भारत लंबे समय तक आयात आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के रूप में जाना जाता रहा है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए देश विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहा। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदली है। खासकर स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भारत ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसकी कुछ साल पहले तक कल्पना भी मुश्किल थी।

अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी ऐपल द्वारा भारत से 50 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन का निर्यात इसी बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह उपलब्धि किसी एक कंपनी की सफलता भर नहीं है, बल्कि यह उस सरकारी नीति, औद्योगिक सहयोग और वैश्विक रणनीति का नतीजा है, जिसने भारत को स्मार्टफोन एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित कर दिया है।
पीएलआई योजना की शुरुआत और उद्देश्य
भारत सरकार ने 2021-22 में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मकसद देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन के लिए आकर्षित करना और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत बनाना था।
स्मार्टफोन सेक्टर को इस योजना में विशेष प्राथमिकता दी गई क्योंकि यह रोजगार, निवेश और निर्यात तीनों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। योजना के तहत कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने पर वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया, जिससे उनकी लागत कम हुई और वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकीं।
ऐपल की भारत रणनीति और पीएलआई में एंट्री
पीएलआई योजना के बाद ऐपल ने भारत को सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक उत्पादन केंद्र के रूप में देखना शुरू किया। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के बाद ऐपल ने अपने प्रमुख सप्लायर्स को भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
दिसंबर 2025 तक ऐपल भारत से 50 अरब डॉलर के आईफोन का निर्यात कर चुका है। यह आंकड़ा उस समय का है जब पीएलआई योजना के तहत पांच साल की अवधि में अभी भी लगभग तीन महीने शेष हैं। इसका मतलब साफ है कि आने वाले समय में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड निर्यात
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में ही ऐपल ने लगभग 16 अरब डॉलर के आईफोन का निर्यात किया। यह अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है और यह दिखाता है कि भारत में आईफोन उत्पादन कितनी तेजी से बढ़ा है।
इस निर्यात के साथ पीएलआई योजना के दौरान ऐपल का कुल आईफोन एक्सपोर्ट 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में यह आंकड़ा भारत को स्मार्टफोन निर्यात के नक्शे पर शीर्ष स्थानों में ला खड़ा करता है।
सैमसंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
ऐपल के अलावा सैमसंग भी पीएलआई योजना के तहत एक बड़ा खिलाड़ी रहा है। हालांकि आंकड़ों की तुलना करें तो अंतर साफ नजर आता है। पांच साल की अवधि में सैमसंग ने लगभग 17 अरब डॉलर के मोबाइल फोन का निर्यात किया है।
हालांकि ऐपल और सैमसंग दोनों ने पीएलआई योजना के तहत अपने निर्यात आंकड़ों पर आधिकारिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सरकारी डेटा से यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत में ऐपल का प्रभाव कितना बड़ा हो चुका है।
भारत में आईफोन निर्माण का बढ़ता नेटवर्क
फिलहाल भारत में आईफोन निर्माण से जुड़ी पांच बड़ी फैक्ट्रियां काम कर रही हैं। इनमें से तीन का संचालन टाटा समूह कर रहा है, जबकि दो फैक्ट्रियां फॉक्सकॉन के पास हैं। ये फैक्ट्रियां सिर्फ असेंबली यूनिट्स नहीं हैं, बल्कि एक बड़े औद्योगिक नेटवर्क की रीढ़ हैं।
इन फैक्ट्रियों से लगभग 45 कंपनियों की सप्लाई चेन जुड़ी हुई है। इनमें कई छोटे और मध्यम उद्योग भी शामिल हैं, जो आईफोन के लिए विभिन्न पुर्जे और कंपोनेंट्स तैयार करते हैं। इससे न केवल बड़े निवेश आए हैं, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिला है।
स्मार्टफोन बना भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद
आईफोन के निर्यात का सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि स्मार्टफोन अब भारत की सबसे बड़ी निर्यात वस्तु बन गया है। यह बदलाव ऐतिहासिक है क्योंकि 2015 में स्मार्टफोन निर्यात के मामले में भारत 167वें स्थान पर था।
आज स्थिति यह है कि कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में ऐपल की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत से होने वाला स्मार्टफोन निर्यात अब वैश्विक बाजार में कितनी मजबूती से अपनी जगह बना चुका है।
पीएलआई योजना का भविष्य और सरकारी रुख
स्मार्टफोन पीएलआई योजना मार्च 2025 में समाप्त हो रही है, लेकिन सरकार इस क्षेत्र को समर्थन देना बंद नहीं करना चाहती। अधिकारियों का कहना है कि उद्योग के साथ मिलकर एक नई या संशोधित योजना तैयार की जाएगी, जो विनिर्माण को आगे भी प्रोत्साहन देती रहे।
सरकार का मानना है कि चीन और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में भारतीय निर्माताओं को अब भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए नीति समर्थन आवश्यक है।
चीन और वियतनाम को टक्कर देता भारत
पीएलआई योजना से पहले भी भारत से मोबाइल फोन का निर्यात होता था, लेकिन असली तेजी योजना के लागू होने के बाद आई। इसका मुख्य कारण ऐपल द्वारा अपने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं को भारत लाना रहा।
अब भारत सिर्फ तैयार स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का भी निर्यात चीन और वियतनाम जैसे देशों को कर रहा है। यह बदलाव भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में एक अहम कड़ी बना रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार
ऐपल के विक्रेताओं और सैमसंग को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना में भी चुना गया है। इसके तहत सैमसंग डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली का निर्माण करेगा, जिससे करीब 300 अतिरिक्त लोगों को रोजगार मिलेगा।
ऐपल के ईकोसिस्टम ने भी अपनी पूरी ताकत दिखाई है। योजना के दूसरे चरण में कंपनी के पांच बड़े विक्रेताओं को चुना गया है। इनमें मदरसन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और फॉक्सकॉन जैसे नाम शामिल हैं, जो आईफोन के लिए केसिंग का निर्माण करेंगे।
भारत में बनेंगे बैटरी और एल्यूमीनियम पार्ट्स
इस विस्तार का दायरा सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं है। एटीएल कंपनी भारत में लिथियम-आयन सेल का निर्माण करेगी, जबकि हिंडाल्को एल्यूमीनियम एक्सट्रूजन का काम संभालेगी।
इन पुर्जों का इस्तेमाल मैकबुक, एयरपॉड्स, ऐपल वॉच, ऐपल पेंसिल और आईफोन जैसे उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा। यह पहली बार है जब भारत इन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को चीन और वियतनाम जैसे देशों को निर्यात करेगा।
रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास
आईफोन निर्यात की इस सफलता का सीधा असर रोजगार और निवेश पर पड़ा है। हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हुई हैं। साथ ही, भारतीय कंपनियों को वैश्विक तकनीकी मानकों के अनुरूप उत्पादन का अनुभव मिला है।
इससे भारत में तकनीकी कौशल, गुणवत्ता नियंत्रण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में भी बड़ा सुधार हुआ है।
भारत की बदलती वैश्विक छवि
50 अरब डॉलर के आईफोन निर्यात के साथ भारत की छवि अब सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार की नहीं रही। देश अब एक भरोसेमंद वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में उभर रहा है।
यह बदलाव सिर्फ स्मार्टफोन सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इसका असर अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक उद्योगों पर भी पड़ेगा।
निष्कर्ष
पीएलआई योजना ने भारत के स्मार्टफोन उद्योग की दिशा और दशा दोनों बदल दी हैं। ऐपल द्वारा भारत से 50 अरब डॉलर के आईफोन का निर्यात इस बात का सबूत है कि सही नीति, उद्योग सहयोग और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ भारत किसी भी क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है।
यह कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जो दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों ने भारत पर जताया है।
