नया साल 2026 भारतीय रक्षा उद्योग के लिए बेहद अहम संकेतों के साथ शुरू हुआ है। देश की अग्रणी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल भारत फोर्ज के लिए यह साल एक ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया है। रक्षा मंत्रालय से मिले 1,661.9 करोड़ रुपये के विशाल हथियार ऑर्डर ने न सिर्फ कंपनी की कारोबारी स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि घरेलू रक्षा उत्पादन की दिशा में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को भी रेखांकित किया है।

इस बड़ी डील के बाद शेयर बाजार में भारत फोर्ज का नाम एक बार फिर निवेशकों के रडार पर आ गया है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े इस करार को कंपनी के डिफेंस बिजनेस के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
भारत फोर्ज और रक्षा मंत्रालय के बीच ऐतिहासिक समझौता
31 दिसंबर को बाजार बंद होने के बाद सामने आई इस खबर ने निवेशकों और रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा। भारत फोर्ज को भारतीय सेना के लिए 2,55,128 क्लोज क्वार्टर बैटल यानी CQB कार्बाइन की आपूर्ति का ठेका मिला है। यह करार न सिर्फ मूल्य के लिहाज से बड़ा है, बल्कि तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस ऑर्डर की कुल कीमत 1,661.9 करोड़ रुपये बताई गई है, जो भारत फोर्ज के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा स्मॉल आर्म्स कॉन्ट्रैक्ट है। कंपनी ने खुद इसे अपने डिफेंस सेगमेंट की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि करार दिया है।
30 दिसंबर को हुआ करार, पांच वर्षों में होगी आपूर्ति
कंपनी की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण करार पर 30 दिसंबर 2025 को हस्ताक्षर किए गए थे। समझौते की शर्तों के मुताबिक, भारत फोर्ज अगले पांच वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से भारतीय सेना को CQB कार्बाइन की आपूर्ति करेगी।
यह लंबी अवधि का ऑर्डर कंपनी को न केवल स्थिर राजस्व देगा, बल्कि रक्षा उत्पादन में उसकी निरंतर उपस्थिति को भी सुनिश्चित करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के दीर्घकालिक अनुबंध कंपनियों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद फायदेमंद होते हैं।
क्या है CQB कार्बाइन और क्यों है यह खास
जिस हथियार की आपूर्ति भारत फोर्ज द्वारा की जानी है, वह 5.56 x 45 mm कैलिबर की CQB कार्बाइन है। यह हथियार विशेष रूप से नजदीकी युद्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
क्लोज क्वार्टर बैटल में सैनिकों को तेज, हल्के और सटीक हथियारों की जरूरत होती है। CQB कार्बाइन इसी आवश्यकता को पूरा करती है। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन, बेहतर बैलेंस और उच्च फायरिंग क्षमता इसे शहरी युद्ध, आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमित स्थानों पर लड़ाई के लिए बेहद उपयुक्त बनाती है।
पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण
इस ऑर्डर की सबसे अहम बात यह है कि CQB कार्बाइन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसका डिजाइन, विकास और निर्माण भारत में ही किया गया है। इस परियोजना में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की प्रयोगशाला आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट और पुणे स्थित भारत फोर्ज ने मिलकर काम किया है।
कई वर्षों की घरेलू रिसर्च, परीक्षण और नवाचार के बाद इस हथियार को तैयार किया गया है। यह भारत की उस क्षमता को दर्शाता है, जिसमें वह अब विदेशी हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय खुद आधुनिक रक्षा उपकरण विकसित कर सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
यह परियोजना भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है। इस पहल का उद्देश्य रक्षा उत्पादन समेत कई अहम क्षेत्रों में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। लंबे समय तक भारत को अपने सशस्त्र बलों के लिए हथियार और उपकरण विदेशों से आयात करने पड़ते थे, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है।
भारत फोर्ज ने स्पष्ट किया है कि वह भारतीय सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक, भरोसेमंद और पूरी तरह स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इस ऑर्डर पर ‘मेड इन इंडिया’ की मुहर भारत की रक्षा नीति में आए बदलाव को साफ तौर पर दिखाती है।
कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स की अहम भूमिका
इस पूरे प्रोजेक्ट में भारत फोर्ज की पूर्ण स्वामित्व वाली डिफेंस सब्सिडियरी कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड की भूमिका भी बेहद अहम रही है। KSSL पहले से ही रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रही है और इस ऑर्डर ने उसकी क्षमताओं को और मजबूती दी है।
डिफेंस सब्सिडियरी के जरिए भारत फोर्ज ने खुद को केवल एक ऑटो कंपोनेंट निर्माता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि रक्षा और एयरोस्पेस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
शेयर बाजार में दिख सकता है असर
इस बड़ी घोषणा से ठीक पहले मंगलवार को भारत फोर्ज के शेयर बीएसई पर 0.7 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,454.90 रुपये पर बंद हुए थे। हालांकि यह तेजी सीमित थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय से मिले इस बड़े ऑर्डर के बाद बाजार की नजरें अब कंपनी के शेयरों पर टिक गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में भारत फोर्ज के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़े ऑर्डर अक्सर निवेशकों का भरोसा बढ़ाते हैं, खासकर तब जब वे दीर्घकालिक और सरकारी होते हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह ऑर्डर
निवेशकों के दृष्टिकोण से यह ऑर्डर कई मायनों में अहम है। पहला, यह कंपनी के डिफेंस बिजनेस को स्थिर और मजबूत राजस्व का आधार देता है। दूसरा, यह भारत फोर्ज की तकनीकी क्षमताओं और सरकारी भरोसे को दर्शाता है। तीसरा, यह ऑर्डर आने वाले वर्षों में कंपनी की ऑर्डर बुक को मजबूत करेगा।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि निवेश से पहले कंपनी के समग्र वित्तीय प्रदर्शन, भविष्य की योजनाओं और जोखिमों का आकलन जरूर किया जाना चाहिए।
भारत की रक्षा नीति में बदलाव का संकेत
भारत फोर्ज को मिला यह ऑर्डर केवल एक कारोबारी खबर नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा नीति में आए बड़े बदलाव का संकेत भी देता है। सरकार अब घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता दे रही है और रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
इससे न सिर्फ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
निष्कर्ष
रक्षा मंत्रालय से मिला 1,661 करोड़ रुपये का यह ऑर्डर भारत फोर्ज के लिए एक नई ऊंचाई साबित हो सकता है। यह उपलब्धि कंपनी के डिफेंस सेगमेंट को नई दिशा देगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगी। शेयर बाजार में भी इस खबर का असर देखने को मिल सकता है, जिससे आने वाले दिनों में भारत फोर्ज निवेशकों की चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
