भारत बीते कुछ वर्षों से निवेश के वैश्विक मानचित्र पर एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा है। केंद्र और राज्य सरकारें देश में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक विस्तार के उद्देश्य से लगातार निवेश सम्मेलनों का आयोजन कर रही हैं। इन सम्मेलनों के जरिए निवेशकों को आकर्षित करने, नीतिगत स्थिरता का भरोसा दिलाने और राज्यों की औद्योगिक संभावनाओं को उजागर करने का प्रयास किया जाता है।

इसी क्रम में फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के लिए एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में प्रस्तुत किया था। उस समय दावा किया गया कि इस समिट के जरिए राज्य को 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के निवेश परिदृश्य में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया गया।
हालांकि, समय बीतने के साथ जब इन निवेश प्रस्तावों की प्रगति और उनके वास्तविक क्रियान्वयन की स्थिति सामने आई, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बीते नौ महीनों में देशभर में कुल 26.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर गतिविधि दर्ज की गई, लेकिन इसमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी मात्र 3.2 प्रतिशत तक सीमित रही।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का उद्देश्य और अपेक्षाएं
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किसी भी राज्य के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि यह उस राज्य की औद्योगिक सोच, प्रशासनिक क्षमता और निवेश अनुकूल वातावरण का प्रदर्शन होता है। भोपाल में आयोजित समिट के दौरान भी यही संदेश दिया गया था कि मध्य प्रदेश निवेशकों के लिए तैयार है और यहां उद्योग लगाने के लिए पर्याप्त संसाधन, भूमि, श्रम शक्ति और नीतिगत सहयोग उपलब्ध है।
समिट के मंच से राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के बड़े प्रस्ताव मिलने का दावा किया। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, आईटी, लॉजिस्टिक्स, कृषि आधारित उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर शामिल बताए गए। इन प्रस्तावों को राज्य की आर्थिक संभावनाओं का संकेत माना गया और यह कहा गया कि आने वाले वर्षों में इससे लाखों रोजगार सृजित होंगे।
निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश में अंतर
निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश के बीच अंतर कोई नया विषय नहीं है। अक्सर निवेश सम्मेलनों में जो एमओयू या आशय पत्र साइन होते हैं, वे भविष्य की संभावनाओं को दर्शाते हैं, न कि तुरंत जमीन पर उतरने वाली परियोजनाओं को।
भोपाल समिट के बाद भी यही स्थिति देखने को मिली। 30.77 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को लेकर उत्साह जरूर था, लेकिन जब इन पर आगे की प्रक्रिया शुरू हुई, तो कई प्रस्ताव प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ पाए।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बीते नौ महीनों में देश में कुल 26.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर गतिविधि दर्ज की गई। यह आंकड़ा यह बताता है कि निवेशकों की रुचि देश में बनी हुई है, लेकिन इसमें मध्य प्रदेश का हिस्सा केवल 3.2 प्रतिशत रहा।
मध्य प्रदेश की सीमित हिस्सेदारी के कारण
मध्य प्रदेश को देश के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने का लाभ जरूर मिलता है, लेकिन निवेश आकर्षित करने के मामले में राज्य को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, बड़े शहरी बाजारों की निकटता और कुशल मानव संसाधन जैसे पहलुओं पर निवेशक गंभीरता से विचार करते हैं।
राज्य सरकार ने समिट के दौरान निवेश अनुकूल नीतियों का भरोसा दिलाया था, लेकिन निवेशकों के लिए केवल नीतिगत घोषणाएं पर्याप्त नहीं होतीं। उन्हें जमीन पर तेज अनुमोदन प्रक्रिया, स्पष्ट नियम और स्थिर प्रशासनिक समर्थन की आवश्यकता होती है।
विश्लेषकों का मानना है कि कुछ निवेश प्रस्ताव अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में अपेक्षाकृत धीमी प्रक्रिया के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। इसके अलावा, प्रतिस्पर्धी राज्यों ने भी निवेशकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देकर आकर्षित किया।
अन्य राज्यों की तुलना में स्थिति
देश के कई राज्यों ने बीते नौ महीनों में बड़े निवेश प्रस्तावों को तेजी से आगे बढ़ाया है। औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों के पास पहले से मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थापित औद्योगिक क्लस्टर हैं, जिससे निवेशकों को जोखिम कम नजर आता है।
इसके विपरीत, मध्य प्रदेश में कई क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की संभावनाएं तो हैं, लेकिन उन्हें साकार करने के लिए लंबी अवधि की रणनीति और निरंतर प्रयास की आवश्यकता है।
सरकार के दावे और जमीनी आंकड़े
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तुरंत बाद राज्य सरकार ने इसे एक बड़ी सफलता बताया था। यह कहा गया कि निवेश प्रस्तावों के जरिए मध्य प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
लेकिन नौ महीनों के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि प्रस्तावों को वास्तविक निवेश में बदलने की रफ्तार अपेक्षा से कम रही। 3.2 प्रतिशत की हिस्सेदारी यह दर्शाती है कि राज्य को अभी लंबा सफर तय करना है।
निवेश प्रस्तावों का आर्थिक महत्व
यह समझना जरूरी है कि निवेश प्रस्ताव अपने आप में आर्थिक विकास नहीं होते, बल्कि वे संभावनाओं का संकेत होते हैं। वास्तविक आर्थिक प्रभाव तब दिखता है जब फैक्ट्रियां लगती हैं, उत्पादन शुरू होता है और रोजगार सृजित होते हैं।
मध्य प्रदेश के लिए यह जरूरी है कि जो प्रस्ताव मिले हैं, उन्हें तेजी से क्रियान्वित किया जाए ताकि निवेशकों का भरोसा मजबूत हो और भविष्य में और बड़े निवेश आकर्षित किए जा सकें।
आगे की राह और सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य को निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, अनुमोदन समय घटाने और इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर सुधार पर ध्यान देना होगा।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे आयोजन तभी सार्थक होते हैं जब उनके बाद ठोस परिणाम सामने आएं। मध्य प्रदेश के पास अवसर हैं, लेकिन उन्हें अवसरों को परिणामों में बदलने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने निवेश को लेकर बड़ी उम्मीदें जगाई थीं। 30.77 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों का दावा निश्चित रूप से प्रभावशाली था, लेकिन नौ महीनों के आंकड़े यह बताते हैं कि वास्तविक निवेश के मामले में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी अभी सीमित है।
यह स्थिति राज्य के लिए आत्ममंथन का विषय है। यदि सरकार और उद्योग मिलकर निवेश के अनुकूल वातावरण को और मजबूत बनाते हैं, तो आने वाले वर्षों में यह तस्वीर बदल सकती है।
