मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चंदनगांव में हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यहाँ “कंबल वाले बाबा” के नाम से मशहूर एक तथाकथित साधु — गणेश यादव — लोगों की बीमारियाँ सिर्फ एक “कंबल” ओढ़ाकर ठीक करने का दावा कर रहा था। वह न केवल अंधविश्वास फैला रहा था, बल्कि इलाज के नाम पर लोगों से मोटी रकम भी ऐंठ रहा था।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब बाबा के शिविर पर छापा मारा, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शिविर में सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठा थे, जिनसे बाबा “चमत्कारी चूरन” और “जादुई तेल” के नाम पर पैसे वसूल रहा था।
अंधविश्वास का अड्डा बना शिविर
चंदनगांव के पास के खेत में तंबू लगाकर यह तथाकथित बाबा हर रोज़ लोगों का “इलाज” करता था। उसका दावा था कि उसके कंबल में “दैवीय शक्ति” है, जो किसी भी बीमारी को जड़ से खत्म कर देती है — चाहे वह सिरदर्द हो, बुखार, गठिया, या कैंसर तक क्यों न हो।
बाबा का कहना था कि “जो इस कंबल को ओढ़ेगा, वह पाप और पीड़ा से मुक्त हो जाएगा।” इन दावों से प्रभावित होकर सैकड़ों ग्रामीण, महिलाएँ और बुजुर्ग वहां पहुँचते थे।
इलाज के नाम पर ठगी
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच में पाया कि बाबा सिर्फ धार्मिक प्रवचन नहीं दे रहा था, बल्कि ‘इलाज’ के नाम पर तेल और चूरन की पुड़िया बेच रहा था। हर पुड़िया 1200 रुपये में बेची जा रही थी। यह तेल और चूरन कथित रूप से “देवी-देवताओं की कृपा से तैयार” बताया जाता था। बाबा लोगों से कहता था — “एक बार ये चूरन खा लो, फिर डॉक्टर के पास कभी नहीं जाना पड़ेगा।” गांव के कई गरीब किसान और महिलाएँ, जो सामान्य दवाओं का खर्च नहीं उठा पाते, बाबा के चमत्कारिक इलाज पर भरोसा करने लगे थे। यही भरोसा बाबा की कमाई का ज़रिया बन गया।
स्वास्थ्य विभाग का छापा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेश गोन्नाने के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को इस शिविर पर छापा मारा। टीम में डॉक्टरों और अधिकारियों के अलावा पुलिस बल भी मौजूद था।
मौके पर जब अधिकारी पहुँचे, तो देखा कि बाबा मंच पर बैठा है, और लोग लाइन लगाकर उससे “आशीर्वाद” ले रहे हैं। एक व्यक्ति बाबा के कंबल से सिर ढककर झुकता, फिर बाबा उसे एक बोतल तेल और चूरन की पुड़िया देकर कहता — “अब तुम स्वस्थ हो जाओगे।” अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शिविर बंद कराया, चूरन और तेल के सैंपल ज़ब्त किए और बाबा से पूछताछ शुरू की।
जांच में क्या निकला सामने?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बाबा के पास किसी भी तरह की चिकित्सा अनुमति नहीं थी। उसके द्वारा बेचे जा रहे तेल और चूरन का कोई लेबल या उत्पादन जानकारी नहीं थी।
प्राथमिक जांच में पाया गया कि ये स्थानीय बाज़ार से खरीदे गए सामान्य तेल और मसालेदार पाउडर थे, जिन्हें बाबा “जादुई औषधि” बताकर बेचता था। अब स्वास्थ्य विभाग ने दोनों नमूने (तेल और चूरन) को लैब में भेजा है, ताकि वैज्ञानिक परीक्षण से यह पता चल सके कि उनमें कोई हानिकारक तत्व तो नहीं है।
प्रशासन की अगली कार्रवाई
CMHO ने मीडिया से कहा कि यह घटना गंभीर है क्योंकि यह जनता की भावनाओं के साथ-साथ उनकी सेहत से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा, “बिना अनुमति किसी को भी इलाज या दवा बेचने की अनुमति नहीं है। यदि रिपोर्ट में कोई गलत तत्व पाए गए, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।” पुलिस ने भी बाबा गणेश यादव से पूछताछ शुरू कर दी है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या उसके पीछे कोई गिरोह काम कर रहा था जो ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास फैला रहा है।
लोगों की प्रतिक्रियाएँ
गांव वालों की प्रतिक्रियाएँ इस मामले पर बंटी हुई हैं। कुछ लोगों ने कहा कि “बाबा सच में चमत्कारी हैं”, जबकि कई ने माना कि “वे ठग हैं जो भोले-भाले लोगों को मूर्ख बना रहे हैं।”
एक ग्रामीण महिला ने बताया, “मेरे बच्चे को कई महीनों से खांसी थी। मैंने बाबा का तेल लगाया, तो दो दिन में फर्क महसूस हुआ। पर डॉक्टर ने कहा कि ये तो सामान्य सर्दी थी।” स्पष्ट है कि अंधविश्वास और जागरूकता की कमी अब भी भारत के ग्रामीण इलाकों में गहरी जड़ें जमाए हुए है।
अंधविश्वास के खतरे
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे “चमत्कारिक इलाज” केवल लोगों की जान को खतरे में डालते हैं।
AIIMS भोपाल के एक डॉक्टर ने कहा —
“ऐसे तथाकथित बाबा आम लोगों के डर और आशा का शोषण करते हैं। लोग सस्ता इलाज पाने की उम्मीद में झांसे में आ जाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार को ग्रामीण स्वास्थ्य शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना चाहिए ताकि जनता अंधविश्वास से मुक्त हो सके।
कानून क्या कहता है?
मध्यप्रदेश में “अंधविश्वास निवारण अधिनियम” के तहत ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। किसी भी व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति इलाज करने या झूठे दावे करने पर जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा “ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट” के तहत बिना लाइसेंस दवा बेचना दंडनीय अपराध है।
अब आगे क्या?
अब सवाल यह है कि क्या ऐसे “कंबल वाले बाबा” पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा। ग्रामीणों में अंधविश्वास की जड़ें बहुत गहरी हैं, और जब तक प्रशासन लगातार निगरानी नहीं रखेगा, ऐसे बाबा बार-बार उभरते रहेंगे।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक “बाबा” का नहीं है, बल्कि यह समाज में व्याप्त उस मानसिकता का दर्पण है जो विज्ञान से ज़्यादा “चमत्कार” पर विश्वास करती है। समय की मांग है कि शिक्षा, जागरूकता और सख्त कानून के ज़रिए इन अंधविश्वासी प्रवृत्तियों को जड़ से मिटाया जाए।
