
एशिया-प्रशांत में भविष्य की तस्वीर
ताइवान जलडमरूमध्य में मौजूदा हालात ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र वैश्विक राजनीति का सबसे संवेदनशील बिंदु बना रहेगा। चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति, ताइवान की तकनीकी तैयारी और अमेरिका की रणनीतिक मौजूदगी इस क्षेत्र को लगातार तनावपूर्ण बनाए हुए है।
ताइवान द्वारा F-16 से J-16 को लॉक करने की घटना केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन और रणनीतिक संदेश का प्रतीक बन चुकी है। यह संदेश है कि डराने की नीति अब एकतरफा नहीं रह गई है।
