मध्यप्रदेश में प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है। रायसेन जिले की बरेली तहसील को जिला बनाए जाने की मांग वर्षों से चलती आ रही है, और अब इस पर फिर से उम्मीदें जग गई हैं। प्रदेश सरकार द्वारा गठित प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने जा रहा है, जिसमें बरेली को नया जिला बनाए जाने का प्रस्ताव शामिल होने की संभावना है।

इतिहास की गहराइयों में बरेली की पहचान
रायसेन जिले का यह इलाका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक दृष्टि से हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। यह क्षेत्र भोपाल रियासत के अधीन रहा, जहां आज़ादी के पहले नबाबों का शासन था। जब 1949 में भोपाल राज्य भारत संघ में विलय हुआ, तो रायसेन को जिला मुख्यालय बनाया गया। इसके बाद 1956 में जब मध्यप्रदेश राज्य का पुनर्गठन हुआ, तब भी रायसेन जिले को बरकरार रखा गया।
लेकिन तब से लेकर आज तक बरेली और उदयपुरा क्षेत्र के लोगों के मन में एक ही प्रश्न रहा — क्या बरेली को कभी अपना जिला बनने का अवसर मिलेगा?
भौगोलिक दूरी बनी परेशानी की जड़
रायसेन मुख्यालय से बरेली और उदयपुरा की दूरी करीब 150-180 किलोमीटर है। ऐसे में किसी भी सरकारी काम या प्रशासनिक कार्यवाही के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई गांव ऐसे हैं जो मुख्यालय से इतनी दूर हैं कि वहां तक पहुंचना लोगों के लिए बेहद कठिन होता है।
इसी भौगोलिक दूरी ने बरेली को जिला बनाने की मांग को बल दिया है। स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठन वर्षों से यह मांग करते आ रहे हैं कि प्रशासनिक सुविधा के लिए बरेली को अलग जिला घोषित किया जाए।
न्याय व्यवस्था के लिए बरेली का महत्व
कुछ साल पहले उच्च न्यायालय ने भी इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए बरेली में एडीजे कोर्ट स्थापित किया था। न्यायालय का मानना था कि रायसेन जिले की विशाल भौगोलिक सीमाओं के कारण लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय नहीं मिल पा रहा था। इसीलिए अदालत ने जिले को न्यायिक दृष्टि से दो भागों — रायसेन और बरेली — में विभाजित किया।
अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब न्यायिक दृष्टि से यह विभाजन संभव है, तो प्रशासनिक दृष्टि से क्यों नहीं? यदि न्याय व्यवस्था के लिए दो केंद्र हो सकते हैं, तो सुलभ प्रशासन के लिए बरेली को जिला बनाना भी पूरी तरह उचित कदम होगा।
राजनीतिक कारणों से बढ़ी उम्मीदें
हाल ही में बरेली क्षेत्र के विधायक को राज्य मंत्रिमंडल में स्थान मिलने के बाद इस मांग को नया बल मिला है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि अब जब उनका प्रतिनिधि सीधे सरकार में है, तो बरेली को जिला बनाए जाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक या राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि यह उन शहीदों की स्मृति से जुड़ी भावना भी है जिन्होंने भोपाल रियासत के भारत में विलय के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। बरेली को जिला बनाना उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
बरेली की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान
बरेली सिर्फ एक तहसील नहीं, बल्कि एक जीवंत सामाजिक इकाई है। यहां के लोग शिक्षा, कृषि, व्यापार और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्र की अपनी लोकसंस्कृति, परंपराएं और ऐतिहासिक स्थल हैं जो इसे अन्य क्षेत्रों से अलग पहचान देते हैं।
रायसेन, उदयपुरा, देवरी और सिलवानी जैसे इलाकों के बीच बरेली की भौगोलिक स्थिति इसे एक स्वाभाविक प्रशासनिक केंद्र बनाती है। यदि इसे जिला बनाया जाता है, तो आस-पास के ग्रामीण इलाकों को प्रशासनिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बड़ा लाभ मिलेगा।
पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट पर टिकी नजरें
प्रदेश सरकार द्वारा गठित प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। आयोग का काम प्रदेश के विभिन्न जिलों और तहसीलों का अध्ययन करना है ताकि यह तय किया जा सके कि किन क्षेत्रों को नया जिला या तहसील बनाया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, आयोग ने बरेली को लेकर कई बार क्षेत्रीय दौरे किए हैं और स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों से फीडबैक भी लिया है। रिपोर्ट में यह संभावना जताई जा रही है कि बरेली को नया जिला बनाने की सिफारिश की जा सकती है।
आर्थिक और विकासात्मक संभावनाएं
यदि बरेली को जिला घोषित किया जाता है, तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्र के विकास की दिशा भी तय करेगा।
- बरेली में नए सरकारी कार्यालय, अस्पताल, कॉलेज और रोजगार के अवसर खुलेंगे।
- सड़क और परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा।
- स्थानीय बाजार और कृषि व्यापार को नया विस्तार मिलेगा।
- पर्यटन के लिहाज से भी यह क्षेत्र आकर्षक बन सकता है, क्योंकि रायसेन और आसपास के इलाके ऐतिहासिक धरोहरों से भरे हैं।
जनता की राय — “अब इंतज़ार नहीं”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे बीते दो दशकों से इस मांग को उठा रहे हैं। कई बार ज्ञापन दिए गए, धरने और प्रदर्शन भी हुए, लेकिन अब वे सिर्फ वादों से नहीं, परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं।
बरेली के एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा — “हमने प्रशासनिक उपेक्षा बहुत झेली है। अब वक्त है कि सरकार हमारी आवाज सुने और बरेली को उसका हक दे।”
निष्कर्ष — उम्मीदों का नया अध्याय
दिसंबर की रिपोर्ट आने तक क्षेत्रवासियों में उत्सुकता बनी हुई है। यदि आयोग की सिफारिश के बाद सरकार बरेली को जिला घोषित करती है, तो यह न केवल प्रशासनिक दृष्टि से बल्कि भावनात्मक रूप से भी एक ऐतिहासिक निर्णय होगा।
बरेली की यह कहानी सिर्फ एक तहसील की नहीं, बल्कि उन हजारों नागरिकों की है जो वर्षों से अपने इलाके के सम्मान और सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
