मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स भोपाल अब केवल एक उपचार केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। संस्थान के विस्तार को लेकर जो योजनाएं सामने आई हैं, वे न सिर्फ प्रदेश बल्कि आसपास के राज्यों के लिए भी चिकित्सा सुविधाओं की तस्वीर बदलने वाली हैं। एयर एम्बुलेंस सेवा से लेकर अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल तक, एम्स भोपाल को एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ विकसित करने की तैयारी चल रही है।

यह विस्तार केवल इमारतों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इससे आपातकालीन चिकित्सा, विशेष उपचार और शोध के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।
एम्स भोपाल से उड़ान भरेगी एयर एम्बुलेंस
एम्स भोपाल से सीधे एयर एम्बुलेंस के लैंडिंग और टेकऑफ की योजना अब कागजों से निकलकर प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच चुकी है। इसके लिए संस्थान परिसर में एक समर्पित हेलीपैड बनाने का प्रस्ताव भारत सरकार की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी के समक्ष रखा गया है। इस प्रस्ताव पर विचार चल रहा है और इसे स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
एयर एम्बुलेंस की सुविधा शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों को दूर-दराज के इलाकों से कम समय में एम्स भोपाल तक लाया जा सकेगा। खासकर ट्रॉमा, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और गंभीर दुर्घटनाओं के मामलों में यह सेवा जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
आपात चिकित्सा सेवाओं में बड़ा बदलाव
भोपाल और आसपास के कई जिलों में अब तक गंभीर मरीजों को सड़क मार्ग से लाना ही एकमात्र विकल्प रहा है। कई बार दूरी और समय की वजह से मरीज की हालत बिगड़ जाती थी। एयर एम्बुलेंस सेवा इस समस्या का प्रभावी समाधान बन सकती है।
एम्स भोपाल से संचालित होने वाली यह सुविधा न केवल मध्यप्रदेश बल्कि छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी उपयोगी होगी। इससे एम्स भोपाल की पहुंच और जिम्मेदारी दोनों का दायरा बढ़ेगा।
कैंसर उपचार को मिलेगा नया आयाम
एम्स भोपाल के विस्तार की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है कैंसर अस्पताल यानी ऑन्कोलॉजी सेंटर का निर्माण। प्रस्ताव के अनुसार यहां लगभग 200 से 300 बेड का अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल विकसित किया जाएगा। यह केंद्र कैंसर के निदान, उपचार और अनुसंधान के लिए समर्पित होगा।
प्रदेश में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक गंभीर मामलों में मरीजों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। एम्स भोपाल में कैंसर अस्पताल बनने से यह दबाव काफी हद तक कम हो सकेगा और मरीजों को अपने ही राज्य में उच्चस्तरीय इलाज मिलेगा।
आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ सेवाएं
प्रस्तावित कैंसर अस्पताल में रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके साथ ही कैंसर रिसर्च और प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके।
यह केंद्र केवल उपचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कैंसर जागरूकता और प्रारंभिक जांच कार्यक्रमों का भी एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
पांच बड़े प्रोजेक्ट से बदलेगा एम्स का स्वरूप
एयर एम्बुलेंस और कैंसर अस्पताल के अलावा एम्स भोपाल में कुल पांच बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य संस्थान की क्षमता, सेवाओं और बुनियादी ढांचे को नए स्तर पर ले जाना है।
इन परियोजनाओं में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार, नए चिकित्सा विभागों की स्थापना, आधुनिक उपकरणों की खरीद और मरीजों की सुविधाओं में सुधार शामिल है। इससे एम्स भोपाल को एक संपूर्ण मेडिकल हब के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
एक हजार करोड़ रुपये से होगा विस्तार
एम्स भोपाल के इस महत्वाकांक्षी विस्तार पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। यह निवेश चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, ताकि सभी परियोजनाएं समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरी हो सकें।
सांसद और जनप्रतिनिधियों ने इस विस्तार को भोपाल और पूरे मध्यप्रदेश के लिए ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और मरीजों को बाहर जाने की मजबूरी कम होगी।
प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती
एम्स भोपाल पहले से ही प्रदेश के लिए एक रेफरल सेंटर की भूमिका निभा रहा है। विस्तार के बाद यह भूमिका और मजबूत होगी। जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से आने वाले गंभीर मामलों को यहां बेहतर उपचार मिल सकेगा।
इससे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बेहतर समन्वय बनेगा, जहां प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तर की सेवाएं एक-दूसरे से जुड़ी होंगी।
रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर
एम्स भोपाल के विस्तार से केवल मरीजों को ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर भी पैदा होंगे। डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों और प्रशासनिक स्टाफ की आवश्यकता बढ़ेगी।
इसके साथ ही मेडिकल छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भी एम्स भोपाल एक आकर्षक केंद्र बनेगा, जहां उन्हें उन्नत सुविधाओं के साथ सीखने और शोध करने का अवसर मिलेगा।
क्षेत्रीय विकास को भी मिलेगा बढ़ावा
इतने बड़े स्तर पर होने वाला स्वास्थ्य निवेश केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रहता। इससे आसपास के क्षेत्रों में आवास, परिवहन और अन्य सेवाओं का भी विकास होता है।
एम्स भोपाल के विस्तार से शहर की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी और भोपाल को एक प्रमुख मेडिकल डेस्टिनेशन के रूप में पहचान मिलेगी।
सरकार और संस्थान की संयुक्त पहल
यह पूरा विस्तार केंद्र सरकार और एम्स प्रशासन की संयुक्त योजना का हिस्सा है। स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी में प्रस्ताव रखने का मतलब है कि परियोजनाएं वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से आगे बढ़ रही हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को देखते हुए इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
निष्कर्ष: मध्यभारत के लिए नई उम्मीद
एम्स भोपाल में एयर एम्बुलेंस सेवा, कैंसर अस्पताल और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स केवल इमारतों का विस्तार नहीं हैं, बल्कि यह मध्यभारत की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई उम्मीद का प्रतीक हैं।
यदि ये योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में एम्स भोपाल देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में और भी मजबूत स्थान बना सकेगा।
