भोपाल में आयोजित हो रही 69वीं राष्ट्रीय राइफल प्रतियोगिता को लेकर देशभर से आए निशानेबाजों में जहां उत्साह का माहौल था, वहीं प्रतियोगिता के पहले ही दिन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में आई बड़ी तकनीकी खामी ने इस उत्साह पर पानी फेर दिया। सुभाष एक्सीलेंस स्कूल परिसर में सोमवार शाम चार बजे से शुरू हुई ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया कुछ ही समय में पूरी तरह ठप हो गई। नेटवर्क फेल होने के कारण सैकड़ों प्रतिभागियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा और आयोजन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए।

यह प्रतियोगिता न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के शूटिंग खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें भाग लेने के लिए विभिन्न राज्यों से खिलाड़ी, कोच और अधिकारी भोपाल पहुंचे थे। सभी को उम्मीद थी कि आधुनिक तकनीक के जरिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सुगम और तेज होगी, लेकिन वास्तविकता इसके उलट सामने आई।
शाम चार बजे जैसे ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ, शुरुआती कुछ मिनटों तक सिस्टम सामान्य रूप से काम करता रहा। प्रतिभागियों ने अपने दस्तावेज अपलोड करने और व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन जल्द ही नेटवर्क की गति धीमी होने लगी और कुछ ही देर में पूरी प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया। स्क्रीन फ्रीज होने लगी, डेटा सबमिट नहीं हो पा रहा था और कई प्रतिभागियों के फॉर्म अधूरे रह गए।
नेटवर्क ठप होते ही परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दूर-दराज से आए खिलाड़ी और उनके साथ आए अभिभावक यह समझ नहीं पा रहे थे कि रजिस्ट्रेशन पूरा होगा भी या नहीं। कई प्रतिभागियों ने शिकायत की कि वे घंटों लाइन में खड़े रहे, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुछ खिलाड़ियों ने तो यह भी कहा कि तकनीकी खराबी के कारण उनका मनोबल प्रभावित हुआ है।
प्रतियोगिता जैसे बड़े आयोजन में रजिस्ट्रेशन सबसे अहम प्रक्रिया मानी जाती है। यही वह चरण होता है जहां से खिलाड़ी का आधिकारिक रूप से प्रतियोगिता में प्रवेश तय होता है। ऐसे में इस प्रक्रिया का बाधित होना न केवल खिलाड़ियों के लिए तनाव का कारण बना, बल्कि आयोजकों की तैयारियों पर भी प्रश्नचिह्न लगा गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोजन से जुड़े अधिकारियों ने बाद में मैन्युअल एंट्री की व्यवस्था शुरू करने का फैसला लिया। कागजी फॉर्म के जरिए खिलाड़ियों का पंजीकरण किया जाने लगा ताकि प्रतियोगिता की समय-सारिणी पर असर न पड़े। हालांकि, मैन्युअल प्रक्रिया शुरू होने तक काफी समय बीत चुका था और तब तक बड़ी संख्या में प्रतिभागी परेशान हो चुके थे।
खिलाड़ियों का कहना था कि डिजिटल युग में इस तरह की तकनीकी असफलता निराशाजनक है। कई प्रतिभागियों ने यह सवाल उठाया कि जब इतने बड़े स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा था, तो नेटवर्क और तकनीकी ढांचे की पहले से पर्याप्त जांच क्यों नहीं की गई। कुछ खिलाड़ियों ने यह भी कहा कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य ही यही था कि समय की बचत हो और पारदर्शिता बनी रहे, लेकिन नेटवर्क फेल होने से इसका उलटा असर हुआ।
सुभाष एक्सीलेंस स्कूल परिसर में बने अस्थायी रजिस्ट्रेशन केंद्र पर देर शाम तक लंबी कतारें लगी रहीं। कई खिलाड़ी अपने हथियारों और किट के साथ खड़े दिखाई दिए। कुछ ने जमीन पर बैठकर इंतजार किया, तो कुछ लगातार अधिकारियों से स्थिति के बारे में जानकारी लेते रहे। हालांकि, शुरुआत में किसी के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था।
आयोजन से जुड़े अधिकारियों का कहना था कि नेटवर्क समस्या अचानक आई और इसे ठीक करने की कोशिश की गई, लेकिन तत्काल समाधान संभव नहीं हो सका। उन्होंने यह भी बताया कि तकनीकी टीम को बुलाया गया, लेकिन नेटवर्क पूरी तरह बहाल होने में समय लगा। इस बीच, प्रतियोगिता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मैन्युअल रजिस्ट्रेशन को ही विकल्प के रूप में अपनाया गया।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बड़े खेल आयोजनों में तकनीकी निर्भरता के साथ-साथ बैक-अप व्यवस्था कितनी जरूरी है। ऑनलाइन सिस्टम सुविधाजनक जरूर होता है, लेकिन जब वह असफल हो जाए तो वैकल्पिक व्यवस्था पहले से तैयार होनी चाहिए।
69वीं राष्ट्रीय राइफल प्रतियोगिता में देश के उभरते और अनुभवी दोनों तरह के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। यह मंच कई खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता भी बन सकता है। ऐसे में आयोजन के शुरुआती दिन पर ही इस तरह की अव्यवस्था खिलाड़ियों के मन में असंतोष पैदा कर सकती है।
कुछ कोचों का कहना था कि खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी प्रतियोगिता से पहले ही शुरू हो जाती है। रजिस्ट्रेशन जैसी बुनियादी प्रक्रिया में बाधा आने से खिलाड़ियों का फोकस भंग होता है, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है। खासकर युवा खिलाड़ियों के लिए यह स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण रही।
हालांकि, मैन्युअल एंट्री शुरू होने के बाद धीरे-धीरे स्थिति संभलने लगी। अधिकारियों ने अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया और फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया तेज करने की कोशिश की। इसके बावजूद देर रात तक रजिस्ट्रेशन चलता रहा। कई प्रतिभागियों को उम्मीद थी कि अगले दिन तक सारी प्रक्रियाएं सुचारू रूप से पूरी हो जाएंगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि खेल आयोजनों में केवल खेल सुविधाएं ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। एक छोटी-सी तकनीकी चूक भी पूरे आयोजन की छवि को प्रभावित कर सकती है।
भोपाल जैसे शहर में इस स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन अपने-आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे न केवल शहर की पहचान बनती है, बल्कि स्थानीय खेल संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है। लेकिन ऐसी घटनाएं आयोजकों के लिए सबक भी होती हैं कि भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश न छोड़ी जाए।
आगे के दिनों में प्रतियोगिता के सुचारू संचालन पर सभी की नजरें टिकी हैं। खिलाड़ी चाहते हैं कि अब उनका पूरा ध्यान केवल निशाने पर रहे, न कि रजिस्ट्रेशन या व्यवस्थाओं की चिंता पर। वहीं, आयोजकों के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वे बाकी दिनों में किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा से बचें।
कुल मिलाकर, 69वीं राष्ट्रीय राइफल प्रतियोगिता की शुरुआत तकनीकी अव्यवस्था के साये में जरूर हुई, लेकिन यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में खेल भावना और खिलाड़ियों का जज्बा इन परेशानियों पर भारी पड़ेगा और प्रतियोगिता अपने उद्देश्य के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न होगी।
