हर भारतीय के मन में एक न एक दिन यह सवाल जरूर उठता है कि जब नौकरी खत्म हो जाएगी, तब जीवन कैसे चलेगा। जवानी में कमाई रहती है, खर्च भी संभल जाते हैं, लेकिन जैसे ही उम्र बढ़ने लगती है, बच्चों की पढ़ाई, शादी और स्वास्थ्य जैसी जिम्मेदारियां चिंता बढ़ा देती हैं। ऐसे में रिटायरमेंट की योजना यदि समय पर न बनाई जाए, तो बुढ़ापा आर्थिक तनाव में बदल सकता है।

लेकिन यही डर 30 साल की उम्र में एक अवसर भी बन सकता है। यह वह दौर होता है जब कमाई अपेक्षाकृत स्थिर हो जाती है, जिम्मेदारियां अभी पूरी तरह सिर पर नहीं चढ़ी होतीं और सबसे बड़ी पूंजी समय आपके पास होता है। यही समय है जब सही प्लानिंग करके रिटायरमेंट को बोझ नहीं बल्कि सुकून का समय बनाया जा सकता है।
नेशनल पेंशन सिस्टम क्यों बना भरोसे का विकल्प
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए भारत में कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस को खास तौर पर लंबी अवधि के लिए एक मजबूत स्कीम माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सरकारी ढांचे के तहत चलती है, टैक्स बचत का मौका देती है और साथ ही बाजार से जुड़े होने के कारण बेहतर रिटर्न की संभावना भी रखती है।
30 साल की उम्र में एनपीएस शुरू करने का मतलब यह है कि आपके पास लगभग तीन दशक का समय होता है, जिसमें कंपाउंडिंग आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। छोटी-छोटी मासिक रकम समय के साथ बड़ा फंड तैयार कर सकती है, जिसका अंदाजा शुरुआत में लगाना मुश्किल होता है।
60 हजार रुपये मंथली पेंशन का सपना कितना वास्तविक
अक्सर लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने 60 हजार रुपये जैसी पेंशन केवल बड़े अफसरों या उच्च पदों पर काम करने वालों को ही मिल सकती है। लेकिन सच्चाई यह है कि यदि योजना सही हो और निवेश समय पर शुरू किया जाए, तो मध्यम आय वाला व्यक्ति भी यह लक्ष्य हासिल कर सकता है।
60 हजार रुपये महीने की पेंशन का मतलब साल भर में करीब 7.2 लाख रुपये की नियमित आय। यह रकम रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के लिए काफी हद तक पर्याप्त मानी जा सकती है, खासकर तब जब घर जैसी बड़ी जिम्मेदारियां पहले ही पूरी हो चुकी हों।
एनपीएस में पेंशन कैसे बनती है
एनपीएस की संरचना को समझना जरूरी है। इसमें निवेश के दौरान आपका पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज जैसे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट के समय इस पूरे फंड को एक साथ नहीं निकाला जा सकता। मौजूदा नियमों के अनुसार कम से कम 40 प्रतिशत राशि एन्युटी में लगानी होती है, जिससे आपको आजीवन पेंशन मिलती है।
मान लीजिए कि एन्युटी पर औसतन 6 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है। ऐसे में यदि आपको सालाना 7.2 लाख रुपये की पेंशन चाहिए, तो एन्युटी फंड में लगभग 1.2 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। इसका मतलब यह हुआ कि रिटायरमेंट तक आपके एनपीएस खाते में कुल कॉर्पस करीब 3 करोड़ रुपये होना चाहिए।
इसमें से 40 प्रतिशत यानी 1.2 करोड़ रुपये पेंशन के लिए इस्तेमाल होंगे और बाकी 60 प्रतिशत यानी करीब 1.8 करोड़ रुपये आप एकमुश्त निकाल सकते हैं, जो कई मामलों में टैक्स फ्री भी होता है।
30 साल की उम्र से 3 करोड़ कैसे बन सकते हैं
अब सबसे अहम सवाल यही है कि 30 साल की उम्र से शुरुआत करने पर 3 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाने के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा। यदि आप 60 साल की उम्र में रिटायर होते हैं, तो आपके पास लगभग 30 साल का समय होता है।
एनपीएस में लंबे समय में औसतन 9 से 10 प्रतिशत तक का रिटर्न देखा गया है, हालांकि यह बाजार पर निर्भर करता है। यदि 9 प्रतिशत का औसत रिटर्न मान लिया जाए, तो हर महीने लगभग 16,000 रुपये के आसपास निवेश करने से 30 साल में 3 करोड़ के करीब फंड तैयार हो सकता है। वहीं यदि रिटर्न 10 प्रतिशत के आसपास रहा, तो यही लक्ष्य करीब 13,000 से 14,000 रुपये के मासिक निवेश से भी हासिल किया जा सकता है।
यहां असली जादू कंपाउंडिंग का है। शुरुआती वर्षों में फंड भले ही धीरे बढ़े, लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता है, ब्याज पर ब्याज जुड़ने लगता है और आखिरी दस वर्षों में फंड तेजी से बढ़ता है।
समय के साथ निवेश बढ़ाने की समझदारी
30 साल की उम्र में हर महीने 13 से 16 हजार रुपये निवेश करना कुछ लोगों को भारी लग सकता है। लेकिन इसका एक सरल समाधान है। जैसे-जैसे आपकी सैलरी बढ़े, वैसे-वैसे निवेश की रकम भी थोड़ा-थोड़ा बढ़ाई जाए।
इस तरीके से शुरुआती बोझ कम रहता है और भविष्य में बड़ा लक्ष्य भी आसानी से हासिल हो जाता है। यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स हमेशा जल्दी शुरुआत करने की सलाह देते हैं।
टैक्स बचत और एनपीएस का अतिरिक्त फायदा
एनपीएस केवल पेंशन ही नहीं देता, बल्कि टैक्स बचत का भी मजबूत साधन है। निवेश के दौरान आपको आयकर में छूट मिलती है और रिटायरमेंट के समय 60 प्रतिशत तक की राशि टैक्स फ्री निकाली जा सकती है।
इस तरह यह स्कीम न सिर्फ भविष्य को सुरक्षित बनाती है, बल्कि वर्तमान में भी आपकी टैक्स देनदारी को कम करती है।
रिटायरमेंट को तनाव नहीं सुकून बनाने की तैयारी
जब कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र में रिटायरमेंट की योजना बनाता है, तो वह केवल पैसे नहीं जोड़ता, बल्कि भविष्य की चिंता से भी खुद को मुक्त करता है। यह मानसिक शांति भी उतनी ही जरूरी है जितनी आर्थिक सुरक्षा।
हर महीने एक तय रकम एनपीएस में डालना एक आदत बन जाती है और धीरे-धीरे यह आपकी जिंदगी का हिस्सा बन जाती है। समय के साथ यह छोटी आदत बड़े सपने को साकार कर देती है।
60 की उम्र में कैसा हो सकता है जीवन
कल्पना कीजिए कि 60 साल की उम्र में हर महीने 60 हजार रुपये आपके खाते में नियमित रूप से आते रहें। न किसी पर निर्भरता, न बच्चों पर बोझ और न ही खर्चों की चिंता।
यही वह आज़ादी है, जिसके लिए आज की थोड़ी सी समझदारी आने वाले कल को आसान बना सकती है।
सही उम्र पर लिया गया फैसला
एनपीएस में निवेश कोई त्वरित लाभ की स्कीम नहीं है। यह धैर्य और अनुशासन की मांग करती है। लेकिन जो लोग 30 साल की उम्र में यह फैसला लेते हैं, वे अक्सर रिटायरमेंट के समय खुद को सबसे सुरक्षित स्थिति में पाते हैं।
इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि रिटायरमेंट की चिंता का सबसे सही इलाज समय पर की गई योजना है।
