राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और देश की अखंडता का प्रतीक मानी जाने वाली एकता पदयात्रा इस बार मध्य प्रदेश के हरदा और टिमरनी में 11 नवंबर को निकाली जाएगी। यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्ष को समर्पित एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।

इस यात्रा का उद्देश्य युवाओं में एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना जगाना और यह संदेश देना है कि विविधता में ही भारत की असली ताकत बसती है। जिला प्रशासन ने इस भव्य आयोजन की पूरी तैयारी शुरू कर दी है। जिला पंचायत सीईओ ने अधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए इसे ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया है।
राष्ट्रीय एकता के प्रतीक सरदार पटेल को श्रद्धांजलि
भारत के लौह पुरुष, सरदार वल्लभभाई पटेल को भारतीय इतिहास में देश की एकता के महान नायक के रूप में याद किया जाता है। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने 562 रियासतों को भारत में मिलाकर एक अखंड राष्ट्र की नींव रखी थी। उनकी दूरदृष्टि, राजनीतिक दृढ़ता और अदम्य इच्छाशक्ति ने भारत को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हरदा और टिमरनी में होने वाली यह पदयात्रा उसी जज़्बे को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। इसमें स्थानीय नागरिकों के साथ विद्यार्थी, शिक्षक, सामाजिक संगठन, पुलिस बल, स्वयंसेवी संस्थाएं और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे।
तारीख में बदलाव, लेकिन जोश बरकरार
पहले यह यात्रा अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित की जानी थी, लेकिन जिला प्रशासन ने आयोजन को और भव्य रूप देने के उद्देश्य से इसकी तारीख में संशोधन किया है। अब यह 11 नवंबर को आयोजित होगी। इस दिन सुबह से ही हरदा और टिमरनी की गलियां देशभक्ति और एकता के नारों से गूंज उठेंगी।
पदयात्रा की शुरुआत टिमरनी बस स्टैंड से होगी, जो मुख्य मार्गों से गुजरते हुए जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुंचेगी। जगह-जगह देशभक्ति गीत, बैंड, झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस यात्रा को यादगार बनाएंगे।
आयोजन की तैयारियां जोरों पर
जिला पंचायत सीईओ ने संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारी की जिम्मेदारियां सौंपी हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) को मार्ग सुधार और सजावट का दायित्व मिला है। नगर परिषदों को साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षा विभाग स्कूलों के विद्यार्थियों को एकता के गीत और नारे सिखाने का कार्य कर रहा है, ताकि यात्रा के दौरान हर युवा की आवाज़ में एक ही नारा गूंजे — “एक भारत, श्रेष्ठ भारत”
पदयात्रा में शामिल होंगे हज़ारों नागरिक
प्रशासन का अनुमान है कि इस यात्रा में 10,000 से अधिक नागरिक हिस्सा लेंगे। यात्रा के मार्ग पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल की विशेष तैनाती की जाएगी। महिलाओं और बुजुर्गों की सुविधा के लिए मेडिकल वैन, एंबुलेंस और विश्राम स्थल भी तैयार किए जा रहे हैं। प्रमुख स्थानों पर पोस्टर, बैनर और LED स्क्रीन लगाकर सरदार पटेल के जीवन और उनके योगदान पर आधारित डॉक्युमेंट्री दिखाई जाएगी।
पदयात्रा का उद्देश्य: एकता का संदेश हर दिल तक पहुंचाना
इस पदयात्रा का मकसद सिर्फ एक आयोजन करना नहीं है, बल्कि समाज में यह संदेश फैलाना है कि भारत की ताकत उसकी विविधता में छिपी है। विभिन्न धर्म, जाति, भाषा और संस्कृति के लोग जब एक धागे में बंधते हैं, तभी भारत का वास्तविक स्वरूप उभरता है। इस यात्रा के दौरान लोगों को यह भी बताया जाएगा कि आज के दौर में सोशल मीडिया, राजनीति और क्षेत्रीय मतभेदों ने एकता की भावना को कमजोर करने की कोशिश की है, लेकिन हमें सरदार पटेल के बताये रास्ते पर चलकर फिर से उस अखंडता को मजबूत करना होगा।
छात्रों और युवाओं की बड़ी भागीदारी
इस यात्रा में हरदा और टिमरनी के स्कूल-कॉलेजों के हजारों छात्र शामिल होंगे। शिक्षा विभाग ने पहले से ही विद्यार्थियों में निबंध, पोस्टर मेकिंग और क्विज़ प्रतियोगिताएं आयोजित की हैं, जिनका विषय था — “भारत की एकता में सरदार पटेल का योगदान”| जिन विद्यार्थियों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहेगा, उन्हें पदयात्रा के समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
संस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा समापन समारोह
यात्रा के अंत में जिला मुख्यालय पर भव्य समारोह का आयोजन होगा। यहां विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति गीत, लोकनृत्य, नाटक और कविताएं प्रस्तुत की जाएंगी। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहेगा — “एकता प्रतिज्ञा”, जिसमें सभी नागरिक मिलकर देश की एकता, अखंडता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की शपथ लेंगे।
सरदार पटेल की मूर्ति पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन
यात्रा के समापन पर सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। शाम को दीप प्रज्वलन कर “राष्ट्रीय एकता दीप” जलाया जाएगा, जो इस आयोजन का प्रतीक बनेगा। प्रशासन ने इसे हर साल आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है ताकि एकता और भाईचारे का यह संदेश स्थायी बने।
स्थानीय समाजसेवी और किसान संगठनों की भूमिका
स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं, व्यापार मंडलों और किसान समूहों ने भी इस यात्रा में योगदान देने की घोषणा की है। वे मार्ग में पानी, नाश्ता और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था करेंगे। कई स्वयंसेवक इस यात्रा को सुचारू रूप से संपन्न कराने में प्रशासन की मदद करेंगे।
सरदार पटेल की विचारधारा आज भी प्रासंगिक क्यों?
वर्तमान समय में जब देश विभिन्न राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक मतभेदों से गुजर रहा है, ऐसे में सरदार पटेल की सोच पहले से अधिक प्रासंगिक हो गई है। उनका मानना था कि देश की ताकत उसकी जनता की एकता में है, न कि उसके विभाजन में। उनकी यही सोच आज भी भारत के संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा की आत्मा है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए सीख
यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाने का प्रयास है कि राष्ट्र की उन्नति के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
एकता का अर्थ केवल नारे तक सीमित नहीं, बल्कि यह हर व्यक्ति के व्यवहार, सहिष्णुता और सामाजिक सहयोग में झलकना चाहिए।
निष्कर्ष
11 नवंबर को हरदा और टिमरनी सिर्फ एक आयोजन नहीं देखेंगे, बल्कि यह दिन एकता के इतिहास में दर्ज होगा।
सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर यह पदयात्रा उस विरासत की याद दिलाएगी, जिसने भारत को एक सूत्र में बांधा था।
यह संदेश पूरे देश में गूंजेगा — “जहां एकता है, वहीं भारत की आत्मा है।”
