मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों गहरे स्वास्थ्य संकट से गुजर रही है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली जलजनित बीमारी ने ऐसा भयावह रूप ले लिया है कि प्रशासन को इसे आधिकारिक तौर पर एपिडेमिक घोषित करना पड़ा। सोमवार सुबह 17वीं मौत की पुष्टि होते ही पूरे शहर में चिंता और आक्रोश का माहौल बन गया। यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि उन परिवारों की त्रासदी है जिन्होंने अपनों को एक ऐसी बीमारी में खो दिया, जिसकी जड़ें रोजमर्रा की सबसे बुनियादी जरूरत यानी पानी से जुड़ी हुई हैं।

भागीरथपुरा में पिछले कई दिनों से लोग उल्टी, दस्त, तेज बुखार और पेट दर्द जैसी शिकायतों के साथ अस्पतालों में पहुंच रहे थे। शुरुआत में इसे सामान्य मौसमी बीमारी माना गया, लेकिन जैसे-जैसे मरीजों की संख्या बढ़ती गई और मौतें होने लगीं, स्थिति की गंभीरता साफ होती चली गई। जांच में सामने आया कि क्षेत्र में सप्लाई हो रहा पानी बैक्टीरिया से संक्रमित है।
सोमवार सुबह दर्ज हुई 17वीं मौत ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी। यह मौत रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा की थी, जिन्हें एक जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी किडनी में संक्रमण फैल गया और तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनकी मौत ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह बीमारी केवल पेट तक सीमित नहीं रह रही, बल्कि शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने बीमारी को एपिडेमिक घोषित कर दिया। इसका मतलब यह है कि अब यह बीमारी सामान्य नियंत्रण से बाहर मानी जा रही है और इसके लिए विशेष आपात प्रबंध लागू किए जाएंगे। एपिडेमिक घोषित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन को अतिरिक्त अधिकार और जिम्मेदारियां मिल जाती हैं, ताकि तेजी से हालात पर काबू पाया जा सके।
दूषित जल की समस्या की जड़ें काफी गहरी बताई जा रही हैं। नर्मदा जल आपूर्ति को एहतियातन बंद कर दिया गया है, क्योंकि आशंका है कि सप्लाई लाइन में कहीं से प्रदूषण मिला हो सकता है। इसके साथ ही क्षेत्र में मौजूद बोरिंग के पानी की जांच में भी बैक्टीरिया पाए गए हैं। इस कारण बोरिंग का पानी भी पीने योग्य नहीं माना जा रहा।
पानी की इस किल्लत के बीच प्रशासन ने टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति शुरू करवाई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि टैंकर से आने वाला पानी भी पर्याप्त नहीं है और कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है। लोगों के बीच डर इस बात का है कि कहीं यह पानी भी पूरी तरह सुरक्षित न हो।
स्थिति को संभालने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी ICMR की एक विशेष टीम इंदौर पहुंच चुकी है। यह टीम पानी के सैंपल, मरीजों के नमूने और पूरे क्षेत्र की स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रही है। ICMR की भूमिका इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसकी रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि बीमारी किस बैक्टीरिया या वायरस के कारण फैली और इसे रोकने के लिए क्या दीर्घकालिक कदम उठाए जाएं।
भागीरथपुरा में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। जिन लोगों में शुरुआती लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी जा रही है। कई स्थानों पर अस्थायी मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, ताकि मरीजों को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सके।
अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर मरीज गंभीर डिहाइड्रेशन और संक्रमण की स्थिति में पहुंच रहे हैं, जिससे इलाज जटिल हो जाता है।
स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि अगर समय रहते पानी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता और शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता, तो इतनी बड़ी त्रासदी को रोका जा सकता था। कई निवासियों ने बताया कि उन्होंने पहले भी पानी की बदबू और रंग को लेकर शिकायत की थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नगर निगम की टीमें अब पाइपलाइन, टंकियों और जल स्रोतों की गहन जांच कर रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि कहीं सीवेज लाइन से पीने के पानी की लाइन में रिसाव हुआ हो, जिससे पानी दूषित हो गया। यह समस्या पुराने शहरी इलाकों में अक्सर देखने को मिलती है, जहां जल और सीवेज की लाइनें पास-पास होती हैं।
प्रशासन का कहना है कि हालात को नियंत्रित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। साफ पानी की आपूर्ति बहाल करने, संक्रमण के स्रोत की पहचान करने और मरीजों के इलाज में कोई कमी न रहने देने के निर्देश दिए गए हैं।
यह संकट इंदौर जैसे बड़े और विकसित शहर के लिए एक चेतावनी भी है। साफ पानी और स्वच्छता को लेकर थोड़ी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है, इसका यह जीवंत उदाहरण बन गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जलजनित बीमारियां अक्सर तेजी से फैलती हैं और अगर शुरुआत में इन्हें गंभीरता से न लिया जाए, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। ऐसे में लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पीना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और किसी भी लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।
भागीरथपुरा की गलियों में पसरा सन्नाटा और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ इस बात की गवाही दे रही है कि यह सिर्फ एक मोहल्ले की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए एक सबक है। प्रशासन और जनता दोनों को मिलकर इससे उबरना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
