भारत में बीते कुछ वर्षों में गिग इकोनॉमी ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स, कैब सर्विस और क्विक कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में लाखों लोग आजीविका कमा रहे हैं। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स अब शहरी जीवन की रीढ़ बन चुके हैं। हालांकि अब तक यह वर्ग सामाजिक सुरक्षा के मजबूत दायरे से बाहर रहा, लेकिन वर्ष 2026 की शुरुआत में सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठा लिया है।

सरकार ने गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से नए सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों के लागू होने के बाद स्विगी-जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवरों को भी वे सुविधाएं मिल सकेंगी, जो अब तक केवल सरकारी कर्मचारियों या संगठित निजी क्षेत्र में काम करने वालों को मिलती थीं।
सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे लाखों गिग वर्कर्स
नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, गिग वर्कर्स को पेंशन, बीमा और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाएगा। यह कदम उन लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जो अस्थायी काम, अनिश्चित आय और जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हैं।
सरकार का मानना है कि गिग वर्कर्स देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इसलिए उन्हें भी सुरक्षित भविष्य का अधिकार मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत सोशल सिक्योरिटी कोड को गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स तक विस्तारित किया गया है।
पंजीकरण होगा अनिवार्य, आधार से जुड़ेगा डेटा
इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए सरकार ने पंजीकरण को अनिवार्य करने का फैसला किया है। 16 वर्ष से अधिक आयु का हर गिग वर्कर अपना रजिस्ट्रेशन कराएगा, जो उसके आधार कार्ड से लिंक होगा। यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने और फर्जी लाभार्थियों को रोकने के लिए अपनाई जा रही है।
गिग वर्कर्स का पूरा डेटा ‘ई-श्रम’ पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। यह वही पोर्टल है, जिस पर असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिक पहले से पंजीकृत हैं। सरकार इस पोर्टल को गिग वर्कर्स के लिए एक केंद्रीय डेटाबेस के रूप में विकसित करना चाहती है।
गिग वर्कर्स को मिलेगी विशिष्ट पहचान संख्या
सरकारी और संगठित निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की तरह गिग वर्कर्स को भी एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। जैसे पीएफ कटने वाले कर्मचारियों के पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर होता है, उसी तरह गिग वर्कर्स की भी एक स्थायी डिजिटल पहचान होगी।
हर पंजीकृत वर्कर को एक डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जो देश के किसी भी हिस्से में उसकी पहचान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए पात्रता का प्रमाण होगा। इससे बार-बार दस्तावेज दिखाने या अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अलग पहचान बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
न्यूनतम कार्य दिवस की शर्त
ड्राफ्ट नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक सुरक्षा लाभ पाने के लिए गिग वर्कर्स को न्यूनतम कार्य दिवस की शर्त पूरी करनी होगी। यदि कोई वर्कर केवल एक प्लेटफॉर्म के साथ काम करता है, तो उसे एक साल में कम से कम 90 दिन उसी कंपनी के लिए काम करना अनिवार्य होगा।
जो गिग वर्कर्स एक से अधिक प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन तय की गई है। सरकार ने इस नियम में लचीलापन भी रखा है। यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करता है, तो उसे तीन कार्य दिवस के रूप में गिना जाएगा। इससे 120 दिन का कोटा पूरा करना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा।
कंपनियों पर भी बढ़ी जिम्मेदारी
इन नियमों के तहत केवल वर्कर्स ही नहीं, बल्कि एग्रीगेटर कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और अन्य प्लेटफॉर्म्स को अपने साथ काम करने वाले हर वर्कर का विवरण सरकारी पोर्टल पर अपडेट करना होगा।
इसमें वे वर्कर्स भी शामिल होंगे, जो किसी थर्ड-पार्टी एजेंसी या सहयोगी कंपनी के माध्यम से काम कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गिग वर्कर सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर न रह जाए।
क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी गिग वर्कर्स को
नए नियमों का मूल उद्देश्य गिग वर्कर्स को वह सुरक्षा देना है, जो अब तक केवल संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलती रही है। प्रस्तावित योजनाओं के तहत वर्कर्स को स्वास्थ्य और जीवन बीमा की सुविधा मिलेगी। यह बीमा मुफ्त या रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जा सकता है, ताकि कम आय वाले वर्कर्स भी इसका लाभ उठा सकें।
काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का प्रावधान भी किया जाएगा। डिलीवरी के दौरान सड़क हादसे या अन्य जोखिमों से सुरक्षा के लिए यह कवर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आयुष्मान भारत से जुड़ेंगे गिग वर्कर्स
श्रम मंत्रालय ने गिग वर्कर्स को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत पात्र वर्कर्स और उनके परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा।
यह कदम खास तौर पर उन वर्कर्स के लिए राहत लेकर आएगा, जिनके पास महंगे निजी इलाज का खर्च उठाने की क्षमता नहीं होती। स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने से गिग वर्कर्स का जीवन स्तर बेहतर होने की उम्मीद है।
पेंशन योजना पर भी हो रहा विचार
सरकार भविष्य में गिग वर्कर्स के लिए पेंशन योजना लाने पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित मॉडल में वर्कर और कंपनी दोनों का योगदान हो सकता है, ताकि रिटायरमेंट के बाद वर्कर को नियमित पेंशन मिल सके।
हालांकि यह योजना अभी विचाराधीन है, लेकिन ड्राफ्ट नियमों में इसके संकेत मिलने से गिग वर्कर्स के बीच उम्मीद बढ़ गई है।
उम्र सीमा और पात्रता की शर्तें
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, जैसे ही कोई गिग वर्कर 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेगा, वह इन सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए पात्र नहीं रहेगा। यानी यह सुरक्षा मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों के लिए निर्धारित की गई है।
इसके अलावा, लाभ बरकरार रखने के लिए हर साल न्यूनतम कार्य दिवस की शर्त पूरी करनी होगी। यदि कोई वर्कर किसी वित्तीय वर्ष में पर्याप्त काम नहीं करता, तो अगले वर्ष वह इन सुविधाओं से वंचित हो सकता है।
निगरानी के लिए बनेगा राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड
इन सभी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह बोर्ड केवल औपचारिक संस्था नहीं होगा, बल्कि इसकी जिम्मेदारी देश में गिग वर्कर्स की वास्तविक संख्या का आकलन करना और बदलती अर्थव्यवस्था के अनुसार नई नीतियां सुझाना होगी।
इस बोर्ड में सरकार, श्रमिक संगठनों और कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, ताकि सभी पक्षों की बात सुनी जा सके और संतुलित फैसले लिए जा सकें।
गिग वर्कर्स के जीवन में संभावित बदलाव
इन नियमों के लागू होने के बाद गिग वर्कर्स के जीवन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। सामाजिक सुरक्षा मिलने से उनकी आर्थिक अनिश्चितता कम होगी और भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ेगा। यह कदम न केवल वर्कर्स के हित में है, बल्कि गिग इकोनॉमी को अधिक स्थिर और टिकाऊ बनाने में भी मदद करेगा।
निष्कर्ष
स्विगी-जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी बॉय और अन्य गिग वर्कर्स के लिए यह खबर किसी खुशखबरी से कम नहीं है। सरकार का यह कदम भारत की गिग इकोनॉमी को औपचारिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि ये नियम पूरी तरह लागू होते हैं, तो लाखों गिग वर्कर्स को पहली बार सरकारी कर्मचारी जैसी सामाजिक सुरक्षा का अनुभव मिलेगा।
