मध्यप्रदेश के सीहोर ज़िले में धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। यहां एक विशाल श्री सिद्ध हनुमान मंदिर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, जिसकी प्राण-प्रतिष्ठा नए वर्ष की शुरुआत में की जाएगी। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि यह आधुनिक भारतीय वास्तुकला और पारंपरिक शिल्पकला का शानदार उदाहरण भी होगा।

आस्था और ऊर्जा का केंद्र – सीहोर का नया धार्मिक धाम
सीहोर, जो पहले से ही धार्मिक स्थलों की भूमि माना जाता है, अब एक नए आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। श्री सिद्ध हनुमान मंदिर के निर्माण से यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक प्रमुख स्थान हासिल करेगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह स्थान हनुमान भक्तों के लिए वैसा ही पवित्र धाम बनेगा जैसा कि उत्तर प्रदेश का हनुमान सेतु मंदिर या आंध्र प्रदेश का अंजनेयस्वामी मंदिर है।
करोड़ों की लागत से बन रही भव्य संरचना
मंदिर के निर्माण में स्थानीय दानदाताओं, धार्मिक संस्थाओं और भक्तों का योगदान शामिल है। जानकारी के अनुसार, अब तक लगभग ₹8 करोड़ का खर्च आ चुका है और आने वाले महीनों में यह आंकड़ा ₹12 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
मंदिर की पूरी इमारत राजस्थानी संगमरमर और ग्रेनाइट से तैयार की जा रही है। इसकी दीवारों पर रामायण और महाभारत के प्रसंगों को उकेरा जा रहा है। मुख्य गर्भगृह में पंचमुखी हनुमान जी की 15 फीट ऊंची भव्य मूर्ति स्थापित की जाएगी, जिसे जयपुर के प्रसिद्ध मूर्तिकारों ने तैयार किया है।
वास्तुकला में परंपरा और आधुनिकता का संगम
मंदिर का डिज़ाइन पारंपरिक नागर शैली में तैयार किया गया है, लेकिन इसमें आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया गया है। यहां भक्तों के लिए ध्यान-कक्ष, आध्यात्मिक पुस्तकालय, यज्ञशाला और सभागार जैसी व्यवस्थाएं होंगी।
मंदिर परिसर में सोलह शिखर बनाए जा रहे हैं, जो विभिन्न देवताओं को समर्पित होंगे — जैसे श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण, हनुमान, गणेश और दुर्गा। परिसर में हरियाली बढ़ाने के लिए 500 से अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं। सोलर पैनल से बिजली की व्यवस्था होगी, जिससे मंदिर पर्यावरण-संवेदनशील धाम बनेगा।
नए साल में होगी प्राण-प्रतिष्ठा
मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य समारोह आयोजित होगा| इस अवसर पर देशभर से साधु-संत, विद्वान और भक्त भाग लेंगे। 7 दिनों तक रामचरितमानस पाठ, हनुमान चालीसा अखंड पाठ और सुंदरकांड महायज्ञ आयोजित किए जाएंगे। समारोह में लगभग 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
स्थानीय शिल्पकारों का गौरवपूर्ण योगदान
मंदिर निर्माण में अधिकांश कार्य स्थानीय कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। सीहोर, विदिशा, और रायसेन के पत्थर कलाकारों ने मंदिर के शिल्प में अद्भुत नक्काशी की है। दीवारों और स्तंभों पर हनुमान जी के बाल्यकाल से लेकर लंका दहन तक के प्रसंगों को सुंदर चित्रकला और मूर्तिकला के रूप में दर्शाया गया है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यह मंदिर बनने के बाद सीहोर को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से नया आयाम मिलेगा। मंदिर समिति की योजना है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला, भोजनालय, और भक्त निवास भी बनाए जाएं।
राज्य पर्यटन विभाग ने भी इस परियोजना को “धार्मिक सर्किट योजना” में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद सीहोर का यह मंदिर उज्जैन महाकाल, ओरछा रामराजा मंदिर और चित्रकूट हनुमान धाम की तरह तीर्थ यात्रा के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो जाएगा।
आध्यात्मिक महत्व – क्यों है हनुमान जी विशेष
हनुमान जी भारतीय संस्कृति में शक्ति, भक्ति और सेवा के प्रतीक हैं। कहा जाता है कि जहां भी उनका स्मरण किया जाता है, वहां से नकारात्मक ऊर्जा स्वतः समाप्त हो जाती है। सीहोर का यह मंदिर न केवल पूजा-अर्चना का स्थल होगा बल्कि यहां योग ध्यान केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है, जहां युवाओं और साधकों को मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पर्यावरण और आध्यात्मिकता का संतुलन
मंदिर परिसर में प्राकृतिक तालाब का पुनरुद्धार भी किया जा रहा है। वहां वर्षा जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा। आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय वृक्ष जैसे पीपल, बरगद और नीम लगाए जाएंगे। मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि धार्मिक निर्माण तभी पूर्ण होता है जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए।
मंदिर समिति की ओर से बयान
मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित रामनारायण शर्मा ने बताया —
“हमने सपना देखा था कि सीहोर में ऐसा मंदिर बने जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।
यह सिर्फ ईंट और पत्थर की संरचना नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और आत्मबल का प्रतीक है।”
लाइटिंग और भव्य आरती की विशेष योजना
मंदिर के उद्घाटन के बाद हर शाम भव्य ‘हनुमान आरती महोत्सव’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें एक साथ हजारों दीप प्रज्ज्वलित होंगे।
इस आरती को देखने के लिए विशेष दर्शकदीर्घा भी बनाई जा रही है। साथ ही, मंदिर की पूरी संरचना पर नाइट-लाइटिंग सिस्टम लगाया जा रहा है, जो दूर से देखने पर सोने के महल जैसा दृश्य प्रस्तुत करेगा।
देशभर से मिल रहा सहयोग
मंदिर निर्माण में मुंबई, दिल्ली, जयपुर और इंदौर जैसे शहरों से भी भक्तों का आर्थिक और भावनात्मक योगदान मिल रहा है।
ऑनलाइन दान पोर्टल से रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं।
निष्कर्ष
सीहोर का श्री सिद्ध हनुमान मंदिर केवल ईंट-पत्थर की रचना नहीं, बल्कि “आस्था का अधिष्ठान और भक्ति का उत्सव” है। इस मंदिर से न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से भी मध्यप्रदेश को नई पहचान मिलने जा रही है। नए वर्ष में जब इस मंदिर में हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा होगी, तब निश्चय ही यह क्षण सीहोर ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण होगा।
