भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा मानी जाती है। हर दिन करोड़ों यात्री ट्रेन के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। नौकरी, पढ़ाई, व्यापार, इलाज और पारिवारिक कारणों से यात्रा करने वाले लोगों के लिए रेल टिकट केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि समय, उम्मीद और भरोसे से जुड़ा दस्तावेज होता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में ऑनलाइन टिकट बुकिंग के बढ़ते चलन के साथ एक बड़ी समस्या भी सामने आई है, और वह है फर्जी बुकिंग, दलालों की दखलअंदाजी और आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट न मिल पाना।

इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय रेलवे ने वर्ष 2026 की शुरुआत में टिकट बुकिंग से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव सीधे तौर पर आईआरसीटीसी अकाउंट और आधार लिंकिंग से जुड़ा हुआ है। रेलवे का मानना है कि इस कदम से टिकट बुकिंग प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी और असली यात्रियों को प्राथमिकता मिल सकेगी।
5 जनवरी 2026 से लागू हुए नए नियम के तहत यदि किसी यात्री ने अपना आईआरसीटीसी अकाउंट आधार से लिंक नहीं किया है, तो वह ट्रेन की बुकिंग खुलने वाले पहले दिन सुबह 8 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक टिकट बुक नहीं कर पाएगा। यह नियम सुनने में भले ही सख्त लगे, लेकिन इसके पीछे रेलवे की मंशा आम यात्रियों के हितों की रक्षा करना है।
रेलवे के अनुसार, यह प्रतिबंध केवल उन टिकटों पर लागू होगा, जिनकी बुकिंग ट्रेन के प्रस्थान से 60 दिन पहले खुलती है। यानी जिस दिन रिजर्वेशन की विंडो ओपन होती है, उसी दिन के शुरुआती आठ घंटों में बिना आधार लिंक अकाउंट से टिकट नहीं कट पाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे के बाद सामान्य प्रक्रिया के तहत टिकट बुकिंग की अनुमति होगी।
इस बदलाव का सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ेगा, जिन्होंने अब तक अपने आईआरसीटीसी अकाउंट को आधार से लिंक नहीं कराया है। हालांकि रेलवे ने यह भी साफ किया है कि यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है, ताकि यात्रियों को अचानक किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
रेल मंत्रालय ने इस नई प्रणाली को लागू करने के लिए तीन चरणों की योजना बनाई है। पहला चरण 29 दिसंबर 2025 से शुरू किया गया था, जिसमें यात्रियों को आधार लिंकिंग के लिए जागरूक किया गया। दूसरा चरण 5 जनवरी 2026 से लागू हुआ, जिसमें शुरुआती घंटों की बुकिंग पर प्रतिबंध लगाया गया। तीसरा चरण 12 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा, जिसमें नियमों को और सख्ती से लागू किया जाएगा।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग की शुरुआत से रेलवे को कई फायदे हुए हैं, लेकिन इसके साथ ही दलालों ने भी तकनीक का गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर, फर्जी आईडी और बॉट्स के जरिए कुछ ही सेकंड में बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लिए जाते हैं। इसका खामियाजा आम यात्री को भुगतना पड़ता है, जो घंटों लाइन में लगने या वेबसाइट पर बार-बार कोशिश करने के बावजूद टिकट नहीं पा पाता।
रेलवे का मानना है कि आधार लिंकिंग से एक व्यक्ति एक अकाउंट के सिद्धांत को मजबूत किया जा सकता है। इससे फर्जी अकाउंट बनाना मुश्किल होगा और टिकटों की कालाबाजारी पर लगाम लगेगी। आधार एक यूनिक पहचान है, जिसे दोहराया नहीं जा सकता, इसलिए यह व्यवस्था सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएगी।
नई व्यवस्था में सबसे ज्यादा ध्यान रिजर्वेशन खुलने के पहले दिन पर दिया गया है। आमतौर पर इसी दिन सबसे ज्यादा टिकट बुक होते हैं, खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों और त्योहारों के समय। सुबह 8 बजे जैसे ही रिजर्वेशन खुलता है, कुछ ही मिनटों में सीटें भर जाती हैं। रेलवे का मानना है कि शुरुआती घंटों में केवल आधार लिंक अकाउंट को ही अनुमति देकर असली यात्रियों को बेहतर मौका दिया जा सकता है।
यह भी साफ किया गया है कि यह नियम तत्काल टिकट बुकिंग से अलग है। तत्काल टिकटों के लिए पहले से ही अलग समय और नियम लागू होते हैं। नया बदलाव मुख्य रूप से सामान्य रिजर्वेशन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किया गया है।
आधार लिंकिंग की प्रक्रिया को रेलवे ने सरल रखने की कोशिश की है। यात्री अपने आईआरसीटीसी अकाउंट में लॉग इन करके कुछ आसान स्टेप्स में आधार को जोड़ सकते हैं। ओटीपी आधारित वेरिफिकेशन के जरिए यह प्रक्रिया पूरी होती है, जिससे डेटा की सुरक्षा भी बनी रहती है।
हालांकि कुछ यात्रियों ने इस फैसले पर सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि आधार को हर सेवा से जोड़ना निजता से जुड़ा मुद्दा हो सकता है। लेकिन रेलवे का तर्क है कि यह कदम केवल टिकट बुकिंग को निष्पक्ष बनाने के लिए उठाया गया है और इसका उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग करना नहीं है।
ग्रामीण और बुजुर्ग यात्रियों के लिए रेलवे ने यह भी कहा है कि जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, वे काउंटर से टिकट बुक करने का विकल्प पहले की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। यह नियम मुख्य रूप से ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर लागू होता है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बीते वर्षों में मिली शिकायतों और आंकड़ों के आधार पर यह फैसला लिया गया है। कई मामलों में देखा गया कि एक ही व्यक्ति या समूह ने दर्जनों अकाउंट बनाकर टिकट बुक किए और बाद में ऊंचे दामों पर बेचे। इससे न केवल यात्रियों को नुकसान हुआ, बल्कि रेलवे की छवि भी प्रभावित हुई।
2026 में रेलवे का फोकस डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने पर है। आधार लिंकिंग इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रेलवे का मानना है कि शुरुआत में कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे सभी को फायदा होगा।
जो यात्री नियमित रूप से ट्रेन से सफर करते हैं, उनके लिए यह नियम एक चेतावनी की तरह है कि समय रहते अपना आईआरसीटीसी अकाउंट आधार से लिंक करा लें। इससे न केवल शुरुआती घंटों में बुकिंग की सुविधा मिलेगी, बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की रुकावट से भी बचा जा सकेगा।
रेलवे का यह भी कहना है कि सिस्टम को लगातार मॉनिटर किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसमें सुधार किए जाएंगे। यात्रियों की प्रतिक्रिया के आधार पर नियमों को और बेहतर बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, नया नियम रेलवे की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसमें वह तकनीक के जरिए पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना चाहता है। आधार लिंकिंग से टिकट बुकिंग प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा और आम यात्रियों को वह अधिकार मिलेगा, जो कई बार दलालों के कारण उनसे छिन जाता था।
2026 की शुरुआत में लागू हुआ यह नियम आने वाले समय में रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं की दिशा तय कर सकता है। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो भविष्य में रेलवे और भी सख्त और स्मार्ट नियम लागू कर सकता है, जिससे टिकट बुकिंग का अनुभव और बेहतर हो सके।
